महंगे तेल ने कर दिया खेल, 3 महीने में कंपनियों ने घटा दी 25000 शेड्यूल फ्लाइट्स, आंकड़ों से समझिए गणित
भारतीय एयरलाइंस ने जुलाई-सितंबर 2026 में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 8.5% कम उड़ानें शेड्यूल कीं. जुलाई में गिरावट सबसे ज्यादा रही. इसका प्रमुख कारण ऑपरेशनल रुकावटें, जियो-पॉलिटिकल तनाव, एयरस्पेस प्रतिबंध, महंगा ATF और कमजोर मांग रहा.

भारतीय एयरलाइंस ने पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में इस जुलाई-सितंबर में 8.5 फीसदी कम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शेड्यूल कीं, क्योंकि उन्होंने ऑपरेशन में रुकावटों, जियो-पॉलिटिकल पाबंदियों और कम मांग के बीच अपने नेटवर्क में बदलाव किए.
शेड्यूल फ्लाइट्स की संख्या में गिरावट
ग्लोबल ट्रैवल डेटा प्रोवाइडर OAG के डेटा के एनालिसिस से पता चलता है कि आठ भारतीय एयरलाइंस- इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, आकासा एयर, स्पाइसजेट, एलायंस एयर, स्टार एयर और इंडियावन एयर- ने जुलाई-सितंबर 2026 के लिए 2,73,549 उड़ानें शेड्यूल कीं, जो पिछले साल इसी अवधि में 2,98,939 उड़ानें थीं.
फोर्ब्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू शेड्यूल फ्लाइट्स में 8.4 फीसदी की कमी आई, जबकि इंटरनेशनल शेड्यूल में 9.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. साल-दर-साल के हिसाब से सबसे अधिक गिरावट जुलाई में देखी गई, जब घरेलू शेड्यूल में 10 फीसदी और इंटरनेशनल शेड्यूल में 14 फीसदी की कमी आई.
इंडिगो ने घटाई प्लाइट्स की संख्या
जुलाई के मुकाबले अगस्त में शेड्यूल में सुधार हुआ और उड़ानों की संख्या 4,847 बढ़ गई, लेकिन सितंबर में फिर से गिरावट आई और उड़ानों की संख्या 2,923 कम होकर 90,850 रह गई. सितंबर में आई ज्यादातर गिरावट इंडिगो की वजह से हुई, जिसके शेड्यूल में अगस्त के मुकाबले 2,158 उड़ानों की कमी आई. एयर इंडिया ने 875 उड़ानें कम कीं, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने शेड्यूल में 439 उड़ानें बढ़ाईं.
महीने के हिसाब से फ्लाइट ब्रेक-अप
| महीना | 2025 | 2026 | % बदलाव |
|---|---|---|---|
| जुलाई | 99,261 | 88,926 | -10.40% |
| अगस्त | 99,678 | 93,773 | -5.90% |
| सितंबर | 1,00,000 | 90,850 | -9.20% |
| कुल | 2,98,939 | 2,73,549 | -8.50% |
जेट फ्यूल की रिकॉर्ड-तोड़ कीमत
मई में एयर इंडिया ने जून और अगस्त के बीच कुछ इंटरनेशनल रूट पर अपनी सर्विस को बेहतर बनाने की योजना की घोषणा की थी. इसके पीछे कुछ इलाकों में एयरस्पेस पर लगी पाबंदियां और जेट फ्यूल की रिकॉर्ड-तोड़ कीमतें जैसे कारण थे, जो तय की गई सर्विस की कमर्शियल व्यवहार्यता (फायदेमंद होने की क्षमता) पर असर डाल रहे थे.
उसी महीने, इंडिगो के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने कहा था कि वेस्ट एशिया में चल रहे टकराव की वजह से रूट में रुकावटें आईं और जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ गईं, जिसके कारण एयरलाइंस को ‘ऑपरेशनल व्यवहार्यता बनाए रखने के लिए कुछ शॉर्ट-टर्म कदम’ उठाने पड़े.
ATF ने बढ़ा दी ऑपरेशनल बोझ
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) वेस्ट एशिया में टकराव के बीच फिर से महंगा हो गया है. यह किसी एयरलाइन के ऑपरेशनल खर्च का 40 फीसदी तक होता है. जून में 115 रुपये प्रति लीटर से घटकर जुलाई में 110 रुपये प्रति लीटर होने के बाद, घरेलू ATF की कीमतें अगस्त में वापस 115 रुपये प्रति लीटर और फिर 1 सितंबर को 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गईं.
घरेलू यात्रियों की संख्या में गिरावट
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के अनुसार, जुलाई 2025 में 126.05 लाख घरेलू यात्रियों की तुलना में जुलाई 2026 में भारतीय एयरलाइंस ने 120 लाख घरेलू यात्रियों को यात्रा कराई, जो 4.8 फीसदी की गिरावट है. घरेलू यात्री लोड 83.1 फीसदी था, जो एक साल पहले के 82.9 फीसदी की तुलना में थोड़ा अधिक था.
यात्रियों की संख्या में यह कमी ऐसे समय में आई है जब एयरलाइंस बढ़ती लागत और यात्री जितना भुगतान करने को तैयार हैं, उसके बीच एक मुश्किल स्थिति का सामना कर रही हैं. DGCA के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 और जून 2026 के बीच 72 घरेलू रूटों पर औसत हवाई किराए में लगभग 20.5 फीसदी की वृद्धि हुई.
घरेलू यात्री ट्रैफिक
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA ने 27 अगस्त को कहा कि जुलाई में घरेलू यात्री ट्रैफिक में साल-दर-साल 4.8 फीसदी की गिरावट आई, जबकि क्षमता में 7.8 फीसदी की कमी आई. अप्रैल और जुलाई के बीच यात्री ट्रैफिक में एक साल पहले की तुलना में केवल 0.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. एजेंसी ने जियो-पॉलिटिकल व्यवधानों, अधिक महंगाई और ज्यादा लागतों की ओर इशारा किया, जिनका असर गैर-जरूरी खर्चों और बिज़नेस यात्रा पर पड़ा.
रूट ट्रैफिक
दिल्ली-मुंबई रूट पर निर्धारित उड़ानों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसमें जुलाई-सितंबर के दौरान दोनों दिशाओं में 2,606 सेवाएं जोड़ी गईं. मुंबई-कोच्चि और बेंगलुरु-कोच्चि रूटों पर भी काफी बढ़ोतरी हुई. हैदराबाद-तिरुपति रूट पर सबसे अधिक कमी दर्ज की गई, जहां निर्धारित उड़ानों की संख्या 1,318 कम हो गई. इसके बाद चेन्नई-हैदराबाद और बेंगलुरु-हैदराबाद रूटों का स्थान रहा.
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वाले रूट
| रूट | जुलाई-सितंबर 2025 | जुलाई-सितंबर 2026 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| दिल्ली–मुंबई | 9,058 | 11,664 | +2,606 |
| मुंबई–कोच्चि | 1,390 | 2,217 | +827 |
| बेंगलुरु–कोच्चि | 1,531 | 2,151 | +620 |
| बेंगलुरु–पुणे | 2,632 | 3,149 | +517 |
| दिल्ली–कोच्चि | 1,105 | 1,586 | +481 |
सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय रूट
OAG के अगस्त 2026 के मार्केट डेटा से पता चला कि क्षमता में साल-दर-साल 8 फीसदी की गिरावट के बावजूद मुंबई-दुबई भारत का सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय रूट बना रहा. देश के स्तर पर, सऊदी अरब के लिए क्षमता साल-दर-साल 7 फीसदी बढ़कर 3,31,000 सीटें हो गई, जबकि यूके के लिए क्षमता 25 फीसदी बढ़कर 2,20,000 सीटें हो गईं.
थाईलैंड की क्षमता में 21 फीसदी की गिरावट देखी गई, जबकि मलेशिया, श्रीलंका और सिंगापुर में अगस्त 2025 की तुलना में क्रमशः 22 फीसदी, 13 फीसदी और 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.