₹2.54 लाख तक पहुंच सकता है सोना, बस इस ट्रिगर का इंतजार, Deutsche Bank की रिपोर्ट में बड़ा दावा
Deutsche Bank के एक आकलन के मुताबिक, अगर केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 40% तक बढ़ाते हैं, तो अगले 5 साल में गोल्ड की कीमत $8,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है. डीडॉलराइजेशन, बढ़ती जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और मजबूत केंद्रीय बैंक खरीद इस तेजी के बड़े कारण बन सकते हैं.
दुनिया के दिग्गज निवेश बैंक ‘डॉयचे बैंक’ (Deutsche Bank) ने सोने की भविष्य की चाल को लेकर एक रोमांचक विश्लेषण पेश किया है. बैंक के मुताबिक, अगर मौजूदा ‘डी-डॉलरीकरण’ (De-dollarisation) और केंद्रीय बैंकों का गोल्ड मोह इसी तरह जारी रहा, तो सोना अगले पांच सालों में $8,000 प्रति औंस (2.54 लाख रुपये) के स्तर को छू सकता है.
डॉलर से दूरी और गोल्ड की बढ़ती ताकत
डॉयचे बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी विदेशी मुद्रा भंडार (Reserves) की रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहे हैं. वर्तमान में वैश्विक रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी लगभग 30% है, जो बढ़कर 40% होने की संभावना है.
इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण डॉलर के प्रति घटता भरोसा है. साल 2000 के दशक की शुरुआत में वैश्विक रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी 60% से अधिक थी, जो अब सिमटकर लगभग 40% रह गई है. 2008 के वित्तीय संकट के बाद से केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में 22.5 करोड़ औंस से अधिक सोना जोड़ा है.
इन देशों में मची है सोना खरीदने की होड़
अब सिर्फ चीन, रूस, भारत और तुर्की ही नहीं, बल्कि कई अन्य देश भी सोने को एक ‘सुरक्षित कवच’ मान रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब, कतर, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कजाकिस्तान में सोने की खरीदारी बढ़ी है.
पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जाने वाले प्रतिबंधों (Sanctions) के डर ने इन उभरते बाजारों को अपनी संपत्ति सोने में सुरक्षित करने के लिए मजबूर किया है.
युद्ध के बावजूद फिलहाल सुस्त क्यों है सोना?
आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव में सोने की कीमतें आसमान छूती हैं, लेकिन हालिया अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान तस्वीर थोड़ी अलग दिखी. इसकी कुछ प्रमुख वजहें रहीं:
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने ‘मार्जिन कॉल’ पूरा करने के लिए गोल्ड की बिकवाली की.
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और डॉलर की मजबूती ने गैर-ब्याज वाले सोने की चमक को कुछ समय के लिए कम कर दिया है.
- बाजार में रिस्क-ऑफ (Risk-off) माहौल के चलते निवेशकों ने लेवरेज्ड पोजीशन कम की और कैश लेवल बढ़ाया.
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80% मुनाफे की उम्मीद
डॉयचे बैंक ने स्पष्ट किया है कि $8,000 का स्तर एक वैचारिक परिदृश्य (Conceptual Scenario) है, न कि आधिकारिक पूर्वानुमान. फिर भी, बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने की आपूर्ति सीमित है और मांग रिकॉर्ड स्तर पर है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एक सर्वे में भी पाया गया कि केंद्रीय बैंक आर्थिक अस्थिरता को सोने की खरीदारी का सबसे बड़ा कारण मानते हैं.
अगर डॉयचे बैंक का यह परिदृश्य हकीकत में बदलता है, तो मौजूदा स्तरों से सोने में करीब 80% की तेजी देखने को मिल सकती है.
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