EaseMyTrip की कहां लुढ़क गई ट्रिप, जानें क्यों मची है उथल-पुथल, शेयर भी गिरा

EaseMyTrip, जो कभी निवेशकों की पसंदीदा कंपनी थी, अब सवालों के घेरे में है. प्रबंधन संकट, CEO का इस्तीफा और इलेक्ट्रिक बस मैन्युफैक्चरिंग में कदम ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है. कंपनी की रणनीति अब अस्थिर दिख रही है.

EaseMyTrip की कहां लुढ़क गई ट्रिप Image Credit: Money9 Live

बात ज्यादा पुरानी नहीं जब होटल और टिकट बुकिंग के लिए लोग EaseMyTrip को वरीयता देते थे. निवेशकों ने भी इसे ऑनलाइन ट्रैवल इंडस्ट्री का चमकता सितारा माना था. मार्च 2021 में स्टॉक मार्केट डेब्यू के बाद इस कंपनी ने शानदार मुनाफे और बेहतरीन वित्तीय प्रदर्शन से हर किसी को प्रभावित किया. 30 फीसदी से अधिक ऑपरेटिंग मार्जिन, 50 फीसदी से ऊपर की रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) और FY20 से FY23 के बीच 4 गुना मुनाफे की बढ़त. 2022 तक, इसका शेयर 5 गुना बढ़कर 6 रुपये से 34 रुपये हो गया. लेकिन कंपनी अपने चमक को ज्यादा दिन तक बरकरार नहीं रख सकी. बाजार में बढ़ते कंपटीशन, प्रबंधन संकट और असामान्य व्यावसायिक फैसलों के चलते कंपनी आज सवालों के घेरे में है.

बढ़ता नाम लेकिन कमजोर होता मार्जिन

EaseMyTrip ने कम लागत और ऑपरेटिंग कुशलता से बाजार में अपने कंपटीटर को पछाड़ दिया था. लेकिन 2024 में कंपनी की स्ट्रैटजी MakeMyTrip, Yatra और Cleartrip जैसे बड़े खिलाड़ियों के सामने धूल खा गई. इन बड़े दावेदारों ने अपनी मार्केटिंग और कस्टमर एक्विजिशन पर जोर दिया, जिससे पूरा सेक्टर दबाव में आ गया. वैल्यू रिसर्च के रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन 56% (FY22) से गिरकर 30% (सितंबर 2024) तक आ गए. ROCE भी इसी तरह नीचे आया.

कंपनी के फैसलों से निवेशक परेशान

सितंबर 2024 में कंपनी ने बेहतर बनने के लिए नया दांव खेला. उसने इलेक्ट्रिक बस मैन्युफैक्चरिंग में कदम रखने का ऐलान किया. मेक माय ट्रिप ने इस प्रोजेक्ट के लिए 200 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना तो बनाई, लेकिन यह फैसला किसी के समझ में नहीं आया क्योंकि यह कदम कंपनी के एसेट-लाइट मॉडल के बिल्कुल विपरीत था. प्रबंधन ने इस फैसले का स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई.

परेशान निवेशकों का भरोसा तो तब और डगमगा गया जब कंपनी के शीर्ष नेतृत्व ने अपने पद को अलविदा कह दिया. जनवरी 2025 में कंपनी के सीईओ निशांत पिट्टी ने पद छोड़ दिया. इस फैसले से एक दिन पहले उन्होंने कंपनी में अपनी 1.4 फीसदी की हिस्सेदारी बेच दी थी, उससे भी पहले सितंबर 2024 में उन्होंने 14 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी. कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी अब 50 फीसदी से भी कम हो गई है.

वहीं अगर रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी की बात करें तो यह दिसंबर 2024 में 26 फीसदी से बढ़कर 38 फीसदी हो गई. लेकिन संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 5 फीसदी पर ही स्थिर रही. यह अंतर दिखाता है कि बड़े निवेशक कंपनी की स्थिति को लेकर सतर्क हैं.

यह भी पढ़ें: कोटक महिंद्रा बैंक पर RBI के पाबंदियों के बीच CTO का इस्तीफा, COO ने भी कहा अलविदा

बदलते ट्रेंड में कंपनी कहां?

महामारी के बाद के ट्रैवल ट्रेंड्स, डायरेक्ट बुकिंग का बढ़ता क्रेज और ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताएं कंपनी के लिए और मुश्किलें पैदा कर रही हैं. जहां दूसरी कंपनियां कस्टमर लॉयल्टी प्रोग्राम और पैकेज ट्रैवल सॉल्यूशन पर फोकस कर रही हैं, वहीं ईज माय ट्रिप का इलेक्ट्रिक बस प्रोजेक्ट इन ट्रेंड्स से हटकर है.

कंपनी के शेयर पर नजर डालें तो शुक्रवार यानी 03 जनवरी को इसके शेयर 1.17 फीसदी के उछाल के साथ 15.51 रुपये पर बंद हुए. बीते एक साल में कंपनी के शेयर ने निवेशकों के लगभग 25 फीसदी रकम डुबोई है. वहीं एक महीने में कंपनी के स्टॉक 6.18 फीसदी टूटे. कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप 5500 करोड़ रुपये है.

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