Gold Price: सोना 12000 रुपये महंगा हुआ, चांदी के भाव में भी इजाफा; जानें- अब कितना है 10 ग्राम गोल्ड का भाव
Gold Price Today: जुलाई में US में कंज्यूमर प्राइस ग्रोथ जून के 3.5% से थोड़ी घटकर 3.4% हो गई, जो निवेशकों के अनुमान के मुताबिक है. इससे फेडरल रिजर्व के लिए मॉनेटरी पॉलिसी में ढील देने की गुंजाइश कम हो गई है. कीमती धातुओं के कारोबारियों के लिए महंगाई की स्थिति अभी भी नाजुक संतुलन में है.

Gold Price Today: सोने की कीमतों में लगातार सातवें दिन बढ़ोतरी हुई. बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में इसकी कीमत 2,600 रुपये बढ़कर 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई. इसकी वजह ग्लोबल स्तर पर मजबूत मांग और निवेश में तेजी रही. ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत मंगलवार के 1,57,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से 2,600 रुपये बढ़कर 1,59,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई.
8 फीसदी से अधिक बढ़ी कीमत
इस ताजा तेजी के साथ सोने की कीमतें 3 अगस्त के 1,47,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से 12,400 रुपये या 8.4 फीसदी बढ़ गई हैं. चांदी की कीमतों में भी तेजी आई है. यह पिछले सेशन के 2,42,000 रुपये प्रति किलोग्राम से 4,000 रुपये बढ़कर 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई.
क्यों बढ़ी सोने की कीमतें?
लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि घरेलू बाजार में सोने की कीमतें इसलिए बढ़ीं, क्योंकि निवेशकों ने अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से पहले सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना खरीदना शुरू कर दिया. साथ ही, पश्चिम एशिया में लगातार भू-राजनीतिक तनाव ने भी कीमती धातुओं की मांग को बढ़ावा दिया.
HDFC सिक्योरिटीज के कमोडिटीज सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और डॉलर में स्थिरता ने भी कीमती मेटल्स को सहारा दिया.
ग्लोबल मार्केट में भाव
ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 44.48 डॉलर या 1.02 फीसदी बढ़कर 4,412.63 डॉलर प्रति औंस हो गया, जबकि चांदी 2.37 फीसदी बढ़कर 66.23 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी.
एनालिस्ट्स का कहना है कि सोने की तेजी को तब और बढ़ावा मिला जब अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक आए. इसके बाद इंटरनेशनल बाजार में कीमतें 1 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 4,411 डॉलर प्रति औंस से ऊपर ट्रेड करने लगीं.
जुलाई में US में कंज्यूमर प्राइस ग्रोथ जून के 3.5% से थोड़ी घटकर 3.4% हो गई, जो निवेशकों के अनुमान के मुताबिक है. इससे फेडरल रिजर्व के लिए मॉनेटरी पॉलिसी में ढील देने की गुंजाइश कम हो गई है.
एनर्जी की कीमतों का असर
कीमती धातुओं के कारोबारियों के लिए महंगाई की स्थिति अभी भी नाजुक संतुलन में है. एनालिस्ट्स का कहना है कि एनर्जी की ऊंची कीमतें ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकती हैं, जिससे सोने जैसी एसेट्स की लागत बढ़ सकती है.
ETF में सुधार
मिराए एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि सोने को एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) होल्डिंग्स में सुधार से भी सपोर्ट मिल रहा है. ये होल्डिंग्स बढ़कर 97.24 मिलियन औंस (Moz) हो गई हैं, जो 24 जून के बाद सबसे ज्यादा हैं और 96.16 Moz के निचले स्तर से 1 मिलियन औंस से भी ज्यादा हैं.
कच्चे तेल की कीमतें
इस बीच कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहीं क्योंकि US-ईरान डील अभी भी नहीं हो पाई है, हालांकि क्षेत्रीय मध्यस्थों का कहना है कि दोनों पक्ष समझौते के करीब हैं. हालांकि, चांदी की अपील मौजूदा जियो-पॉलिटिकल हालात से कहीं आगे तक जाती है.
आउटलुक की बात करें तो सिटी रिसर्च ने चांदी की कीमतों के अपने अनुमान को बरकरार रखा है. उम्मीद है कि अगले छह से 12 महीनों में इसकी कीमत 90 डॉलर प्रति औंस तक बढ़ सकती है.
चांदी का आउटलुक
सिटी ने कहा कि चांदी की कीमतों में निवेश का प्रवाह मुख्य कारक बना रहेगा, भले ही सोलर डिमांड में ‘थ्रिफ्टिंग’ (कम सामग्री का इस्तेमाल) और बैक-कॉन्टैक्ट टेक्नोलॉजी को अपनाने के कारण स्ट्रक्चरल सुस्ती देखी जा रही है.
सिटी रिसर्च को उम्मीद है कि चांदी सोने की चाल को फॉलो करेगी, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होगा. अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति जल्दी सुलझ जाती है, तो यह ऊपर की ओर बढ़ने वाला एक आकर्षक दांव हो सकता है.
भारत में मजबूत मांग
भारत से भी सपोर्ट मिल रहा है, जहां मजबूत मांग के कारण घरेलू प्रीमियम लगभग 7% है. त्योहारी और शादी के सीजन के दौरान चौथी तिमाही में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है.
ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म को उम्मीद है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G और इलेक्ट्रिक वाहनों की मजबूत मांग के कारण 2027 तक ग्लोबल सिल्वर मार्केट में कमी (डेफिसिट) बनी रहेगी.