कौन हैं नंदन नीलेकणि, जिन्हें PM मोदी ने दिया परीक्षा में सुधार लाने का जिम्मा? आधार से लेकर FASTag बनाने में रही अहम भूमिका

Who is Nandan Nilekani: यह नियुक्ति उन कई पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस पहलों की लंबी लिस्ट में एक और नाम है, जिनसे नीलेकणि पिछले कुछ वर्षों से जुड़े रहे हैं. नंदन नीलेकणि को भारत के प्रमुख टेक एंटरप्रेन्योर में से एक माना जाता है.

नंदन नीलेकणि को मिली बड़ी जिम्मेदारी. Image Credit: Money9live

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि को परीक्षा सुधारों पर सरकार की नई बनी हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का प्रमुख नियुक्त किया है. इस नियुक्ति के साथ ही, टेक्नोलॉजी के दिग्गज नीलेकणि को टेक्नोलॉजी-आधारित स्ट्रक्चरल सुधारों के जरिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े बदलाव लाने की कोशिशों की कमान सौंपी गई है.

यह नियुक्ति उन कई पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस पहलों की लंबी लिस्ट में एक और नाम है, जिनसे नीलेकणि पिछले कुछ वर्षों से जुड़े रहे हैं. इंफोसिस के चेयरमैन के तौर पर काम करने और फंडामेंटम के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश करने के साथ-साथ, उन्होंने कई बड़े टेक्नोलॉजी-बेस्ड पब्लिक प्रोजेक्ट्स में अहम भूमिका निभाई है.

इन्फोसिस के को-फाउंडर

नंदन नीलेकणि को भारत के प्रमुख टेक एंटरप्रेन्योर में से एक माना जाता है. वे देश की दिग्गज आईटी सर्विस कंपनी इन्फोसिस के को-फाउंडर रहे हैं.

आधार की रूपरेखा तैयार करने में अहम भूमिका

नीलेकणी ने यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के फाउंडिंग चेयरमैन के तौर पर काम किया, जहां उन्होंने आधार डिजिटल आइडेंटिटी प्लेटफॉर्म बनाने में लीड किया. वह भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) स्टैक के सबसे मजबूत चैंपियंस में से एक रहे हैं, जिसमें यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) शामिल हैं.

GST से लेकर FASTag तक

वे टेक्नोलॉजी एडवाइजरी ग्रुप फॉर यूनिक प्रोजेक्ट्स (TAGUP) के मेंबर थे, जिनकी सिफारिशों ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) सिस्टम सहित बड़े सरकारी टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के आर्किटेक्चर पर असर डाला. नीलेकणी FASTag, जो इंटरऑपरेबल इलेक्ट्रॉनिक टोल पेमेंट सिस्टम है, के रोलआउट से भी जुड़े रहे हैं.

2019 में उन्होंने डिजिटल पेमेंट को मजबूत करने पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की हाई-लेवल कमेटी की अध्यक्षता की, जिसने पूरे देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ाने के उपायों की सिफारिश की.

सुप्रीम कोर्ट की AI कमेटी के एक्सपर्ट

हाल ही में उन्हें 2025 में सुप्रीम कोर्ट की AI कमेटी में एक एक्सटर्नल एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया गया था, ताकि ज्यूडिशियरी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनाने में गाइड करने में मदद मिल सके. उसी साल उन्हें इंडिया एनर्जी स्टैक टास्क फोर्स का चीफ मेंटर भी बनाया गया, जो पावर सेक्टर के लिए एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही है.

नई जिम्मेदारी

उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय में आई है जब सरकार देश के एग्जामिनेशन सिस्टम में टेक्नोलॉजी पर आधारित सुधारों की शुरुआत कर रही है. नीलेकणी की अगुवाई वाली मल्टीडिसिप्लिनरी टास्क फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में स्ट्रक्चरल बदलावों पर फोकस करेगी, जिसमें टेक्नोलॉजी का फायदा उठाने पर खास जोर दिया जाएगा.

शुरुआती करियर

साल 1955 में बेंगलुरु में जन्मे नीलेकणि ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. उन्होंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स से की, जहां उनकी मुलाकात पहली बार एन.आर. नारायण मूर्ति से हुई.

1981 में नीलेकणि ने मूर्ति और पांच अन्य लोगों के साथ मिलकर इन्फोसिस की स्थापना की थी. यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी IT सर्विस फर्मों में से एक बन गई और दुनिया भर में इसकी मजबूत मौजूदगी है. कंपनी के को-चेयरमैन बनने से पहले उन्होंने 2002 से 2007 तक इसके चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के तौर पर काम किया.

इन्फोसिस से हुए थे अलग

2009 में तत्कालीन यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) सरकार द्वारा UIDAI का संस्थापक चेयरमैन नियुक्त किए जाने के बाद उन्होंने इन्फोसिस से किनारा कर लिया.

कई सरकारी प्रोजेक्ट्स का रहे हैं हिस्सा

अपने कार्यकाल के दौरान, नीलेकणि ने आधार को लागू करने का काम संभाला. यह भारत का डिजिटल पहचान प्रोग्राम है, जिसे हर निवासी को एक यूनिक बायोमेट्रिक पहचान नंबर देने के लिए बनाया गया था. तब से आधार देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा बन गया है, जो कल्याणकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं, टैक्स, डिजिटल पेमेंट और पहचान के वेरिफिकेशन में मदद करता है.

भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने में उनके योगदान को भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहा गया है. नीलेकणि 2017 में नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर इन्फोसिस लौट आए थे.

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