“खत्म हो जाएगा भारत का IT सेक्टर!” OpenAI पर दांव लगाने वाले अरबपति निवेशक ने क्यों दी ये चेतावनी?

OpenAI के शुरुआती निवेशक विनोद खोसला ने भारतीय IT सर्विसेज इंडस्ट्री को लेकर बड़ी चेतावनी दी है. उनका कहना है कि AI एजेंट्स अगले कुछ वर्षों में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, IT सपोर्ट और BPO जैसे काम संभाल सकते हैं, जिससे पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल पर बड़ा असर पड़ सकता है.

रिलायंस और मेटा की नई साझेदारी Image Credit: Canva

OpenAI के शुरुआती दिनों में उस पर भरोसा जताने वाले दुनिया के मशहूर वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला ने भारत के आईटी (IT) सेक्टर को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और सीधी चेतावनी दी है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खोसला ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते कदम भारत के पारंपरिक आईटी सर्विस सेक्टर को पूरी तरह विस्थापित यानी खत्म कर सकते हैं. उनका मानना है कि जिस लेबर-इंटेंसिव आउटसोर्सिंग मॉडल ने भारत को दुनिया का आईटी हब बनाया, वह अब एआई एजेंट्स के आने से गंभीर खतरे में है.

पॉडकास्ट अल्फा (Podcast Alpha) पर बात करते हुए खोसला ने कहा, “भारत का आईटी सेवा उद्योग खत्म हो जाएगा”. उन्होंने साफ किया कि उनका यह बयान कोई हवा-हवाई बात या आधा-अधूरा अनुमान नहीं है, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है.

5 साल में गायब हो सकती हैं पारंपरिक सेवाएं

विनोद खोसला का यह बयान ऐसे समय आया है जब नैसकॉम (NASSCOM) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारतीय आईटी उद्योग का रेवेन्यू पहली बार 300 अरब डॉलर के पार (लगभग 315 अरब डॉलर) पहुंचने का अनुमान लगाया है, जिसमें करीब 59.5 लाख कर्मचारी काम कर रहे हैं. इसके बावजूद खोसला का दावा है कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटी सपोर्ट और बीपीओ (BPO) जैसे दोहराव वाले और कॉग्निटिव कामों को एआई एजेंट्स इंसानों से बेहतर और तेजी से संभाल लेंगे.

इससे पहले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान भी उन्होंने कहा था कि अगले 5 सालों के भीतर आईटी और बीपीओ सेवाएं लगभग पूरी तरह गायब हो सकती हैं.

पुरानी आउटसोर्सिंग छोड़ें, AI डेप्लॉयमेंट अपनाएं

सन माइक्रोसिस्टम्स के सह-संस्थापक रहे विनोद खोसला ने भारतीय इंजीनियरों को इस संकट से निकलने का रास्ता भी सुझाया है. उन्होंने कहा कि भारत के पास जो लाखों प्रतिभावान इंजीनियरों का बेस है, उसे पुराने आउटसोर्सिंग मॉडल में फंसाए रखने के बजाय बड़े पैमाने पर एआई सिस्टम बनाने और उन्हें लागू करने में लगाना चाहिए. भारत इसी टैलेंट के दम पर एआई डेप्लॉयमेंट का एक नया एक्सपोर्ट बिजनेस खड़ा कर सकता है. उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों का उदाहरण दिया, जहां बड़े पैमाने पर एआई टूल्स की जरूरत होगी.

TCS ने भी दिए धीमी नियुक्तियों के संकेत

बदलते दौर का असर अब भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दिखने लगा है. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इसी महीने कंपनी की एजीएम में स्वीकार किया कि एआई एजेंट्स के काम संभालने की वजह से अब आईटी कंपनियां धीमी रफ्तार से नई भर्तियां करेंगी.

हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों की छंटनी से इनकार किया और कहा कि भविष्य में इंसान और एआई एजेंट्स मिलकर काम करेंगे. उन्होंने कहा, “वह दिन दूर नहीं जब कंपनी के पास 5 लाख एआई एजेंट्स होंगे”. रॉयटर्स के मुताबिक, 31 मार्च को समाप्त तिमाही में टीसीएस का सालाना एआई रेवेन्यू 2.3 अरब डॉलर को पार कर गया है.

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तकनीक के बदलने की रफ्तार हैरान करने वाली

खोसला ने OpenAI का उदाहरण देते हुए समझाया कि टेक्नोलॉजी का चक्र कितनी तेजी से बदलता है. उन्होंने बताया कि जिस OpenAI का जनवरी 2023 में कोई खास रेवेन्यू नहीं था, उसी कंपनी का सालाना रेवेन्यू जनवरी 2026 तक 20 अरब डॉलर को पार कर गया है. खोसला के मुताबिक, भारतीय आईटी कंपनियों के सामने अब यह सवाल नहीं है कि एआई इस सेक्टर में आएगा या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि वे खुद को कितनी जल्दी इस बदलाव के अनुरूप ढाल पाती हैं.