तेल कंपनियां कह रहीं घाटा, लेकिन Q4 रिजल्ट में बंपर मुनाफा बता रहा दूसरी कहानी; आखिर क्या है सच?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. पिछले 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹7.50 प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं. लगातार बढ़ती कीमतों से आम आदमी का मासिक बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. कंपनियों का दावा है कि हर दिन उन्हें करीब ₹600 करोड़ का घाटा हो रहा है. लेकिन दूसरी तरफ तेल कंपनियों के ताजा तिमाही नतीजे कुछ अलग कहानी दिखा रहे हैं.
oil Companies Profit: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के बाजारों में हलचल मचा दी है. इसका सबसे ज्यादा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. पिछले 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹7.50 प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं. लगातार बढ़ती कीमतों से आम आदमी का मासिक बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
सरकार और तेल कंपनियां लगातार यह कह रही हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और वेस्ट एशिया संकट के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है. कंपनियों का दावा है कि हर दिन उन्हें करीब ₹600 करोड़ का घाटा हो रहा है. लेकिन दूसरी तरफ तेल कंपनियों के ताजा तिमाही नतीजे कुछ अलग कहानी दिखा रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले साल के मुकाबले कहीं ज्यादा मुनाफा कमाया है.
तेल कंपनियों के मुनाफे में बड़ा उछाल
देश की तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियां Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum पेट्रोल पंप नेटवर्क का बड़ा हिस्सा संभालती हैं. रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों ने जनवरी से मार्च 2026 तिमाही में शानदार मुनाफा कमाया है.
Indian Oil Corporation का मुनाफा करीब 78 प्रतिशत बढ़ा. वहीं Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum ने भी पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा कमाई दर्ज की. पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो इन कंपनियों का कुल मुनाफा 94 प्रतिशत से लेकर 212 प्रतिशत तक बढ़ा है.
Q4 रिजल्ट के आंकड़ें कुछ और ही कर रहें बयां
| कंपनी | 2025-26 मुनाफा (₹ करोड़) | 2024-25 मुनाफा (₹ करोड़) | अंतर (₹ करोड़) | ग्रोथ |
|---|---|---|---|---|
| IOC (इंडियन ऑयल) | 14,458.08 | 8,123.64 | 6,334 | +77.98% |
| BPCL (भारत पेट्रोलियम) | 5,624.54 | 4,391.83 | 1,233 | +28.07% |
| HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम) | 6,065.26 | 3,415.44 | 2,650 | +77.58% |
पूरे साल का मुनाफा
| कंपनी | 2025-26 मुनाफा (₹ करोड़) | 2024-25 मुनाफा (₹ करोड़) | अंतर (₹ करोड़) | ग्रोथ |
|---|---|---|---|---|
| IOC | 42,096.26 | 13,507.00 | 28,589 | +212% |
| BPCL | 25,843.45 | 13,336.55 | 12,507 | +93.8% |
| HPCL | 18,046.89 | 6,735.70 | 11,311 | +168% |
दावां और रिज्लट में क्यों इतना अंतर
सरकार और तेल कंपनियां एक तरफ लगातार यह दावा कर रही हैं कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वेस्ट एशिया संकट की वजह से उन्हें हर दिन करीब ₹600 करोड़ का नुकसान हो रहा है. लेकिन दूसरी तरफ कंपनियों के ताजा तिमाही नतीजे बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रहे हैं. सवाल यही उठ रहा है कि अगर कंपनियां घाटे में हैं, तो फिर उनके मुनाफे में इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे हो रही है?
दरअसल, जो नतीजे अभी सामने आए हैं, वे Q4 यानी जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 तिमाही के हैं. वेस्ट एशिया में तनाव और जंग जैसे हालात 28 फरवरी के बाद ज्यादा बढ़े थे. ऐसे में इसका असर पूरे Q4 रिजल्ट में पूरी तरह दिखाई नहीं देता. मौजूदा हालात और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असली असर अब Q1 रिजल्ट यानी अप्रैल, मई और जून 2026 तिमाही में देखने को मिल सकता है. ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां जो घाटे का दावा कर रही हैं, उसकी तस्वीर आने वाले महीनों के नतीजों में ज्यादा साफ हो सकती है.
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