गोबर और कचरे से होगी कमाई, सरकार की नई योजना में मिलेंगे बड़े फायदे

केंद्र सरकार ने CBG उत्पादन बढ़ाने के लिए 10 साल का मिशन लॉन्च किया है. इसमें ₹105 प्रति किलो की सुनिश्चित कीमत, प्रोजेक्ट लोन पर 85% तक क्रेडिट गारंटी और पूंजीगत मदद का प्रावधान है. लक्ष्य गैस आयात और प्रदूषण घटाना है.

कंप्रेस्ड बायोगैस

Highlights

  • सरकार ने 10 साल का CBG मिशन लॉन्च
  • CBG के लिए ₹105 किलो कीमत सुनिश्चित
  • प्रोजेक्ट लोन पर 85% क्रेडिट गारंटी

केंद्र सरकार ने देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन बढ़ाने के लिए 10 साल का GOBARdhan मिशन मंजूर किया है. ₹23,731 करोड़ के इस कार्यक्रम का मकसद घरेलू स्तर पर CBG उत्पादन बढ़ाना, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को आय का नया जरिया देना और प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करना है.

CBG उत्पादन 12 गुना बढ़ाने का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त को GOBARdhan यानी National Circular Bioenergy Scheme को मंजूरी दी. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी. सरकार का लक्ष्य मौजूदा स्तर के मुकाबले देश में CBG उत्पादन को करीब 12 गुना बढ़ाना है.

फिलहाल देश में 216 CBG प्लांट चालू हैं और इनकी कुल उत्पादन क्षमता करीब 0.4 MMSCMD है. सरकार का मानना है कि लंबे समय तक नीति का समर्थन मिलने से इस सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और नए प्लांट लगाने में कंपनियों को ज्यादा भरोसा मिलेगा.

₹105 प्रति किलो की गारंटीड कीमत

इस मिशन की सबसे अहम खासियत CBG के लिए सुनिश्चित कीमत है. सरकार ने करीब ₹2,110 प्रति MMBtu, यानी लगभग ₹105 प्रति किलो CBG की गारंटीड कीमत का प्रावधान किया है. इससे CBG बनाने वाली कंपनियों को लंबे समय तक बिक्री और कमाई को लेकर ज्यादा निश्चितता मिलेगी. इसके अलावा सरकार योग्य परियोजनाओं को पूंजीगत सहायता भी देगी. इससे CBG प्लांट लगाने में आने वाली शुरुआती लागत और निवेश का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी.

लोन पर 85% तक क्रेडिट गारंटी

सरकार ने CBG परियोजनाओं के लिए वित्तीय मदद बढ़ाने का भी फैसला किया है. मिशन के तहत प्रोजेक्ट लोन पर 85 फीसदी तक की क्रेडिट गारंटी देने का प्रावधान है. इससे कंपनियों और उद्यमियों के लिए बैंकों से कर्ज हासिल करना आसान हो सकता है.

सरकार ने CBG सेक्टर से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों को भी एक जगह लाने का फैसला किया है. पहले ये योजनाएं चार अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़ी थीं. अब इनका संचालन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत किया जाएगा, जिससे फैसले लेने और योजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है.

किसानों और गांवों को भी फायदा

CBG बनाने में कृषि अवशेष, गोबर, प्रेसमड और नगर निकायों से निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे कचरे को उपयोगी ईंधन में बदलने के साथ किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होंगे.

गैस आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश

भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरत का करीब आधा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाओं का घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. सरकार को उम्मीद है कि घरेलू CBG उत्पादन बढ़ने से आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम होगी. सरकार का अनुमान है कि योजना के दौरान करीब 4 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचने में मदद मिलेगी और लगभग ₹40,000 करोड़ की पूंजीगत बचत हो सकती है.

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