एयर इंडिया के कायाकल्प के लिए टाटा संस लगाएगा ₹10000 करोड़, चंद्रशेखरन की अध्यक्षता में हुआ फैसला
यह मंजूरी तब मिली है जब टाटा संस ने एयर इंडिया में इक्विटी निवेश रोक दिया था. एयर इंडिया का घाटा FY26 में दोगुने से अधिक बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया था. टाटा संस के बोर्ड की बैठक 17 सितंबर को होनी है.
Highlights
- टाटा संस की ओर से यह सबसे बड़े निवेशों में से एक है.
- यह फैसला जून में हुई बोर्ड मीटिंग में लिया गया था.
- एयर इंडिया का घाटा 22,238 करोड़ रुपये हो गया.
एयर इंडिया का कायाकल्प करने के लिए टाटा संस अब बड़ी पूंजी लगाने की तैयारी में है. वित्तीय संकट से जूझ रही एयरलाइन को रिवाइव करने के लिए टाटा संस के बोर्ड ने एयर इंडिया में 10,000 करोड़ रुपये (लगभग $1.1 अरब) से अधिक की नई पूंजी लगाने को मंजूरी दे दी है. हालांकि यह मंजूरी कुछ शर्तों के साथ दी गई है. TOI की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में 18,000 करोड़ रुपये में एयरलाइन को खरीदने के बाद से टाटा संस की ओर से यह सबसे बड़े निवेशों में से एक है.
जून की बोर्ड मीटिंग में हुआ फैसला
सूत्रों के अनुसार, बोर्ड ने कुछ शर्तों के साथ एयर इंडिया और ग्रुप के दूसरे वेंचर्स में नए निवेश के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है.TOI ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जब भी फंड की जरूरत होगी, तो एयर इंडिया और निवेश पाने वाली दूसरी कंपनियों को पूंजी लेने के लिए एक बिजनेस केस पेश करना होगा.
रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला जून में हुई बोर्ड मीटिंग में लिया गया था. इस मीटिंग की अध्यक्षता एन. चंद्रशेखरन ने की थी और इसमें टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन भी शामिल हुए थे.
22238 करोड़ रुपये हुआ घाटा
रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा संस के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ के आर्टिकल 121A के तहत, 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर्स की बहुमत वाली मंजूरी जरूरी है. यह मंजूरी तब मिली है जब टाटा संस ने एयर इंडिया में इक्विटी निवेश रोक दिया था. एयर इंडिया का घाटा FY26 में दोगुने से अधिक बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया था.
टाटा संस के बोर्ड की बैठक 17 सितंबर को होनी है. इससे एक हफ्ते पहले, 11 सितंबर को टाटा ट्रस्ट्स (सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT को छोड़कर) की बैठक होगी. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट के कथित उल्लंघन की जांच के कारण मई से SRTT को बोर्ड मीटिंग करने से रोक दिया गया है.
एयर इंडिया को मालिकों से $1.5 अरब चाहिए
25 अगस्त को रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी थी कि एयर इंडिया अपने मालिकों- टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से लगभग 1.5 अरब डॉलर की नई इक्विटी चाहती है. मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने रॉयटर्स को बताया कि भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन द्वारा रिकॉर्ड सालाना घाटा दर्ज करने के कुछ महीनों बाद यह मांग की गई है.
एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया, ‘एयर इंडिया को तुरंत फंड चाहिए, हालांकि यह निवेश किश्तों में होने की संभावना है. निवेश को पूरा करने के लिए सिंगापुर एयरलाइंस को प्रस्तावित निवेश में अपना हिस्सा देना होगा.’
एयरलाइन के सामने चुनौतियां
इससे एयरलाइन के सामने आने वाली चुनौतियों का पता चलता है, क्योंकि वह कई अरब डॉलर के बदलाव (रीवैम्प) से गुजर रही है, जिसमें उसके मौजूदा बेड़े (फ्लीट) का नवीनीकरण भी शामिल है.
एयरलाइन और उसकी बजट यूनिट एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष में कुल 2.33 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया, जो पिछले साल के घाटे से दोगुने से भी अधिक है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस घाटे का असर सिंगापुर एयरलाइंस के मुनाफे पर भी पड़ा है.
सिंगापुर एयरलाइंस और एयर इंडिया
इससे पहले अगस्त में सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा था कि वह एयर इंडिया के बदलाव के कार्यक्रम में मदद के लिए टाटा संस के साथ मिलकर काम कर रही है, लेकिन उसने एयरलाइन की वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन फरवरी में पद छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस की लगभग 25 फीसदी हिस्सेदारी है.
एयर इंडिया के सुधार में लगेगा एक दशक
चंद्रशेखरन ने कुछ समय पहले कहा था कि एयर इंडिया की स्थिति को सुधारने में एक दशक तक का समय लग सकता है. उन्होंने इसके लिए सप्लाई-चेन में लगातार आ रही रुकावटों और एयरलाइन के पुराने सिस्टम, कल्चर और फ्लीट (विमानों के बेड़े) में बड़े बदलाव की जरूरत का हवाला दिया है.
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