शहर बदलते ही क्यों बदल जाते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट? VAT-Sales Tax से बढ़ता है अंतर, जानें तेल पर क्यों नहीं लगता GST
केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद देशभर में ईंधन के दाम फिर चर्चा में हैं. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. इसकी मुख्य वजह राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले अलग-अलग टैक्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें हैं.
Tax on Petrol Diesel in India : 15 मई से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. केंद्र सरकार ने प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद अलग-अलग शहरों में ईंधन के दामों का अंतर फिर चर्चा में आ गया है. दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि कोलकाता में यही कीमत 108.74 रुपये तक पहुंच गई है. सवाल यह उठता है कि एक ही देश में एक जैसा पेट्रोल अलग-अलग शहरों में अलग दाम पर क्यों मिलता है.
राज्यों के टैक्स से बढ़ता है अंतर
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सबसे बड़ा फर्क राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट (VAT) और अन्य टैक्स की वजह से आता है. केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में लगभग समान रखती है, लेकिन हर राज्य अपने हिसाब से टैक्स तय करता है. यही कारण है कि दिल्ली में पेट्रोल अपेक्षाकृत सस्ता है, जबकि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह महंगा पड़ता है.
किस राज्य में लगता है कितना टैक्स?
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | पेट्रोल पर टैक्स (सरल भाषा में) | डीजल पर टैक्स (सरल भाषा में) |
|---|---|---|
| आंध्र प्रदेश | 31% वैट + ₹4/लीटर टैक्स + ₹1/लीटर रोड डेवलपमेंट सेस | 22.25% वैट + ₹4/लीटर टैक्स + ₹1/लीटर रोड डेवलपमेंट सेस |
| अरुणाचल प्रदेश | 14.50% वैट | 7% वैट |
| दिल्ली | 19.40% वैट | ₹250/KL एयर एम्बिएंस शुल्क + 16.75% वैट |
| गोवा | 21.5% वैट + 0.5% ग्रीन सेस | 17.5% वैट + 0.5% ग्रीन सेस |
| गुजरात | 13.7% वैट + 4% सेस | 14.9% वैट + 4% सेस |
| हरियाणा | 18.20% या ₹14.50/लीटर (जो अधिक हो) + 5% अतिरिक्त टैक्स | 16% या ₹11.86/लीटर (जो अधिक हो) + 5% अतिरिक्त टैक्स |
| हिमाचल प्रदेश | 17.5% या ₹13.50/लीटर (जो अधिक हो) | 13.9% या ₹10.40/लीटर (जो अधिक हो) |
| जम्मू और कश्मीर | 24% टैक्स + ₹2/लीटर रोजगार सेस | 16% टैक्स + ₹1/लीटर रोजगार सेस |
| झारखंड | 22% या ₹17/लीटर (जो अधिक हो) + ₹1 सेस | 22% या ₹12.50/लीटर (जो अधिक हो) + ₹1 सेस |
| कर्नाटक | 29.84% बिक्री कर | 21.17% बिक्री कर |
| केरल | 30.08% बिक्री कर + अतिरिक्त टैक्स + 1% सेस | 22.76% बिक्री कर + अतिरिक्त टैक्स + 1% सेस |
| मध्य प्रदेश | 29% वैट + ₹2.5/लीटर + 1% सेस | 19% वैट + ₹1.5/लीटर + 1% सेस |
| महाराष्ट्र (मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई) | 25% वैट + ₹5.12/लीटर अतिरिक्त टैक्स | 21% वैट |
| महाराष्ट्र (बाकी राज्य) | 25% वैट + ₹5.12/लीटर अतिरिक्त टैक्स | 21% वैट |
| मणिपुर | 25% वैट | 13.5% वैट |
| मेघालय | 13.5% या ₹13.50/लीटर (जो अधिक हो) | 5% या ₹9.50/लीटर (जो अधिक हो) |
| मिजोरम | 18% टैक्स + इंफ्रास्ट्रक्चर सेस | 10% टैक्स + इंफ्रास्ट्रक्चर सेस |
| नागालैंड | 21.75% वैट या ₹16.94/लीटर | 17.20% वैट या ₹12.83/लीटर |
| ओडिशा | 28% वैट | 24% वैट |
किस शहर में है कितना रेट?
| शहर | पेट्रोल कीमत (प्रति लीटर) | डीजल कीमत (प्रति लीटर) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹97.77 | ₹90.67 |
| कोलकाता | ₹108.70 | ₹95.13 |
| मुंबई | ₹106.68 | ₹93.14 |
| चेन्नई | ₹103.67 | ₹95.25 |
| गुरुग्राम | ₹98.47 | ₹90.94 |
| नोएडा | ₹97.76 | ₹90.99 |
| बेंगलुरु | ₹106.17 | ₹94.10 |
| भुवनेश्वर | ₹104.57 | ₹96.11 |
| चंडीगढ़ | ₹97.27 | ₹85.25 |
| हैदराबाद | ₹110.89 | ₹98.96 |
| जयपुर | ₹107.61 | ₹92.90 |
| लखनऊ | ₹97.72 | ₹91.01 |
| पटना | ₹108.92 | ₹94.97 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹110.61 | ₹99.38 |
मुंबई और कोलकाता में क्यों महंगा है पेट्रोल?
मुंबई में महाराष्ट्र सरकार के अतिरिक्त टैक्स और सेस के कारण पेट्रोल की कीमतें ज्यादा रहती हैं. वहीं कोलकाता में पश्चिम बंगाल का हाई वैट लोगों की जेब पर असर डालता है. चेन्नई में तमिलनाडु सरकार का अलग टैक्स फॉर्मूला लागू है, इसलिए वहां की कीमतें दिल्ली और मुंबई के बीच रहती हैं. एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते ही पेट्रोल के दाम 10 से 11 रुपये तक बदल सकते हैं.
कच्चे तेल की कीमतों का भी असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारत में ईंधन महंगा होने की बड़ी वजह है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है. भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले बदलाव का सीधा असर यहां के पेट्रोल-डीजल दामों पर पड़ता है.
क्या पूरे देश में एक समान कीमत संभव है?
कई अर्थशास्त्री पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग करते रहे हैं. इससे पूरे देश में ईंधन की कीमतों में एकरूपता आ सकती है. लेकिन राज्य सरकारें इसका विरोध करती हैं, क्योंकि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला टैक्स उनकी आय का बड़ा स्रोत है. जब तक यह व्यवस्था नहीं बदलती, तब तक भारत में शहर और राज्य बदलते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बदलती रहेंगी.
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