कोहिनूर की वापसी Via न्यूयॉर्क! ₹8,300 करोड़ का हीरा, भारत को लौटाने पर मजबूर होगा ब्रिटेन, इस अमेरिकी ने खेला दांव
कोहिनूर हीरे की भारत वापसी को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है, जब न्यूयॉर्क के नए मेयर ने किंग चार्ल्स से इसे लौटाने की मांग उठाने की बात कही. 8000 करोड़ की ज्यादा कीमत वाले इस हीरे को लेकर भारत और ब्रिटेन के बीच पुराना विवाद फिर चर्चा में आ गया है.
क्या भारत की शान ‘कोहिनूर’ की घर वापसी का रास्ता अब लंदन के बजाय न्यूयॉर्क से होकर गुजरेगा? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी ने ब्रिटिश किंग चार्ल्स III के सामने ऐसी मांग रखने का वादा किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है. ममदानी ने साफ कहा है कि वे किंग चार्ल्स को कोहिनूर हीरा भारत को वापस करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे.
मेयर ममदानी की ‘डिप्लोमैटिक गुगली’
भारतीय मूल के जोहरान ममदानी, जो न्यूयॉर्क के 112वें मेयर हैं, ने किंग चार्ल्स की हालिया अमेरिका यात्रा के दौरान यह मुद्दा उठाया. 9/11 मेमोरियल कार्यक्रम में किंग चार्ल्स से मुलाकात के दौरान ममदानी ने औपचारिक एजेंडे से हटकर भारत की सांस्कृतिक विरासत का मुद्दा छेड़ दिया. उन्होंने मीडिया से कहा, “यदि मुझे किंग से अलग से बात करने का मौका मिला, तो मैं निश्चित रूप से उनसे कोहिनूर लौटाने की सिफारिश करूंगा.
भारत लंबे वक्त से औपनिवेशिक काल की इस ‘लूट’ को वापस लाने की कानूनी और नैतिक लड़ाई लड़ रहा है.
क्या है कोहिनूर की ‘नेटवर्थ’?
बिजनेस के नजरिए से देखें तो कोहिनूर की कीमत आंकना किसी चुनौती से कम नहीं है. 105.6 कैरेट के इस ‘माउंटेन ऑफ लाइट’ की कोई आधिकारिक कीमत तय नहीं है क्योंकि यह कभी बिका ही नहीं. हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स और ग्लोबल ज्वेलर्स के अनुमान चौंकाने वाले हैं:
- इसकी अनुमानित कीमत करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) से भी अधिक मानी जाती है.
- दुनिया के अन्य महंगे हीरों जैसे ‘कलिनन’ (400 मिलियन डॉलर) और ‘होप डायमंड’ (350 मिलियन डॉलर) के मुकाबले कोहिनूर की वैल्यू दोगुनी से भी ज्यादा है.
- टावर ऑफ लंदन में रखे इस हीरे को देखने हर साल लाखों लोग टिकट खरीदते हैं, जिससे ब्रिटिश खजाने को करोड़ों पाउंड की कमाई होती है.
न्यूयॉर्क का रास्ता और कानूनी पेंच
भले ही ममदानी ने एक बड़ा बयान दिया है, लेकिन रास्ता आसान नहीं है. ब्रिटेन आज भी 1849 की लाहौर संधि का हवाला देता है. लेकिन ममदानी जैसे वैश्विक नेताओं का समर्थन भारत के पक्ष में एक नया ‘ग्लोबल प्रेशर’ बना सकता है. हालांकि कोहीनूर बिजनेस डीलिंग के बजाय गौरव का मुद्दा है, ऐसे में उसकी वापसी अभी दूर का सितारा है.
यह भी पढ़ें: ममता राज में कितना ‘सोनार बांग्ला’! 6688 कंपनियों ने छोड़ा बंगाल, ₹15000 आम आदमी की इनकम, पर कर्ज ₹84447
कोहिनूर का सफरनामा
- जन्म: आंध्र प्रदेश की गोलकुंडा खदानें.
- सफर: मुगलों के मयूर सिंहासन से नादिर शाह (फारस), फिर अफगान अमीर और महाराजा रणजीत सिंह.
- कब्जा: 1849 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा सिखों से लिया गया.
- वर्तमान: ब्रिटिश क्राउन का हिस्सा, लंदन में सुरक्षित.
Latest Stories
₹1320 महंगी हुई चांदी, सोना भी चमका, 24-22-18 कैरेट गोल्ड के भाव, जानें अपने शहर के ताजा रेट
ममता राज में कितना ‘सोनार बांग्ला’! 6688 कंपनियों ने छोड़ा बंगाल, ₹15000 आम आदमी की इनकम, पर कर्ज ₹84447
भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा, FY27 में 7% ग्रोथ पर भी मंडराया जोखिम, FM ने कहा – ‘सुरक्षा कवच’ है तैयार
