होर्मुज में बढ़ा तनाव, फिर उबलने लगा क्रूड, ब्रेंट 85 डॉलर के करीब; शेयर बाजार पर भी दिखेगा असर!
बाजार की नजर इस समय पूरी तरह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव पर है. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ फिर से समुद्री नाकाबंदी लागू कर दी है. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट के आसपास सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं. यही इलाका दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में शामिल है.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब ग्लोबल कमोडिटी बाजार पर साफ दिखने लगा है. मंगलवार, 14 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 फीसदी की तेजी आई और ब्रेंट क्रूड एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट में करीब 10 फीसदी की जोरदार तेजी दर्ज की गई थी, जो मई 2020 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की छलांग थी. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 1.68 डॉलर यानी 2 फीसदी बढ़कर 84.98 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. इसका असर गिफ्ट निफ्टी पर भी देखने को मिल रहा है. गिफ्ट निफ्टी 189 अंक नीचे ट्रेड कर रह है.
कच्चे तेल में तेजी की सबसे बड़ी वजह क्या है?
बाजार की नजर इस समय पूरी तरह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव पर है. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ फिर से समुद्री नाकाबंदी लागू कर दी है. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट के आसपास सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं. यही इलाका दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में शामिल है.
इस तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है कि अगर इस रास्ते से तेल की सप्लाई प्रभावित होती है तो दुनियाभर में कच्चे तेल की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है.
यूएई के तेल टैंकरों पर हमला
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सोमवार को ओमान के समुद्री क्षेत्र में होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी शिपिंग रूट पर यूएई के दो तेल टैंकरों पर ईरान की क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया. इस हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए.
अमेरिका ने फिर शुरू की समुद्री नाकाबंदी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरानी जहाजों के खिलाफ फिर से समुद्री नाकाबंदी लागू कर दी है. उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा का फायदा उठाने वाले देशों से इस अभियान की लागत वसूली जाएगी.
ईरान का पलटवार
ईरान की अर्ध सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, ईरानी सेना ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों की तरफ ड्रोन भेजे और एक “दुश्मन जहाज” पर क्रूज मिसाइलें दागीं. वहीं, ईरान ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ हुआ समझौता अब संकट के दौर में पहुंच चुका है और जब तक अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता, तब तक वह भी समझौते का पालन नहीं करेगा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने के ट्रंप के प्रस्ताव का भी मजाक उड़ाया.
तेल सप्लाई पर बढ़ी चिंता
कुछ समय पहले दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बाद ईरान ने करीब 5.7 करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया था. लेकिन अब फिर से पाबंदियां कड़ी होने से बाजार की सप्लाई प्रभावित होने का डर सता रहा है. इसी बीच यूएई ने भी उत्पादन बढ़ाया है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, जून में यूएई का कच्चे तेल का उत्पादन बढ़कर 38 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो मई में 17.1 लाख बैरल प्रतिदिन था. ईरान संकट के बीच वैकल्पिक रास्तों से निर्यात बढ़ाकर यूएई ने उत्पादन में तेजी लाई है.
शेयर बाजार पर दिखेगा असर?
शेयर बाजार की नजर हमेशा कच्चे तेल की कीमतों पर रहती है. भारत अपनी जरूरत के अधिकांश कच्चे तेल का आयात करता है. ऐसे में अगर तेल लगातार महंगा होता है तो तेल कंपनियों, पेंट, केमिकल, एविएशन और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है. वहीं, महंगा कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते के घाटे पर भी दबाव बढ़ा सकता है, जिसका असर पूरे शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर देखने को मिल सकता है.