भारत के सर्विसेज सेक्टर को मिली रफ्तार, अगस्त में PMI 53.3 से बढ़कर 54.1 पर पहुंचा; मैन्युफैक्चरिंग PMI 5 साल के लो पर

भारत के सर्विसेज सेक्टर की एक्टिविटी में अगस्त 2026 में तीन महीने बाद सुधार हुआ और सर्विसेज पीएमआई जुलाई के 53.3 से बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया है. मजबूत कस्टमर डिमांड और न्यू बिजनेस ने ग्रोथ को सपोर्ट दिया. सर्विसेज कंपनियों की हायरिंग भी 15 महीने के हाई पर पहुंची. हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है.

भारत सर्विसेज सेक्टर Image Credit: ai/canva

Highlights

  • सर्विसेज पीएमआई अगस्त में तीन महीने बाद बढ़कर 54.1 पर पहुंचा, जो जुलाई में 53.3 था.
  • सर्विसेज कंपनियों की हायरिंग अगस्त में 15 महीने के हाई पर पहुंची, जबकि न्यू बिजनेस में भी सुधार हुआ.
  • मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अगस्त में गिरकर पांच साल के निचले स्तर पर पहुंचा, हालांकि कंपोजिट पीएमआई 54.3 पर स्थिर रहा.

India services sector: भारत के सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियों में अगस्त 2026 के दौरान सुधार देखने को मिला है. सर्विसेज पीएमआई जुलाई के 53.3 से बढ़कर अगस्त में 54.1 पर पहुंच गया. यह पिछले तीन महीनों में पहली बार है, जब सर्विसेज एक्टिविटी में सुधार दर्ज किया गया है. मजबूत डिमांड और न्यू बिजनेस में बढ़ोतरी से सर्विसेज सेक्टर को गति मिली. हालांकि, दूसरी ओर मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में कमजोरी जारी रही और इसका पीएमआई पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया.

एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई सर्वे के मुताबिक, अगस्त का 54.1 का आंकड़ा मार्च 2022 के बाद दूसरा सबसे कमजोर विस्तार है. यह लंबे समय के औसत 54.5 से भी मामूली नीचे रहा. इससे संकेत मिलता है कि सर्विसेज सेक्टर में गतिविधियां बढ़ी जरूर हैं, लेकिन ग्रोथ की रफ्तार अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है.

तीन महीने बाद सर्विसेज एक्टिविटी में सुधार

सर्विसेज एक्टिविटी मई में 59.8 पर थी, जो जून में घटकर 57.4 और जुलाई में 53.3 पर आ गई थी. अगस्त में इसमें सुधार हुआ और पीएमआई 54.1 तक पहुंच गया. इस दौरान कंपनियों को कस्टमर डिमांड में मजबूती और मार्केटिंग एफर्ट्स से फायदा मिला. एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी के अनुसार, अगस्त में भारत की सर्विसेज एक्टिविटी की ग्रोथ तेज हुई.

आउटपुट और न्यू बिजनेस में मजबूती ने ग्रोथ को सपोर्ट दिया. हालांकि, कुल विस्तार की रफ्तार चार साल से ज्यादा समय में सबसे कमजोर स्तरों में बनी हुई है. कुछ कंपनियों ने सब्ड्यूड बुकिंग्स, कॉम्पिटिशन और ट्रांसपोर्ट ऑपरेशंस में कमी को चुनौती के तौर पर बताया.

न्यू बिजनेस में भी बढ़ोतरी

अगस्त में सर्विसेज कंपनियों के न्यू बिजनेस में पहले की तुलना में तेज वृद्धि दर्ज की गई. कंपनियों को मजबूत कस्टमर डिमांड और मार्केटिंग एक्टिविटीज से मदद मिली. हालांकि, न्यू ऑर्डर्स की ग्रोथ करीब साढ़े चार साल में दूसरी सबसे धीमी रही. कुछ कंपनियों ने डिफिकल्ट मार्केट कंडीशंस और कमजोर क्लाइंट डिमांड की बात कही. इसके बावजूद एक्सपोर्ट ऑर्डर्स में लगातार विस्तार हुआ. ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर और यूएई जैसे बाजारों से डिमांड ने एक्सपोर्ट बिजनेस को सपोर्ट दिया.

सर्विसेज सेक्टर में हायरिंग ने पकड़ी रफ्तार

सर्विसेज सेक्टर से एम्प्लॉयमेंट के मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं. अगस्त में सर्विसेज कंपनियों की हायरिंग 15 महीने के हाई पर पहुंच गई. कंपनियों ने कस्टमर सर्विस, सेल्स और डिजिटल ऑपरेशंस को मजबूत करने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई. प्राइवेट सेक्टर में कुल एम्प्लॉयमेंट में भी तेजी देखी गई. सर्विसेज कंपनियों में मजबूत हायरिंग ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हुई जॉब शेडिंग की भरपाई कर दी.

जीडीपी ग्रोथ में भी सर्विसेज की अहम भूमिका

सर्विसेज एक्टिविटी में यह सुधार ऐसे समय आया है, जब भारत की इकोनॉमी में सर्विसेज सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है. 31 अगस्त को जारी FY27 की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों के मुताबिक, सर्विसेज सेक्टर इकोनॉमी के सबसे तेजी से बढ़ने वाले हिस्सों में शामिल रहा. फाइनेंशियल सर्विसेज में डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई. अप्रैल-जून क्वार्टर में भारत की इकोनॉमी 7.8% की दर से बढ़ी, जो अनुमान से बेहतर रही. इससे संकेत मिला कि ग्लोबल अनसर्टेनिटी के बीच भी डोमेस्टिक इकोनॉमिक एक्टिविटी में मजबूती बनी हुई है.

मैन्युफैक्चरिंग की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता

सर्विसेज सेक्टर में सुधार के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में लगातार कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है. अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई गिरकर पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया. इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एम्प्लॉयमेंट करीब ढाई साल में पहली बार घटा.

सर्विसेज में ग्रोथ तेज होने के कारण अगस्त में कंपोजिट पीएमआई 54.3 पर स्थिर रहा. यानी सर्विसेज सेक्टर की मजबूती ने मैन्युफैक्चरिंग में आई गिरावट के असर को कुछ हद तक संतुलित किया. आने वाले महीनों में सर्विसेज डिमांड, एक्सपोर्ट ऑर्डर्स और एम्प्लॉयमेंट में बनी रहने वाली मजबूती भारतीय इकोनॉमी की ओवरऑल ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण होगी.

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