कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश से पहले सावधान रहें, सेबी चीफ की चेतावनी, डेट बाजार के लिए नए सुधारों की तैयारी
सेबी ने कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश को लेकर निवेशकों को सतर्क किया है. सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि कॉरपोरेट बॉन्ड पूरी तरह सुरक्षित निवेश नहीं हैं. साथ ही सेबी भारत के डेट मार्केट को मजबूत बनाने के लिए कई सुधारों पर काम कर रहा है.
SEBI ने कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश को लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. सेबी के चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey ने कहा कि कॉरपोरेट बॉन्ड पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते हैं. इसके साथ ही सेबी देश के डेट बाजार को और मजबूत बनाने के लिए कई बड़े सुधारों पर काम कर रहा है. इनमें कॉरपोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन का पायलट स्ट्रक्चर भी शामिल है. सेबी का मकसद बॉन्ड बाजार में लिक्विडीटी बढ़ाना और ज्यादा निवेशकों को जोड़ना है।
सेबी की साफ चेतावनी
Tuhin Kanta Pandey ने कहा कि निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि कॉरपोरेट बॉन्ड में भी रिस्क होता है. इन्हें पूरी तरह सुरक्षित निवेश नहीं माना जा सकता.उन्होंने कहा कि निवेश से पहले लोगों को कंपनी की स्थिति और बॉन्ड की रेटिंग को समझना चाहिए. सेबी निवेशकों को जागरूक बनाने पर भी जोर दे रहा है. ताकि लोग सही जानकारी के साथ निवेश का फैसला लें.
भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार
सेबी के मुताबिक, भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार पिछले कुछ साल में तेजी से बढ़ा है. कॉरपोरेट बॉन्ड का कुल साइज 17.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. वहीं वित्त वर्ष 2026 में डेट जारी करने के जरिए 9.1 ट्रिलियन रुपये जुटाए गए. यह शेयर बाजार से जुटाई गई रकम से लगभग दोगुना है. इसके बावजूद सेबी मानता है कि इस बाजार में अभी और सुधार की जरूरत है.
रिटेल निवेश अब भी बड़ी चुनौती
सेबी का कहना है कि बॉन्ड बाजार में अभी भी लिक्विडीटी कम है. कई कॉरपोरेट बॉन्ड में कारोबार बहुत कम होता है. ऐसे में निवेशकों के लिए जल्दी खरीद या बिक्री करना आसान नहीं होता. इसके अलावा खुदरा निवेशकों की भागीदारी भी काफी कम है. घरेलू स्तर पर बॉन्ड बाजार में हिस्सेदारी अभी 1 फीसदी से भी कम है. यही वजह है कि सेबी इसमें सुधार की कोशिश कर रहा है.
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टोकनाइजेशन पर काम कर रहा है सेबी
सेबी कॉरपोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन के लिए पायलट स्ट्रक्चर तैयार करने पर विचार कर रहा है. इसमें बॉन्ड को डिजिटल रूप में ब्लॉकचेन आधारित सिस्टम पर लाया जा सकता है. इससे निवेश करना आसान हो सकता है. साथ ही छोटे हिस्से में निवेश का विकल्प भी मिल सकता है. इससे ज्यादा लोगों की पहुंच बॉन्ड बाजार तक बढ़ सकती है।
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