चांदी में ₹3800 की जोरदार उछाल, सोना भी हुआ महंगा; जानें कहां पहुंची गोल्ड-सिल्वर की कीमतें
पश्चिम एशिया में नाजुक हालात और कमजोर डॉलर के बीच सर्राफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में तेजी लौटी है. चांदी में जोरदार उछाल आया है, जबकि सोना भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है. एक्सपर्ट्स इसे अनिश्चित वैश्विक माहौल से जोड़ रहे हैं.

Gold-Silver Price on 10 April: शुक्रवार, 10 अप्रैल को सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली. खासकर चांदी ने जोरदार वापसी करते हुए निवेशकों का ध्यान खींचा, जबकि सोना भी हल्की बढ़त के साथ ऊपर बंद हुआ. बाजार के जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच बनी नाजुक शांति और डॉलर की कमजोरी ने कीमती धातुओं को सहारा दिया है.
कहां पहुंचे सोने-चांदी के भाव?
राजधानी दिल्ली में चांदी की कीमत में बड़ी छलांग लगी. चांदी करीब 3,800 रुपये बढ़कर 2,47,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई. इससे एक दिन पहले इसमें गिरावट आई थी, लेकिन शुक्रवार को इसने मजबूत रिकवरी दर्ज की. वहीं, सोना भी पीछे नहीं रहा. 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 400 रुपये की बढ़त के साथ 1,55,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. अगर पूरे हफ्ते की बात करें तो कीमती धातुओं के लिए यह काफी मजबूत रहा है. चांदी ने सप्ताह भर में लगभग 10,000 रुपये यानी करीब 4 फीसदी से ज्यादा की तेजी दिखाई, जबकि सोना भी करीब 3,800 रुपये तक चढ़ चुका है.
उछाल पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण काम कर रहे हैं. पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के संकेत तो मिले हैं, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं है. इसी “अनिश्चित शांति” के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सोने-चांदी की मांग बनी हुई है. इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी भी एक अहम फैक्टर है. आमतौर पर जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोने-चांदी जैसी धातुएं निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाती हैं, जिससे उनकी कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है.
इंटरनेशनल मार्केट की स्थिति?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसका असर साफ नजर आया. सोने की कीमत 4,700 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बनी रही, जबकि चांदी भी करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार करती दिखी. विश्लेषकों के मुताबिक, अगर जियो पॉलिटिकल हालात स्थिर रहते हैं तो कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
खत्म नहीं हुआ रिस्क!
जोखिम अभी टला नहीं है. इजरायल और लेबनान के बीच तनाव बरकरार है और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत अभी शुरुआती दौर में है. ऐसे में अगर हालात बिगड़ते हैं, तो सोने-चांदी में और तेज उछाल आ सकता है. वहीं, अगर स्थायी शांति का रास्ता निकलता है, तो कीमतों में संतुलन भी आ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्तर बाजार के लिए “निर्णायक मोड़” जैसा है. आने वाले दिनों में यह तय होगा कि सोना-चांदी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ेंगे या फिर कीमतों में कुछ ठहराव देखने को मिलेगा.
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