RBI के लक्ष्य से ऊपर पहुंची महंगाई, जून में तोड़ा 17 महीने का रिकॉर्ड, जानें आम लोगों पर क्या होगा असर?
कुछ सप्ताह पहले RBI ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रखा था. साथ ही उसने अपनी नीति का रुख न्यूट्रल रखा, ताकि एक तरफ महंगाई पर नजर रखी जा सके और दूसरी तरफ आर्थिक विकास को भी सहारा मिलता रहे.
जून महीने में देश में महंगाई बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है. यह पिछले 17 महीनों में पहली बार है जब खुदरा महंगाई (Retail Inflation) भारतीय रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर आ गई है. पिछले महीने यानी मई 2026 में यह 3.93 फीसदी थी. महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी रही. इसके अलावा वेस्ट एशिया में जारी तनाव और मानसून के असमान रहने की आशंका ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है. इस साल सरकार ने महंगाई मापने के लिए नया आधार वर्ष और उपभोक्ताओं की नई खरीदारी की आदतों के अनुसार CPI में बदलाव किया है. नए सिस्टम के तहत जून का यह अब तक का सबसे ऊंचा महंगाई का आंकड़ा है.
RBI का लक्ष्य क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4 फीसदी के आसपास रखना है. हालांकि, जरूरत पड़ने पर इसे 2 फीसदी से 6 फीसदी के बीच रहने की अनुमति है. यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी.
ब्याज दरों पर क्या असर पड़ सकता है?
कुछ सप्ताह पहले RBI ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रखा था. साथ ही उसने अपनी नीति का रुख न्यूट्रल रखा, ताकि एक तरफ महंगाई पर नजर रखी जा सके और दूसरी तरफ आर्थिक विकास को भी सहारा मिलता रहे.
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान भी 4.6 फीसदी से बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें, महंगा ईंधन और जियो-पॉलिटिकल टेंशन आने वाले समय में भी महंगाई बढ़ा सकते हैं.
आम लोगों पर क्या होगा असर?
अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है, तो रोजमर्रा की जरूरत की चीजें जैसे सब्जियां, फल, अनाज, दूध, गैस और पेट्रोल-डीजल महंगे बने रह सकते हैं. इससे घर का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है.
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है. इससे रुपये की कमजोरी और विदेशों से आने वाले सामान की कीमतें बढ़ने का खतरा भी रहेगा. इसको देखते हुए अगर RBI रेपो रेट मे बदलाव करता है तो सीधा इसका असर EMI पर देखने को मिलेगा. इसके अलावा, अगर मानसून सामान्य नहीं रहा, तो खाद्य वस्तुओं की महंगाई और बढ़ सकती है. फिलहाल सरकार की ओर से जारी जून महीने के ये आंकड़े प्रोविजनल हैं. जरूरत पड़ने पर इनमें बाद में संशोधन किया जा सकता है.
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