भारत को पीछे छोड़ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बना ताइवान, जानें- इंडिया के मुकाबले कितनी है GDP
सोमवार तक ताइवान का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 4.95 ट्रिलियन डॉलर हो गया, जबकि भारत का मार्केट वैल्यू घटकर 4.92 ट्रिलियन डॉलर रह गया. इसके साथ ही, ताइवान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बन गया है.
AI-आधारित रैलियों के महीनों बाद, ताइवान ने आखिरकार कुल शेयर बाजार वैल्यूएशन के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है. इसकी मुख्य वजह दुनिया की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली कंपनी, ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) के शेयरों में आई जबरदस्त तेजी है.
ब्लूमबर्ग द्वारा जुटाए गए डेटा के अनुसार, सोमवार तक ताइवान का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 4.95 ट्रिलियन डॉलर हो गया, जबकि भारत का मार्केट वैल्यू घटकर 4.92 ट्रिलियन डॉलर रह गया. इसके साथ ही, ताइवान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बन गया है. उससे आगे सिर्फ अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग हैं.
ताइवान का शेयर बाजार तेजी से क्यों बढ़ रहा है?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की मार्केट वैल्यू में आई तेजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर निवेशकों के मजबूत भरोसे को दिखाती है. इसी भरोसे ने टेक्नोलॉजी शेयरों में दुनिया भर में तेजी ला दी है, और ताइवान तथा दक्षिण कोरिया जैसी मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित अर्थव्यवस्थाओं को इसका कहीं ज्यादा फायदा पहुंचा है. वैश्विक बाजार रैंकिंग में ताइवान की इस बढ़त का मुख्य श्रेय TSMC को जाता है. अब यह कंपनी बेंचमार्क इंडेक्स का लगभग 42% हिस्सा है, जो बाजार के भीतर मौजूद उच्च स्तर के कान्सन्ट्रेशन को दर्शाता है.
दुनिया के टॉप 10 शेयर बाजार
| रैंक | देश / मार्केट | मार्केट वैल्यूएशन (ट्रिलियन USD) |
|---|---|---|
| 1 | अमेरिका (US) | 77.95 |
| 2 | चीन (Mainland China) | 15.61 |
| 3 | जापान (Japan) | 8.7 |
| 4 | हांगकांग (Hong Kong) | 7.25 |
| 5 | ताइवान (Taiwan) | 4.95 |
| 6 | भारत (India) | 4.92 |
| 7 | दक्षिण कोरिया (South Korea) | 4.54 |
| 8 | कनाडा (Canada) | 4.54 |
| 9 | यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) | 3.99 |
| 10 | फ्रांस (France) | 3.5 |
स्रोत: ब्लूमबर्ग (Bloomberg)
सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी
सेमीकंडक्टर की दिग्गज कंपनी के शेयरों में इस साल 49 फीसदी की तेजी आई है, क्योंकि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आई तेजी का सबसे अधिक फायदा उठाने वाली कंपनियों में से एक बनकर उभरी है. इसके चिप्स की ग्लोबल मार्केट में एक अहम जगह है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ताइवान के बढ़ते मार्केट कैपिटलाइजेशन की मुख्य वजह देश में टेक्नोलॉजी हार्डवेयर कंपनियों की बड़ी मौजूदगी है, जो इस समय ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निवेश की लहर के केंद्र में हैं.
नियमों बदलाव का असर
हाल के रेगुलेटरी बदलावों ने भी Taiwan Semiconductor Manufacturing Company के पक्ष में काम किया है. पिछले महीने Taiwan के फाइनेंशियल रेगुलेटर ने अलग-अलग शेयरों में निवेश करने वाले घरेलू फंड्स के लिए निवेश की सीमा में ढील दी.
बदले हुए नियमों के तहत, जो फंड पूरी तरह से Taiwanese इक्विटी पर केंद्रित हैं, उन्हें अब अपनी कुल संपत्ति का 25 फीसदी तक किसी एक लिस्टेड कंपनी में निवेश करने की अनुमति है, बशर्ते उस कंपनी का Taiwan Stock Exchange में वेटेज 10 फीसदी से ज्यादा हो. पहले यह सीमा 10 फीसदी थी. फिलहाल, TSMC ही एकमात्र ऐसी कंपनी है जो इन नए नियमों को पूरा करती है.
जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी ने एक रिसर्च नोट में कहा कि रेगुलेटरी बदलाव से ताइवान के मार्केट में 6 अरब डॉलर से अधिक का नया इनफ्लो आ सकता है.
भारतीय शेयर बाजार क्यों गिरा?
इस बीच भारत बढ़ती ऊर्जा लागत, कॉरपोरेट कमाई में धीमी ग्रोथ और AI इकोसिस्टम के विस्तार से सीधे जुड़ी कंपनियों की अपेक्षाकृत सीमित मौजूदगी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है. असल में भारत में IT सेक्टर के शेयरों में गिरावट की वजह यह डर है कि AI की तेजी टेक्नोलॉजी सेक्टर के बिजनेस मॉडल को बाधित कर सकती है. व
पिछले साल BSE Sensex और Nifty50 में बिकवाली मुख्य रूप से टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण हुई थी. मार्च की शुरुआत से ही अमेरिका-ईरान संघर्ष बाजार के सेंटीमेंट पर भारी पड़ रहा है. हालांकि, कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में ताइवान के भारत से आगे निकल जाने के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था का आकार काफी बड़ा बना हुआ है.
विदेशी निवेशकों की निकासी
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के अनुमानों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था की वैल्यू लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि ताइवान का ग्रॉस डोमोस्टिक प्रोडक्ट (GDP) लगभग 977 अरब डॉलर है. इस साल भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई है, जिसकी मुख्य वजह विदेशी निवेशकों द्वारा रिकॉर्ड स्तर पर की गई निकासी है.
यह निकासी शेयरों के महंगे वैल्यूएशन और कमजोर होते रुपये को लेकर जताई जा रही चिंताओं के कारण हुई है. एनर्जी की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है, जिससे देश के विकास की संभावनाओं पर भी अनिश्चितता के बादल छा गए हैं.
ताइवान की तरफ शुफ्ट हुआ निवेश
ग्लोबल इन्वेस्टर्स ने इस साल अब तक लगभग 24 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेचे हैं, क्योंकि कैपिटल ताइवान और साउथ कोरिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाली रैली की ओर शिफ्ट हुआ है. भारत का बेंचमार्क मार्केट इंडेक्स 8 फीसदी गिर गया है, जिससे यह एक दशक की बढ़त के बाद अपनी पहली सालाना गिरावट की ओर बढ़ रहा है. MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का वेटेज भी पिछले साल के 19 फीसदी से घटकर लगभग 12 फीसदी हो गया है.
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