महंगे हो सकते हैं बर्तन और कुकवेयर, स्टील की वैश्विक कीमतें बढ़ीं; घरेलू बजट पर पड़ सकता है अतिरिक्त बोझ
जून में किचन के बर्तन और कुकवेयर महंगे हो गए, क्योंकि मेटल की ग्लोबल कीमतों में बढ़ोतरी और स्टेनलेस स्टील के प्रोडक्शन की अधिक लागत ने रिटेल कीमतों को बढ़ा दिया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, केवल स्टील के बर्तन ही नहीं, बल्कि अन्य रसोई प्रोडक्ट्स की कीमतें भी बढ़ी हैं.
महंगाई की मार आम लोगों पर बढ़ती जा रही है. जून के महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई, जो 18 महीने का हाई लेवल है. खाने-पीने की चीजों की बढ़ी हुई कीमतों ने महंगाई की आंच को तेज की है. वहीं, दूसरी तरफ महंगाई की आंच खाना बनाने वाले सामानों पर भी पड़ रही है. जून में किचन के बर्तन और कुकवेयर महंगे हो गए, क्योंकि मेटल की ग्लोबल कीमतों में बढ़ोतरी और स्टेनलेस स्टील के प्रोडक्शन की अधिक लागत ने रिटेल कीमतों को बढ़ा दिया. उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों तक ये कीमतें ऊंची बनी रहेंगी.
स्टेनलेस स्टील के बर्तनों की महंगाई दर
ईटी ने ताजा सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया कि स्टेनलेस स्टील के बर्तनों की महंगाई दर जून में बढ़कर 7.1 फीसदी हो गई, जो मई में 6.4 फीसदी और जनवरी में 4.5 फीसदी थी. पिछले महीने प्रेशर कुकर और प्रेशर पैन की कीमतें 4.7 फीसदी बढ़ीं, जबकि नॉन-स्टिक कुकवेयर समेत मेटल्स के दूसरे बर्तनों की महंगाई दर एक साल पहले के 4.2% से बढ़कर 4.8% हो गई. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में किचन से जुड़े उत्पादों की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है.
बर्तन उद्योग पर पड़ रहा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि स्टील और अन्य धातुओं की बढ़ती लागत का सीधा असर बर्तन उद्योग पर पड़ रहा है. उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियां कीमतों में इजाफा कर रही हैं, जिसका बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं को उठाना पड़ सकता है.
नॉन-स्टिक कुकवेयर की महंगाई
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, केवल स्टील के बर्तन ही नहीं, बल्कि अन्य रसोई प्रोडक्ट्स की कीमतें भी बढ़ी हैं. कैसरोल और थर्मोवेयर की महंगाई 2.7 फीसदी से बढ़कर 3.0 फीसदी, अन्य मेटल के बर्तनों की 4.2 फीसदी से 4.8 फीसदी, अन्य क्रॉकरी एवं बर्तनों की 3.4% से 3.8%, जबकि प्रेशर कुकर और नॉन-स्टिक कुकवेयर की महंगाई 4.2% से बढ़कर 4.7% हो गई है.
विभिन्न उत्पादों में महंगाई (YoY, %)
| उत्पाद | मई 2026 | जून 2026 |
|---|---|---|
| स्टेनलेस स्टील के बर्तन | 6.4% | 7.1% |
| कैसरोल, थर्मोवेयर | 2.7% | 3.0% |
| अन्य मेटल के बर्तन | 4.2% | 4.8% |
| अन्य क्रॉकरी एवं बर्तन | 3.4% | 3.8% |
| प्रेशर कुकर एवं नॉन-स्टिक कुकवेयर | 4.2% | 4.7% |
एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टील और अन्य कच्चे माल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में रसोई के बर्तनों की खुदरा कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. ऐसे में नए बर्तन खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है.
घरेलू बजट पर पड़ सकता है अतिरिक्त बोझ
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़े बताते हैं कि किचन उत्पादों की महंगाई का दबाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है. अगर उत्पादन लागत में कमी नहीं आती, तो बर्तन उद्योग की कंपनियां आगे भी कीमतों में बदलाव कर सकती हैं, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है.
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