अगले 5 साल में 800 अरब डॉलर का निवेश, Morgan Stanley की रिपोर्ट में भारत के लिए बड़ा संकेत; इन सेक्टर्स पर रहेगा फोकस
भारत की अर्थव्यवस्था अगले 5 साल में 800 अरब डॉलर के बड़े निवेश बूम की ओर बढ़ सकती है, जिसमें एनर्जी ट्रांजिशन, डिफेंस और डेटा सेंटर्स सेक्टर अहम भूमिका निभाएंगे. Morgan Stanley की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का निवेश रेट जीडीपी के 37.5 फीसदी तक पहुंच सकता है, जिससे एक मजबूत कैपेक्स साइकिल शुरू होने की संभावना है. यह ग्रोथ कॉर्पोरेट अर्निंग्स और शेयर बाजार को भी सपोर्ट कर सकती है.

India Capex Boom: भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में बड़े निवेश उछाल के दौर में प्रवेश कर सकती है. वैश्विक ब्रोकरेज Morgan Stanley की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अगले 5 साल में करीब 800 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश देखने को मिल सकता है. यह निवेश मुख्य रूप से एनर्जी ट्रांजिशन, डेटा सेंटर्स और डिफेंस सेक्टर में आएगा. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का निवेश रेट एफवाई2030 तक जीडीपी के 37.5 फीसदी तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान 36.5 फीसदी से ज्यादा है. यह संकेत देता है कि देश में एक मजबूत कैपेक्स साइकिल शुरू हो सकता है.
एनर्जी सेक्टर पर सबसे बड़ा फोकस
रिपोर्ट के अनुसार भारत की नीति में एनर्जी सिक्योरिटी सबसे अहम भूमिका निभाएगी. सरकार स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को बढ़ाने, कोल गैसीफिकेशन और डोमेस्टिक माइनिंग को मजबूत करने, इलेक्ट्रिफिकेशन को बढ़ावा देने और रिन्यूएबल एनर्जी को तेजी से आगे बढ़ाने पर काम कर रही है. इसके साथ ही न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है, ताकि ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई जा सके और वैश्विक सप्लाई शॉक्स का असर कम हो.
डिफेंस खर्च में होगी बड़ी बढ़ोतरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर यूएस-ईरान वार जैसी परिस्थितियां भारत को डिफेंस पर ज्यादा खर्च करने के लिए प्रेरित कर रही हैं. भारत का डिफेंस खर्च वर्तमान में करीब 2 फीसदी जीडीपी है, जिसे एफवाई2031 तक बढ़ाकर 2.5 फीसदी तक ले जाने की उम्मीद है. इससे घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी कैपेबिलिटीज को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.
डेटा सेंटर्स बन सकते हैं नया ग्लोबल हब
भारत तेजी से ग्लोबल डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकता है. जियोपॉलिटिकल बदलाव और सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन के चलते विदेशी निवेशक भारत को एक सुरक्षित और आकर्षक विकल्प के रूप में देख रहे हैं. पॉलिसी सपोर्ट और फॉरेन इन्वेस्टमेंट के कारण इस सेक्टर में तेजी से कैपेसिटी एक्सपेंशन होने की उम्मीद है, जिससे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा.
फर्टिलाइजर और अन्य सेक्टर में भी रणनीति
रिपोर्ट में फर्टिलाइजर सेक्टर के लिए भी तीन प्रमुख रणनीतियों का जिक्र किया गया है, जिसमें इम्पोर्ट डाइवर्सिफिकेशन, डोमेस्टिक प्रोडक्शन बढ़ाना और न्यूट्रिएंट एफिशिएंसी में सुधार शामिल है. इससे वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम होगा और कृषि उत्पादकता बढ़ेगी.
रिमिटेंस और अर्थव्यवस्था की मजबूती
हालांकि गल्फ देशों से आने वाले रिमिटेंस पर कुछ जोखिम बना हुआ है, लेकिन भारत की एक्सटर्नल पोजीशन पहले से ज्यादा मजबूत मानी जा रही है. स्रोतों की विविधता और मिडिल ईस्ट में संभावित रिकंस्ट्रक्शन डिमांड से इस जोखिम को संतुलित किया जा सकता है.
इक्विटी मार्केट को मिलेगा बड़ा सपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक भारत की जीडीपी ग्रोथ अगले कुछ वर्षों में 6.5 से 7 फीसदी के बीच रह सकती है. बढ़ते निवेश के चलते कॉर्पोरेट अर्निंग्स में भी 15 फीसदी सालाना ग्रोथ संभव है. प्रॉफिट शेयर भी जीडीपी में 7 फीसदी के पिछले स्तर को पार कर 8 फीसदी तक जा सकता है. इसका सीधा फायदा शेयर बाजार को मिल सकता है और लंबी अवधि में बुल मार्केट को सपोर्ट मिलेगा.