कच्चा तेल 100 डॉलर के नीचे, HPCL-BPCL से लेकर IndiGo तक शेयरों में आई बहार, जानें कौन बना टॉप गेनर?
क्रूड-सेंसिटिव शेयरों में तेजी का असर पूरे बाजार पर भी देखने को मिला. सुबह करीब 9:20 बजे BSE Sensex 835 अंक से ज्यादा चढ़ा हुआ था, जबकि NIFTY 50 में 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई. बाजार को वैश्विक संकेतों में सुधार, तेल कीमतों में गिरावट और अलग-अलग सेक्टर्स में खरीदारी का सपोर्ट मिला.
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आने के बाद सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में क्रूड-सेंसिटिव कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. कम तेल कीमतों से फायदा पाने वाली कंपनियों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की. Hindustan Petroleum Corporation यानी HPCL का शेयर 4.5 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया, जबकि Bharat Petroleum Corporation यानी BPCL में करीब 3.7 फीसदी की तेजी देखने को मिली. वहीं Indian Oil Corporation यानी IOC का शेयर भी 3 फीसदी से ज्यादा उछल गया.
टायर कंपनियों में भी जोरदार खरीदारी
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा टायर कंपनियों को भी मिला. JK Tyre & Industries का शेयर 4.5 फीसदी चढ़ गया. वहीं CEAT में 2.3 फीसदी और Apollo Tyres में करीब 2 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. टायर कंपनियों के लिए कच्चा तेल अहम कच्चा माल माना जाता है, इसलिए तेल सस्ता होने पर उनकी लागत घटने की उम्मीद बढ़ जाती है.
एयरलाइन और पेंट शेयरों में भी तेजी
कम क्रूड कीमतों का असर एयरलाइन और पेंट कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला. InterGlobe Aviation का शेयर 1.6 फीसदी चढ़ा. वहीं Asian Paints और Berger Paints India के शेयर करीब 1 फीसदी मजबूत हुए. Kansai Nerolac Paints भी हरे निशान में कारोबार करता दिखा.
क्यों टूटा कच्चा तेल?
सोमवार को एशियाई कारोबार में Brent Crude करीब 4.6 फीसदी टूटकर 98.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं अमेरिकी WTI Crude भी करीब 5 फीसदी गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. बाजार में यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति की खबरों के बाद आई. निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में मध्य पूर्व से तेल सप्लाई दोबारा सामान्य हो सकती है.
किन सेक्टर्स को होता है फायदा?
कम कच्चा तेल कीमतों का सबसे ज्यादा फायदा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मिलता है, क्योंकि इससे इन्वेंट्री लागत और वर्किंग कैपिटल पर दबाव कम होता है. टायर और पेंट कंपनियों को भी राहत मिलती है, क्योंकि उनके कई कच्चे माल क्रूड ऑयल से जुड़े होते हैं. वहीं एयरलाइन कंपनियों के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी ATF सबसे बड़ा खर्च होता है. ऐसे में तेल सस्ता होने से उनकी लागत घटने की उम्मीद बढ़ जाती है.
बाजार में भी दिखी मजबूती
क्रूड-सेंसिटिव शेयरों में तेजी का असर पूरे बाजार पर भी देखने को मिला. सुबह करीब 9:20 बजे BSE Sensex 835 अंक से ज्यादा चढ़ा हुआ था, जबकि NIFTY 50 में 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई. बाजार को वैश्विक संकेतों में सुधार, तेल कीमतों में गिरावट और अलग-अलग सेक्टर्स में खरीदारी का सपोर्ट मिला.
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