Tata Group की सबसे बड़ी कंपनी होगी शेयर बाजार में लिस्ट? जानें RBI का नया आदेश

RBI ने Tata Sons को Upper Layer NBFC की श्रेणी में शामिल किया है. इस फैसले के बाद कंपनी पर सख्त नियामकीय नियम लागू होंगे. NBFC दर्जा बरकरार रहने पर Tata Sons को तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ सकता है.

टाटा संस

RBI ने Tata Sons को Upper Layer Non-Banking Financial Company यानी NBFC की श्रेणी में रखा है. यह NBFC की सबसे ऊपरी श्रेणियों में से एक है. इस कैटेगरी में उन बड़ी NBFC कंपनियों को रखा जाता है, जिनका आकार और वित्तीय व्यवस्था में प्रभाव काफी ज्यादा होता है.

RBI के संशोधित नियमों के तहत बड़ी NBFC कंपनियों को उनके एसेट साइज, कारोबार और वित्तीय प्रणाली पर संभावित प्रभाव के आधार पर Upper Layer में रखा जाता है. Tata Sons भी इस पैमाने पर इस श्रेणी के दायरे में आती है.

तीन साल में शेयर बाजार में लिस्टिंग

Tata Sons के लिए इस फैसले का सबसे बड़ा असर उसकी संभावित लिस्टिंग को लेकर हो सकता है. RBI के नियमों के मुताबिक Upper Layer NBFC के तौर पर वर्गीकृत कंपनी को इस सूची में शामिल किए जाने की तारीख से तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना होता है.

इसका मतलब है कि अगर Tata Sons का NBFC दर्जा बरकरार रहता है, तो कंपनी को तय समयसीमा के भीतर स्टॉक एक्सचेंज पर अपने शेयर लिस्ट कराने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है. हालांकि, कंपनी पहले से ही RBI के पास अपने NBFC रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने का आवेदन कर चुकी है.

Tata Sons ने NBFC दर्जा छोड़ने के लिए किया आवेदन

Tata Sons ने RBI से अपना Core Investment Company (CIC) रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अनुमति मांगी है. RBI ने स्पष्ट किया है कि Upper Layer की सूची में Tata Sons को शामिल किए जाने से कंपनी की यह लंबित अर्जी प्रभावित नहीं होगी.

अब सभी की नजर RBI के इस आवेदन पर आने वाले फैसले पर है. अगर आवेदन मंजूर हो जाता है, तो Tata Sons पर Upper Layer NBFC से जुड़ी लिस्टिंग की शर्त का क्या असर होगा, यह स्थिति स्पष्ट हो सकती है.

Tata Sons का मुख्य कारोबार क्या है?

Tata Sons, Tata Group की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है. इसका मुख्य काम ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों में निवेश और उनकी होल्डिंग से जुड़ा है. Tata Sons के पास Tata Group की कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी है.

Core Investment Company के तौर पर इसका बड़ा हिस्सा ग्रुप की कंपनियों में निवेश से जुड़ा है. RBI के नियमों के अनुसार ऐसी कंपनियों को अपनी नेट एसेट का बड़ा हिस्सा ग्रुप की कंपनियों से जुड़ी इक्विटी, प्रेफरेंस शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर या लोन जैसी संपत्तियों में रखना होता है.

लिस्टिंग से जुड़ी चर्चा फिर तेज

RBI के इस वर्गीकरण के बाद Tata Sons की संभावित IPO और शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. हालांकि, कंपनी का NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने का आवेदन अभी लंबित है. ऐसे में Tata Sons की आगे की रणनीति और RBI के फैसले पर सबकी नजर रहेगी.

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