सोना या चांदी? Gold-Silver Ratio ने दिया बड़ा संकेत, जानिए अभी किस मेटल में इन्वेस्टमेंट रहेगा फायदेमंद

Gold-Silver Ratio जून 2026 में फिर 62 के ऊपर पहुंच गया है, जिससे संकेत मिलता है कि निकट अवधि में सोना चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. यह रेशियो 68 तक जा सकता है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की मांग बढ़ा रही है.

Gold-Silver Ratio जून 2026 में फिर 62 के ऊपर पहुंच गया है. Image Credit: money9live

Gold-Silver Ratio: सोना खरीदें या चांदी? किसमें निवेश किया जाए, यह सवाल इन दिनों कई निवेशकों के मन में है. हालांकि Gold-Silver Ratio के 62 के ऊपर पहुंचने के बाद मार्केट के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में सोना चांदी से बेहतर रिटर्न दे सकता है. भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने सोने की चमक बढ़ा दी है.

क्या होता है Gold-Silver Ratio?

Gold-Silver Ratio बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी. उदाहरण के लिए, यदि यह रेशियो 62 है तो इसका मतलब है कि एक औंस सोने की कीमत 62 औंस चांदी के बराबर है.

आमतौर पर बढ़ता हुआ Gold-Silver Ratio इस बात का संकेत माना जाता है कि सोना चांदी की तुलना में मजबूत प्रदर्शन कर रहा है. वहीं गिरता हुआ रेशियो चांदी की मजबूती को दिखाता है.

बढ़ा सकता है रेशियो

मई में गिरावट के बाद Gold-Silver Ratio फिर से 62 के स्तर से ऊपर पहुंच गया है. फंड हाउस का अनुमान है कि यह रेशियो आगे बढ़कर 68 तक जा सकता है.

यदि ऐसा होता है तो इसका मतलब होगा कि सोने की मांग चांदी की तुलना में अधिक मजबूत बनी हुई है और सोना बेहतर रिटर्न दे सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग सोने को सपोर्ट दे रही है.

अभी सोना क्यों दिख रहा मजबूत?

  • सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) माना जाता है. जब दुनिया में युद्ध, आर्थिक संकट या राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं.
  • वर्तमान में अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रम और वैश्विक तनाव के कारण सोने की मांग बढ़ी हुई है. इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी लगातार सोना खरीद रहे हैं.
  • रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद लगभग दोगुनी हो चुकी है. भारत भी इस ट्रेंड में शामिल है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2024 में 72.6 टन सोना खरीदा था, जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्रीय बैंक गोल्ड खरीदार बना.
  • जनवरी 2026 तक भारत का कुल गोल्ड रिजर्व लगभग 880 टन तक पहुंच गया और विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 16.2% हो गई.

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चांदी के सामने क्या चुनौतियां हैं?

चांदी की खासियत यह है कि यह केवल कीमती मेटल ही नहीं बल्कि एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है. इसका यूज सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सेमीकंडक्टर और 5G इंफ्रास्ट्रक्चर में होता है.

हालांकि हाल के महीनों में ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में सुस्ती और इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी के कारण चांदी पर दबाव देखा गया है. यही वजह है कि निकट अवधि में चांदी का प्रदर्शन सीमित रह सकता है.

नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि में चांदी की कहानी अभी भी मजबूत है. 2026 लगातार छठा साल हो सकता है जब ग्लोबल चांदी की डिमांर सप्लाई से अधिक रहेगी.

इसके अलावा EV, सोलर एनर्जी और हाई-टेक इंडस्ट्री में बढ़ता यूज चांदी की मांग को लंबे समय तक सपोर्ट दे सकता है. चीन में भी 2026 की पहली तिमाही में चांदी की मांग आठ साल के हाई लेवल पर पहुंच गई.