इथेनॉल पेट्रोल पर 11.90 रुपये की छूट, फिर भी E20 वालों को नहीं मिलेगा फायदा; नोटिफिकेशन में छुपा है असली प्लान
इस छूट में E22, E25, E27 और E30 जैसे मिश्रण शामिल हैं. साथ ही, इन ईंधनों पर लगने वाले स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस पर भी यह छूट लागू होगी.

गुरुवार 11 जून को वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी किया. इसमें केंद्र सरकार ने 22 से 30 फीसदी इथेनॉल वाले पेट्रोल को केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) से छूट दी है. इस छूट में E22, E25, E27 और E30 जैसे मिश्रण शामिल हैं. साथ ही, इन ईंधनों पर लगने वाले स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस पर भी यह छूट लागू होगी. लेकिन इसका फायदा क्या ग्राहकों तक पहुंचेगा और पहुंचेगा भी तो कब.
एक्साइज नियमों में बदलाव
इस नोटिफिकेशन से 2002 और 2017 में जारी एक्साइज नियमों में बदलाव किया गया है. इसके तहत, ज्यादा इथेनॉल वाले फ्यूल (ईंधन) पर भी जीरो-ड्यूटी (बिना टैक्स) की सुविधा दी गई है, जो पहले सिर्फ कम इथेनॉल वाले फ्यूल के लिए उपलब्ध थी. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत अभी पूरे देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिला रहा है. सरकार ने यह लक्ष्य अपने मूल 2030 के शेड्यूल से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया था.
क्या पेट्रोल की कीमतें कम होंगी?
एक्साइज ड्यूटी में छूट का लाभ फिलहाल फौरी तौर पर ग्राहकों को नहीं मिलेगा. 11 जून को बड़े शहरों में पेट्रोल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और इस छूट का मतलब यह नहीं है कि अभी बिक रहे पेट्रोल की कीमत पंप पर कम हो जाएगी. यह छूट E22–E30 ब्लेंड पर लागू होती है, जो अभी खुदरा दुकानों पर उपलब्ध नहीं हैं. देश भर में बिकने वाला आम पेट्रोल ज्यादातर E20 ब्लेंड होता है, जिस पर पहले की तरह ही टैक्स लगता रहेगा. इस छूट का लाभ सिर्फ E22–E30 ब्लेंड पेट्रोल पर लागू होगी.
फिलहाल पेट्रोल पर 11.90 रुपये का केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी लगता है. इसमें कई तरह के सेस भी शामिल हैं. सरकार के फैसले के बाद सभी समाप्त हो जाएंगे. लेकिन यह छूट सिर्फ E22, E25, E27 और E30 जैसे मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए होगी.
पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क का विवरण
| केंद्रीय उत्पाद शुल्क का घटक | दर |
|---|---|
| बेसिक एक्साइज ड्यूटी (Basic Excise Duty) | ₹1.40 प्रति लीटर |
| स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (Special Additional Excise Duty) | ₹3.00 प्रति लीटर |
| एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एवं डेवलपमेंट सेस (AIDC) | ₹2.50 प्रति लीटर |
| रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस | ₹5.00 प्रति लीटर |
| कुल केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी/सेस | ₹11.90 प्रति लीटर |
सप्लाई साइड पर फोकस
यह कदम सप्लाई साइड (आपूर्ति पक्ष) पर केंद्रित है. इससे रिफाइनरों और फ्यूल सप्लायरों के लिए अधिक इथेनॉल वाले मिश्रण (Blends) का उत्पादन और वितरण करना सस्ता हो जाएगा, इससे पहले कि इन्हें रिटेल में बेचा जाए. जब ये ईंधन पंपों पर पहुंचेंगे, तो क्या इनकी कीमतें कम होंगी, यह तेल मार्केटिंग कंपनियों के कीमत तय करने के फैसलों पर निर्भर करेगा. इस नोटिफिकेशन से राज्य का VAT भी नहीं बदला है, जो केंद्रीय टैक्स के अलावा पेट्रोल पर लगता है.
क्या आपकी कार E22-E30 फ्यूल पर चल सकती है?
आज सड़क पर मौजूद ज्यादातर गाड़ियों के लिए ऐसा अभी मुमकिन नहीं है, और सरकार ने इन ब्लेंड्स (मिश्रणों) के रिटेल इस्तेमाल के लिए कोई घोषणा भी नहीं की है. भारत में गाड़ियों की कम्पैटिबिलिटी (अनुकूलता) इस बात पर निर्भर करती है कि गाड़ी कब बेची गई थी. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि 1 अप्रैल 2023 से पहले बेची गई गाड़ियां E10 फ्यूल के अनुकूल हैं, जबकि उस तारीख के बाद बेची गई गाड़ियां E20-कम्पैटिबल मटीरियल से बनी हैं.
गडकरी ने कहा कि मैन्युफैक्चरर्स को गाड़ी पर एक साफ दिखने वाले स्टिकर पर यह बताना होगा कि हर मॉडल के लिए ज्यादा से ज्यादा कितना ब्लेंड इस्तेमाल किया जा सकता है. यह स्टिकर आमतौर पर फ्यूल-फिलर फ्लैप पर या उसके आस-पास लगाया जाता है.
E20 कम्पैटिबिलिटी
E20 कम्पैटिबिलिटी का मतलब यह नहीं है कि यह अपने-आप ज्यादा ब्लेंड (मिश्रण) के लिए भी काम करेगी. E20 से आगे बढ़ने के लिए इंजन ट्यूनिंग, फ्यूल डिलीवरी सिस्टम और ड्यूरेबिलिटी वैलिडेशन में बदलाव की जरूरत होती है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) से यह पता लगाने को कहा है कि E25 फ्यूल, मौजूदा E10 और E20 कम्पैटिबल कारों के इंजन की उम्र और फ्यूल एफिशिएंसी पर क्या असर डालता है.