सोना हुआ महंगा तो बिना बिल खरीदारी का ट्रेंड तेज, 10 ग्राम पर 10 हजार रुपये तक बचत; जानें पूरा मामला

सोने की कीमतों में तेजी और बढ़े टैक्स के बीच बिना बिल सोना खरीदने का चलन बढ़ रहा है. इनफॉर्मल मार्केट में ग्राहकों को बाजार भाव के मुकाबले अच्छी छूट मिल रही है. कुछ रिटेल ग्राहकों को 10 ग्राम पर 5,000 से 10,000 रुपये तक की बचत मिल रही है. वहीं, थोक खरीदारों को करीब 6 फीसदी तक सस्ता सोना मिलने की बात सामने आई है.

महंगे सोने और बढ़े टैक्स के बीच बिना बिल खरीदारी का ट्रेंड तेज. Image Credit: money9live

सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच इसकी खरीदारी का तरीका भी बदलता दिख रहा है. महंगे सोने और टैक्स के चलते कुछ ग्राहक बिना बिल के सोना खरीदने की ओर जा रहे हैं. ऐसे सौदों में ग्राहकों को बाजार भाव के मुकाबले छूट मिल रही है. कुछ ग्राहकों को 10 ग्राम सोने पर 5000 से 10000 रुपये तक की बचत मिल रही है. खासकर शादी और त्योहारों का सीजन करीब आने के साथ बाजार में ऐसी खरीदारी बढ़ रही है.

महंगे सोने के बीच बिना बिल खरीदारी क्यों बढ़ी?

सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंचने के साथ ग्राहकों के लिए खरीदारी महंगी हो गई है. इसके अलावा सोने पर इंपोर्ट लेवी बढ़ने और रिटेल ग्राहकों पर 3 फीसदी GST लगने से आधिकारिक चैनल से खरीदारी की लागत बढ़ी है. ऐसे में कुछ ग्राहक बिना बिल वाले सौदों में मिलने वाली छूट की ओर आकर्षित हो रहे हैं. बिना बिल के कैश खरीदारी में ग्राहकों को बाजार कीमत के मुकाबले अच्छा डिस्काउंट मिल सकता है.

10 ग्राम पर 10 हजार रुपये तक बचत

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ रिटेल ग्राहकों को सोने की खरीद पर 10 ग्राम में 10000 रुपये तक की छूट मिल रही है. हालांकि, यह छूट सभी ग्राहकों को एक जैसी नहीं मिल रही है. यह ग्राहक की मोलभाव करने की क्षमता और ज्वेलर के साथ उसके संबंध पर भी निर्भर करती है.

थोक खरीदारों को 6 फीसदी तक का फायदा

रिपोर्ट में कारोबार से जुड़े लोगों के हवाले से बताया गया है कि थोक खरीदारों को बिना बिल के नकद सौदों में बाजार भाव के मुकाबले करीब 6 फीसदी तक की बचत मिल सकती है. इसकी वजह यह है कि नकद सौदे करने वाले डीलर टैक्स की लागत से बच सकते हैं और उसका कुछ हिस्सा ग्राहक को डिस्काउंट के तौर पर दे सकते हैं. इनफॉर्मल मार्केट में कीमतें किसी एक तय बेंचमार्क के बजाय बातचीत के आधार पर तय होती हैं.

इंपोर्ट लेवी बढ़ने से बढ़ा इनफॉर्मल बिजनेस

सोने और चांदी पर इंपोर्ट लेवी को बढ़ाकर 15 फीसदी किए जाने के बाद आधिकारिक और इनफॉर्मल मार्केट की कीमतों में अंतर बढ़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में आधिकारिक चैनल से आयात किए गए सोने की कीमत पर औसत डिस्काउंट करीब 50 डॉलर प्रति औंस था, जबकि नकद बाजार में कुछ कारोबारियों को घरेलू कीमत के मुकाबले 200 डॉलर प्रति औंस तक की छूट मिल रही थी.

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त्योहारों के सीजन से मांग बढ़ने की उम्मीद

भारत में सोने की मांग का एक बड़ा हिस्सा शादी, त्योहार, जन्म और दूसरे पारिवारिक मौकों से जुड़ा है. अक्टूबर के मध्य से शादी और त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है, जो मार्च की शुरुआत तक चल सकता है. ऐसे में ऊंची कीमतों के बीच ग्राहक कम कीमत पर सोना खरीदने के विकल्प तलाश रहे हैं. इसी वजह से इनफॉर्मल मार्केट में एक्टिविटी बढ़ती दिख रही हैं.

ग्राहक के लिए कीमत और बिल दोनों अहम

महंगे सोने के दौर में बिना बिल खरीदारी से तत्काल कीमत कम मिल सकती है, लेकिन ऐसे सौदे में खरीद का आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिलता. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसी वजह से कुछ ग्राहक डिस्काउंट के बावजूद बिना बिल के सौदे कर रहे हैं. सोने की कीमत में 5000 या 10000 रुपये की बचत आकर्षक लग सकती है, लेकिन खरीदारी करते समय ग्राहक को कीमत के साथ बिल और सौदे के रिकॉर्ड को भी ध्यान में रखना चाहिए.