मोदी सरकार करेगी समुद्र मंथन… बंगाल से गुजरात तक मेगा अभियान, कहीं भी हो जंग अब भारत रहेगा टेंशन फ्री
केंद्र सरकार समुद्र के नीचे छिपे तेल और गैस के भंडार खोजने के लिए देश का सबसे बड़ा Offshore Energy Survey शुरू करने की तैयारी में है. इसके तहत बंगाल की खाड़ी और पूर्वी तट के कई बड़े समुद्री इलाकों में खास जहाजों के जरिए जमीन के नीचे स्कैनिंग की जाएगी.
Offshore Energy Hunt: भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रहा है. केंद्र सरकार समुद्र के नीचे छिपे तेल और गैस के भंडार खोजने के लिए देश का सबसे बड़ा Offshore Energy Survey शुरू करने की तैयारी में है. इसके तहत बंगाल की खाड़ी और पूर्वी तट के कई बड़े समुद्री इलाकों में खास जहाजों के जरिए जमीन के नीचे स्कैनिंग की जाएगी.
सरकार का मकसद देश में तेल और गैस के नए भंडार खोजकर विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना है. फिलहाल भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में Middle East तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध या वैश्विक तेल संकट का सीधा असर भारत पर पड़ता है.
किन इलाकों में होगा बड़ा सर्वे
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक यह सर्वे Bengal-Purnea, Mahanadi, Krishna-Godavari, Cauvery और Andaman Offshore Basin में किया जाएगा. यह पूरा प्रोजेक्ट Directorate General of Hydrocarbons यानी DGH की निगरानी में होगा. सरकार ने इसके लिए 14 मई को टेंडर भी जारी कर दिए हैं.
कितना बड़ा होगा यह सर्वे
- Network 18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह सर्वे बेहद बड़े स्तर पर किया जाएगा.
- सिर्फ Bengal-Purnea और Mahanadi Basin में ही करीब 45 हजार लाइन किलोमीटर तक स्कैनिंग होगी.
- वहीं Andaman Basin और Krishna-Godavari Basin में 43-43 हजार लाइन किलोमीटर का सर्वे किया जाएगा.
- इसके अलावा Cauvery Basin में करीब 30 हजार लाइन किलोमीटर तक जांच होगी. यह पूरा काम करीब दो साल तक चल सकता है.

आखिर कैसे खोजा जाएगा तेल और गैस
इस सर्वे के दौरान खास जहाज समुद्र में लंबी केबल जैसी मशीनें लेकर चलेंगे. ये मशीनें समुद्र की सतह के नीचे Sound Waves भेजेंगी और वापस आने वाली तरंगों के जरिए जमीन के अंदर की तस्वीर तैयार की जाएगी. इसके बाद वैज्ञानिक यह पता लगाएंगे कि समुद्र के नीचे कहां तेल और गैस छिपे हो सकते हैं.
Andaman Basin पर सबसे ज्यादा नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि Andaman Offshore Region में बड़े गैस भंडार हो सकते हैं. इस इलाके की भौगोलिक संरचना Myanmar और Indonesia के गैस क्षेत्रों जैसी मानी जाती है. सरकारी दस्तावेजों में भी कहा गया है कि यहां पहले से गैस मिलने के संकेत मिले हैं.
Krishna-Godavari Basin भी अहम
- Krishna-Godavari यानी KG Basin पहले से भारत के बड़े गैस उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है.
- लेकिन सरकार को उम्मीद है कि समुद्र के और गहरे हिस्सों में अभी भी बड़े भंडार छिपे हो सकते हैं.
- इसी वजह से यहां दोबारा बड़े स्तर पर सर्वे किया जाएगा.
सरकार के लिए क्यों अहम है यह मिशन
सरकार का मानना है कि अगर देश में नए तेल और गैस भंडार मिलते हैं, तो भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता कम हो सकती है. इससे भविष्य में बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक संकटों का असर भी कम किया जा सकेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक सर्वे नहीं, बल्कि भारत की Energy Security को मजबूत करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है.
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