3 महीने में 2 लाख टूटी चांदी, 2025 के लेवल पर आई, क्या खरीदारी का यही है समय….क्या बता रहे हैं एक्सपर्ट?
चांदी की कीमतों में भारी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है. तीन महीनों में सिल्वर 2 लाख रुपये तक गिर चुका है और 2026 की पूरी तेजी खत्म हो गई है. हालांकि एक्सपर्ट्स इसे निवेश का मौका भी मान रहे हैं, क्योंकि डिमांड और सप्लाई के फंडामेंटल्स अभी मजबूत बने हुए हैं.
चांदी के निवेशकों के लिए पिछला कुछ समय किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है. जिस चांदी ने 2025 में 170% का छप्परफाड़ रिटर्न देकर सबको चौंका दिया था और जनवरी 2026 में भी 74% की तूफानी तेजी दिखाई थी, अब उसकी चमक अचानक फीकी पड़ गई है. देखते ही देखते चांदी ने 2026 की अपनी पूरी बढ़त गंवा दी है और अब यह पिछले साल के क्लोजिंग लेवल से भी नीचे फिसल गई है.
गिरावट का गणित, 3 महीने में 2 लाख रुपये साफ
चांदी की कीमतों में आई गिरावट की रफ्तार ने बड़े-बड़े दिग्गजों को भी सख्ते में डाल दिया है. मई सिल्वर फ्यूचर्स अपने रिकॉर्ड हाई 4.39 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 2.40 लाख रुपये के नीचे आ गई है. यानी मात्र तीन महीनों में चांदी की कीमत में 2,00,554 रुपये की भारी-भरकम गिरावट आई है. फिलहाल यह 2.38 लाख रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रही है, जो 2025 के क्लोजिंग (2.41 लाख) से भी कम है.
क्यों टूटा निवेशकों का भरोसा?
चांदी के इस तरह धराशायी होने के पीछे तीन मुख्य वजहें मानी जा रही हैं:
- पश्चिम एशिया का संकट और कैश की जरूरत: आमतौर पर युद्ध और तनाव के समय सोना-चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं. लेकिन इस बार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और गहराते तनाव के बीच निवेशकों ने ‘रिस्क-ऑफ’ मोड अपना लिया है. अपनी दूसरी पोजीशन में घाटे की भरपाई (मार्जिन कॉल) करने के लिए निवेशकों ने चांदी में जमकर बिकवाली की और कैश जुटाया.
- मजबूत डॉलर और फेडरल रिजर्व: अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने बिना ब्याज वाली एसेट जैसे चांदी की अपील कम कर दी है. चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी डॉलर में खरीदी जाती है, इसलिए डॉलर महंगा होने से अन्य देशों के लिए इसकी डिमांड घट गई है.
- प्रॉफिट बुकिंग का दबाव: जब कोई एसेट बहुत कम समय में बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो गिरावट भी उतनी ही तेज होती है. बाजार में जब अस्थिरता बढ़ी, तो ट्रेडर्स ने नया निवेश करने के बजाय मुनाफा वसूलना (Profit Booking) ज्यादा सुरक्षित समझा.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
चांदी के भविष्य को लेकर Mirae Asset Mutual Fund की सिल्वर आउटलुक रिपोर्ट में अहम बातें कही गई हैं. उनके मुताबिक, चांदी का स्वभाव सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव वाला रहता है क्योंकि यह एक कीमती मेटल होने के साथ-साथ एक औद्योगिक मेटल भी है. हालांकि 2026 की शुरुआत के बाद कीमतों में बड़ा करेक्शन आया है, लेकिन फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत हैं. बाजार लगातार छठे साल सप्लाई की कमी (Supply Deficit) का सामना कर रहा है.
क्या अभी चांदी खरीदना समझदारी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह गिरावट एक अवसर भी हो सकती है. इसके पीछे कुछ ठोस तर्क हैं:
- औद्योगिक मांग: चांदी की कुल खपत का 60% से ज्यादा हिस्सा इंडस्ट्रीज से आता है. चीन में बढ़ते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चांदी के उपयोग के कारण लंबी अवधि में इसकी मांग मजबूत बनी रहेगी.
- सप्लाई में कमी: पिछले 5-6 सालों से चांदी का उत्पादन मांग के मुकाबले कम है. शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज में इन्वेंट्री एक दशक के निचले स्तर पर है, जो बताता है कि आने वाले समय में फिजिकल चांदी की कमी कीमतों को फिर से ऊपर ले जा सकती है.
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टेक्निकल चार्ट पर क्या स्थिति है?
टेक्निकल नजरिए से देखें तो MCX सिल्वर फिलहाल ₹2,45,200 के आसपास कारोबार कर रही है.
- सपोर्ट जोन: विशेषज्ञों के अनुसार ₹2,40,000 से ₹2,35,000 का स्तर एक मजबूत बेस की तरह काम करेगा.
- रेसिस्टेंस: रिकवरी की स्थिति में ₹2,60,000 से ₹2,65,000 का स्तर बड़ी बाधा है. जब तक चांदी इस लेवल के ऊपर टिककर बंद नहीं होती, तब तक यह एक दायरे में ही घूमती रहेगी.
अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो मौजूदा गिरावट खरीदारी का एक अच्छा मौका हो सकती है. हालांकि, इसकी उच्च अस्थिरता को देखते हुए एकमुश्त निवेश के बजाय टुकड़ों में खरीदारी करना बेहतर रणनीति होगी.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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