UAE के OPEC छोड़ते ही कीमतों में गिरावट, MCX से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक दबाव, जानें कितना हुआ दाम
UAE के OPEC से बाहर निकलने के फैसले ने ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल मचा दी है, जिसका असर सीधे MCX और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा. सप्लाई बढ़ने की आशंका और जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच अब बाजार की दिशा अनिश्चित बनी हुई है.
UAE exits OPEC impact: ग्लोबल ऑयल मार्केट से आज एक बड़ी खबर सामने आई है. तेल निर्यातक देशों के ताकतवर समूह OPEC से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बाहर निकलने के फैसले ने बाजार में हलचल पैदा कर दी है. इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद बुधवार को घरेलू वायदा बाजार (MCX) में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
घरेलू और ग्लोबल मार्केट का हाल
यूएई के इस फैसले का सीधा असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर देखने को मिला.
- MCX अपडेट: मई डिलीवरी वाला कच्चा तेल 68 रुपये (0.72%) गिरकर 9,417 रुपये प्रति बैरल पर आ गया.
- अंतरराष्ट्रीय बाजार: ब्रेंट क्रूड का जून कॉन्ट्रैक्ट 0.34% गिरकर 104.04 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जबकि अमेरिकी क्रूड (WTI) 0.68% की गिरावट के साथ 99.25 डॉलर पर कारोबार करता दिखा.
UAE के फैसले से क्यों मची हलचल?
यूएई ने घोषणा की है कि वह 1 मई से ओपेक (OPEC) और उसके सहयोगी देशों के समूह (OPEC+) से आधिकारिक तौर पर अलग हो जाएगा. यूएई 1967 से इस समूह का हिस्सा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से शॉर्ट-टर्म में तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन लंबी अवधि में तेल की सप्लाई बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
कीमतों में बड़ी गिरावट पर ‘ब्रेक’ क्यों?
भले ही यूएई के बाहर निकलने से कीमतें गिरी हैं, लेकिन कुछ वैश्विक कारकों ने इस गिरावट को थामे रखा:
- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर रखी है.
- हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई में आ रही बाधा ने कीमतों को एक निश्चित स्तर से नीचे नहीं गिरने दिया.
भविष्य का अनुमान: क्या कहता है बाजार?
दिग्गज फाइनेंशियल फर्म ING THINK के विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि फारस की खाड़ी में हालात कैसे रहते हैं. उन्होंने अपने ताजा अनुमानों में तेल की कीमतों में बदलाव किया है:
| अवधि | ब्रेंट क्रूड का अनुमानित औसत |
| दूसरी तिमाही (Q2) | $104 प्रति बैरल |
| चौथी तिमाही (Q4) | $92 प्रति बैरल |
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बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर खाड़ी देशों में तनाव की स्थिति नहीं होती, तो यूएई के बाहर निकलने की खबर से तेल की कीमतें और भी तेजी से गिर सकती थीं. फिलहाल ट्रेडर्स की नजर 1 मई के बाद होने वाले सप्लाई बदलावों पर टिकी है.
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