₹5972 करोड़ का ऑर्डर बुक, फिर भी Jupiter Wagons का शेयर 52-वीक हाई से 31% नीचे कर रहा कारोबार; क्या है वजह?
Jupiter Wagons Limited के पास Q1FY26 में 5,972 करोड़ रुपये का मजबूत ऑर्डर बुक होने के बावजूद कंपनी का शेयर अपने 52-वीक हाई से करीब 31 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है. FY26 में व्हीलसेट शॉर्टेज, सप्लाई चेन बाधाएं, ओडिशा व्हीलसेट प्रोजेक्ट में देरी और इंडियन रेलवेज के बड़े टेंडर का इंतजार निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं.
Jupiter Wagons Share: भारत की प्रमुख रेल वैगन निर्माता कंपनी Jupiter Wagons Limited के पास मजबूत ऑर्डर बुक होने के बावजूद उसके शेयर पर दबाव बना हुआ है. कंपनी के पास Q1FY26 में करीब 5,972 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है, लेकिन इसके बावजूद शेयर अपने 52-वीक हाई से करीब 31 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है. 16 जुलाई 2025 को कंपनी का शेयर 375.90 रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, जबकि फिलहाल यह करीब 256 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है.
FY26 में ऑपरेशनल चुनौतियों का असर
कंपनी के वित्त वर्ष 2026 के प्रदर्शन पर कई ऑपरेशनल बाधाओं का असर देखने को मिला. पूरे वर्ष में कंपनी की कुल आय 2,916 करोड़ रुपये रही, जबकि EBITDA 363 करोड़ रुपये और PAT 166 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. EBITDA मार्जिन 12.4 प्रतिशत रहा.
वहीं, चौथी तिमाही में कंपनी की कुल आय 780 करोड़ रुपये, EBITDA 83 करोड़ रुपये और PAT 27 करोड़ रुपये रहा. कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि ये आंकड़े कंपनी की वास्तविक क्षमता को पूरी तरह नहीं दिखाते, क्योंकि पूरे साल सप्लाई से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा.
Wheelset की कमी और सप्लाई चेन संकट
वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में उद्योग को Wheelset Shortage का सामना करना पड़ा, जिससे वैगन उत्पादन प्रभावित हुआ. इसके बाद चौथी तिमाही में वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी नई समस्याएं सामने आईं. जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण LPG की उपलब्धता प्रभावित हुई, जिसका असर कंपनी के ऑपरेशन पर भी पड़ा. इन लगातार आई बाधाओं ने निवेशकों के बीच निकट अवधि की कमाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी.
Odisha Wheelset Project में देरी
कंपनी की भविष्य की ग्रोथ रणनीति का बड़ा हिस्सा Odisha Greenfield Wheelset प्रोजेक्ट पर आधारित है. हालांकि, इस परियोजना में देरी हुई है. पहले जहां आंशिक उत्पादन दो तिमाही पहले शुरू होने की उम्मीद थी, अब कंपनी के अनुसार इंटरिम प्रोटेक्शन मार्च 2027 तक शुरू होगा, जबकि फुल कमिशनिंग मार्च 2028 तक होने की संभावना है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि अंतिम परियोजना की समयसीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है और देरी की वजह वैश्विक शिपमेंट में आई रुकावट है. इसके बावजूद बाजार ने इसे नकारात्मक संकेत के रूप में लिया है.
Indian Railways के बड़े टेंडर का इंतजार
Jupiter Wagons की ग्रोथ के लिए Indian Railways का प्रस्तावित बड़ा वैगन टेंडर भी बेहद अहम माना जा रहा है. कंपनी के अनुसार, रेलवे द्वारा करीब 1 लाख वैगनों का बड़ा टेंडर आने की उम्मीद है, जो अगले तीन से चार वर्षों के लिए उद्योग को पर्याप्त ऑर्डर दे सकता है. हालांकि, अब तक इस टेंडर के जारी नहीं होने से निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है. कंपनी को भरोसा है कि यह टेंडर चालू वित्त वर्ष के दौरान जारी हो सकता है.
ऑर्डर बुक मजबूत, लेकिन एग्जीक्यूशन धीमा
Trade Brains की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के पास फिलहाल Indian Railways के लगभग 2,000 वैगनों और Non-Railway ग्राहकों के करीब 5,400 वैगनों के ऑर्डर लंबित हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 3,100 करोड़ रुपये है. इसके बावजूद कंपनी फिलहाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जल्दबाजी में नहीं है. मैनेजमेंट का कहना है कि जब तक रेलवे का नया बड़ा ऑर्डर नहीं आता, तब तक मौजूदा क्षमता के आधार पर ही काम किया जाएगा. इस रणनीति के कारण ऑर्डर बुक का राजस्व में रूपांतरण धीरे-धीरे होने की संभावना है.
कैसा है शेयर का हाल
गुरुवार को इंट्रा डे में कंपनी का शेयर 0.35 प्रतिशत बढ़कर 256.65 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. बीते एक सप्ताह में इसमें 3.93 प्रतिशत की तेजी आई है. कंपनी का 52-वीक हाई 375.90 रुपये रहा है. ऐसे में फिलहाल यह अपने 52-वीक हाई से करीब 31 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है.
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