RBI ने जारी की NBFC अपर लेयर की नई लिस्ट, REC, PFC, IRFC समेत 4 सरकारी कंपनियों की एंट्री

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने NBFC अपर लेयर की नई लिस्ट जारी कर दी है. इस बार REC, PFC, IRFC और HUDCO समेत 4 सरकारी वित्तीय संस्थानों को पहली बार सूची में शामिल किया गया है. नई लिस्ट में कुल 17 कंपनियां हैं, जबकि PNB Housing Finance और Sammaan Capital बाहर हो गई हैं.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया. Image Credit: Getty image

Highlights

  • RBI ने NBFC अपर लेयर की नई लिस्ट जारी करते हुए 4 सरकारी वित्तीय संस्थानों को पहली बार इसमें शामिल किया है.
  • नई सूची में कुल 17 NBFC शामिल हैं.
  • PNB Housing Finance और Sammaan Capital को सूची से बाहर कर दिया गया है.

RBI NBFC Upper Layer: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Non-Banking Financial Companies (NBFC) की नई अपर लेयर (NBFC-UL) लिस्ट जारी कर दी है. इस बार RBI ने चार सरकारी वित्तीय संस्थानों को पहली बार इस सूची में शामिल किया है. नई सूची में कुल 17 कंपनियां शामिल हैं, जबकि इससे पहले वित्त वर्ष 2025 की सूची में 15 कंपनियां थीं. खास बात यह है कि RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए कोई सूची जारी नहीं की थी, क्योंकि वह अपर लेयर NBFC की पहचान के मानदंडों की समीक्षा कर रहा था.

इन 4 सरकारी कंपनियों की हुई नई एंट्री

RBI ने इस बार REC, Power Finance Corporation (PFC), Indian Railway Finance Corporation (IRFC) और Housing and Urban Development Corporation (HUDCO) को पहली बार अपर लेयर NBFC की सूची में शामिल किया है. ये चारों कंपनियां सरकारी स्वामित्व वाली प्रमुख वित्तीय संस्थाएं हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, रेलवे तथा हाउसिंग सेक्टर को बड़े स्तर पर फाइनेंस उपलब्ध कराती हैं. इन कंपनियों के शामिल होने से अब अपर लेयर NBFC की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है.

दो कंपनियां सूची से बाहर हुईं

नई सूची में PNB Housing Finance और Sammaan Capital को बाहर कर दिया गया है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन कंपनियों पर सख्त नियम तुरंत समाप्त हो जाएंगे. RBI के नियमों के मुताबिक, यदि कोई कंपनी अपर लेयर सूची से बाहर भी हो जाती है, तब भी उस पर अगले पांच वर्षों तक एन्हांस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू रहेगा. यानी इन कंपनियों को अभी भी कड़े नियामकीय मानकों का पालन करना होगा.

इन कंपनियों को भी मिली जगह

नई अपर लेयर सूची में Bajaj Finance, Shriram Finance, LIC Housing Finance, Cholamandalam Investment and Finance Company, Tata Capital, Tata Sons, Muthoot Finance, Aditya Birla Capital, Mahindra & Mahindra Financial Services, L&T Finance, Bajaj Housing Finance, HDB Financial Services और Piramal Finance जैसी बड़ी NBFC भी शामिल हैं.

Tata Sons क्यों बनी हुई है सूची में?

RBI ने Tata Sons Private Limited को भी अपर लेयर सूची में बरकरार रखा है. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि इसका कंपनी के NBFC पंजीकरण रद्द करने के आवेदन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. Tata Sons ने पहले ही RBI से अपने NBFC पंजीकरण को सरेंडर करने का अनुरोध किया है, जिसकी समीक्षा अभी जारी है.

RBI ने कहा कि Tata Sons का इस सूची में शामिल रहना केवल मौजूदा नियामकीय व्यवस्था के तहत है और इससे उसके डीरजिस्ट्रेशन आवेदन पर कोई पूर्वाग्रह नहीं माना जाएगा. Tata Sons को पहली बार 2022 में अपर लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत किया गया था. इसके बाद कंपनी ने अपने वित्तीय कारोबार के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की थी और नियामकीय दायित्वों से राहत की मांग की थी. फिलहाल, RBI ने इस आवेदन पर फैसला लेने की कोई समयसीमा नहीं बताई है.

क्या होती है NBFC अपर लेयर

RBI ने स्केल-बेस्ड रेगुलेशन फ्रेमवर्क के तहत NBFC को चार श्रेणियों बेस लेयर, मिडिल लेयर, अपर लेयर और टॉप लेयर में बांटा है. यह वर्गीकरण कंपनी के एसेट साइज, कारोबार की जटिलता, लीवरेज, आपसी वित्तीय जुड़ाव और वित्तीय प्रणाली पर उसके प्रभाव के आधार पर किया जाता है.

अपर लेयर में उन NBFC को शामिल किया जाता है, जो साइज और कारोबार के लिहाज से काफी बड़ी होती हैं और जिनकी गतिविधियों का असर पूरे वित्तीय तंत्र पर पड़ सकता है. ऐसे संस्थानों पर RBI अतिरिक्त निगरानी रखता है और उनके लिए कॉरपोरेट गवर्नेंस तथा डिस्क्लोजर से जुड़े नियम अधिक सख्त होते हैं.

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