2020 की सख्ती में ढील! अब 10% तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां कर सकेंगी भारत में निवेश, जानिए पूरा नियम

भारत सरकार ने एफडीआई नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए 10% तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को ऑटोमैटिक रूट से निवेश की अनुमति दी है. हालांकि, चीन या सीमावर्ती देशों में रजिस्टर्ड कंपनियों पर सख्ती बरकरार रहेगी.

एफडीआई में ढील Image Credit: Money9live

भारत सरकार ने विदेशी निवेश नीति में एक अहम बदलाव करते हुए उन विदेशी कंपनियों को राहत दी है, जिनमें चीनी या हांगकांग हिस्सेदारी सीमित है. लंबे समय से सख्त नियमों के कारण ऐसे निवेश पर रोक जैसी स्थिति बनी हुई थी, लेकिन अब सरकार ने इसे आंशिक रूप से आसान कर दिया है. इस फैसले को निवेश माहौल सुधारने और वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने की दिशा में एक संतुलित कदम माना जा रहा है.

क्या बदला है नया नियम

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, अब ऐसी विदेशी कंपनियां जिनमें चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, वे भारत में ऑटोमैटिक रूट के तहत निवेश कर सकेंगी. यह छूट केवल उन सेक्टर्स में मिलेगी, जहां पहले से ही ऑटोमैटिक रूट के जरिए एफडीआई की अनुमति है और संबंधित सेक्टर की शर्तें लागू रहेंगी.

सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह राहत सीधे तौर पर चीन, हांगकांग या भारत से जमीन सीमा साझा करने वाले देशों में रजिस्टर्ड कंपनियों पर लागू नहीं होगी. यानी अगर कोई कंपनी इन देशों में पंजीकृत है, तो उसे अब भी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी लेनी होगी.

पहले क्या था नियम

कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में लागू प्रेस नोट 3 के तहत नियम काफी सख्त कर दिए गए थे. उस समय अगर किसी विदेशी कंपनी में चीन या अन्य सीमावर्ती देशों की मामूली हिस्सेदारी भी होती थी, तो उसे भारत में निवेश के लिए अनिवार्य सरकारी अनुमति लेनी पड़ती थी. इसका मकसद भारतीय कंपनियों को सस्ते में अधिग्रहण से बचाना था.

‘बेनिफिशियल ओनर’ पर फोकस

अब सरकार ने नियमों को संशोधित करते हुए फोकस ‘बेनिफिशियल ओनर’ यानी वास्तविक मालिक पर रखा है. नए नियम के मुताबिक, अगर किसी कंपनी में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी या नियंत्रण है, तभी उसे प्रभावी स्वामित्व माना जाएगा. इसकी परिभाषा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत तय की गई है.

यह भी पढ़ें: FIFA वर्ल्ड कप 2026 और चिलचिलाती गर्मी से बढ़ेगा इस बेवरेज स्टॉक का पारा, शेयरों में 20% उछाल का दावा, 14 देशों में साम्राज्य

चीन का निवेश अभी भी सीमित

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में कुल एफडीआई में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत (करीब 2.51 अरब डॉलर) रही है. ऐसे में यह बदलाव सीमित प्रभाव के साथ निवेश बढ़ाने की संभावनाएं खोल सकता है.

हालांकि नियमों में ढील दी गई है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे निवेशों पर रिजर्व बैंक के जरिए रिपोर्टिंग और निगरानी जारी रहेगी. साथ ही, मल्टीनेशनल कंपनियों को किसी एक देश से जोड़कर नहीं देखा जाएगा.