₹25000 करोड़ का झटका… एक नियम ने हिला दी ऑटो इंडस्ट्री, कंपनियों की कमाई पर बड़ा वार; जानें पूरा मामला

सरकार के पर्यावरण से जुड़े नए नियम लागू होने के बाद कंपनियों को पुराने वाहनों के लिए भी खर्च का हिसाब रखना पड़ेगा. यह नियम देखने में छोटा लग सकता है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा है. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, साल 2025-26 में ऑटो कंपनियों के मुनाफे पर करीब 25,000 करोड़ रुपये का झटका लग सकता है.

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Auto Industry: भारत की ऑटो इंडस्ट्री अब एक नए नियम की वजह से दबाव में आ गई है. सरकार के पर्यावरण से जुड़े नए नियम लागू होने के बाद कंपनियों को पुराने वाहनों के लिए भी खर्च का हिसाब रखना पड़ेगा. यह नियम देखने में छोटा लग सकता है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा है. कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा और उनकी कमाई में भारी गिरावट आ सकती है.

इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, साल 2025-26 में ऑटो कंपनियों के मुनाफे पर करीब 25,000 करोड़ रुपये का झटका लग सकता है. इससे न केवल कंपनियों की बैलेंस शीट प्रभावित होगी, बल्कि भविष्य में नई तकनीक और निवेश योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है. आइए विस्तार से समझते हैं कि पूरा मामला क्या है.

नया नियम क्या है और क्यों मचा हड़कंप

सरकार ने जनवरी 2025 में End-of-Life Vehicles Rules लागू किए थे. इस नियम के तहत कंपनियों को उन गाड़ियों की जिम्मेदारी भी उठानी होगी जो पहले ही बाजार में बिक चुकी हैं. खासतौर पर नियम 4(6) ने कंपनियों को परेशान कर दिया है.
इस नियम के अनुसार, अगर कोई कंपनी अपना काम बंद भी कर देती है, तब भी उसे पहले बेची गई गाड़ियों के लिए पर्यावरण से जुड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी. यानी कंपनी को पुराने वाहनों के निपटान का खर्च उठाना पड़ेगा.

कंपनियों पर क्यों बढ़ गया खर्च

इस नियम की वजह से एक अकाउंटिंग नियम लागू हो गया है, जिसे IND AS 37 कहा जाता है. इसके तहत कंपनियों को पहले से ही भविष्य के खर्च के लिए पैसा अलग रखना होगा. इसका मतलब यह है कि ऑटो कंपनियों को पिछले कई सालों में बेची गई गाड़ियों के लिए भी पैसा अलग रखना पड़ेगा. निजी गाड़ियों के लिए 20 साल और कमर्शियल गाड़ियों के लिए 15 साल तक का हिसाब जोड़ना होगा. इससे कंपनियों के पास कैश कम हो जाएगा और उनका मुनाफा घटेगा.

कितना होगा नुकसान

  • इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, इस नियम से कुल मिलाकर करीब 25,000 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा.
  • चार पहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों पर करीब 14,623 करोड़ रुपये का असर होगा.
  • वहीं दो और तीन पहिया वाहन कंपनियों पर करीब 9,650 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा.
  • अगर डिस्काउंट के आधार पर देखें, तो भी यह असर करीब 9,000 करोड़ रुपये तक रहेगा.

सरकार से राहत की मांग

BS के हवाले से ऑटो इंडस्ट्री की संस्था Society of Indian Automobile Industry (SIAM) ने इस मामले को सरकार के सामने उठाया था. उन्होंने कहा कि इस नियम में बदलाव किया जाए ताकि कंपनियों को एक साथ इतना बड़ा पैसा अलग न रखना पड़े. लेकिन मार्च 2026 में सरकार ने नियम में बदलाव किया, फिर भी इस खास क्लॉज को नहीं बदला गया.

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