भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा, FY27 में 7% ग्रोथ पर भी मंडराया जोखिम, FM ने कहा – ‘सुरक्षा कवच’ है तैयार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत के लिए महंगाई और सप्लाई शॉक का खतरा बढ़ा दिया है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और नीतिगत उपाय अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकते हैं. वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 में 7% से अधिक ग्रोथ की उम्मीद बरकरार है, हालांकि जोखिम बढ़ गए हैं.
दुनिया के नक्शे पर पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. वित्त मंत्रालय की ताजा ‘मंथली इकोनॉमिक रिव्यू’ रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित होने, महंगाई बढ़ने और व्यापारिक प्रवाह पर बुरा असर पड़ने की आशंका है. हालांकि, भारत के लिए राहत की बात यह है कि उसकी मजबूत घरेलू मांग, दमदार वित्तीय प्रणाली और सरकारी निवेश इस संकट के खिलाफ एक मजबूत ‘कवच’ का काम करेंगे.
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि भारत वित्त वर्ष 2026-27 में एक ऐसी स्थिति में प्रवेश कर रहा है, जहां एक तरफ घरेलू मजबूती है और दूसरी तरफ वैश्विक उथल-पुथल.
महंगाई और मानसून की दोहरी चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था के सामने इस समय दो बड़े जोखिम हैं:
- सप्लाई शॉक: पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा खिंचा तो ऊर्जा (तेल-गैस) और उर्वरक की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे ‘कॉस्ट-पुश’ इन्फ्लेशन यानी लागत बढ़ने वाली महंगाई का खतरा है.
- अल नीनो का असर: मौसम विभाग (IMD) ने इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने की भविष्यवाणी की है. अगर खरीफ की पैदावार कमजोर रहती है, तो खाद्य महंगाई दर पर दबाव और बढ़ेगा.
इन परिस्थितियों के कारण वित्त मंत्रालय ने माना है कि आर्थिक विकास दर (Growth) पर थोड़ा दबाव रह सकता है, जबकि महंगाई और राजकोषीय घाटा बढ़ने का जोखिम है.
सरकार का ‘एक्शन प्लान’ और ट्रेड रणनीति
लागत के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने कई मोर्चों पर तैयारी की है:
- खेती को राहत: उर्वरक उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस के आवंटन में बढ़ोतरी की गई है. साथ ही खरीफ सीजन के लिए ‘न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी’ में 12% की वृद्धि और सीमा शुल्क में छूट दी गई है.
- व्यापार में सुधार: एक्सपोर्ट-इंपोर्ट की रफ्तार बनाए रखने के लिए RELIEF स्कीम और एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम में सुधार किए गए हैं, ताकि मंजूरी की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सके.
- इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक्स: शिपिंग लागत और जोखिम को कम करने के लिए ‘भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल’ की स्थापना को मंजूरी दी गई है.
7% से अधिक विकास दर का अनुमान
चुनौतियों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत बनी हुई है. रिपोर्ट में आगामी वित्त वर्ष के लिए 7% से 7.4% के बीच विकास दर का अनुमान लगाया गया है. उल्लेखनीय है कि हालिया अनुमानों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.6% की दर से वृद्धि दर्ज की है, जो हाल के वर्षों में सबसे मजबूत प्रदर्शन है.
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संकट में अवसर तलाशता भारत
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट का सार यह है कि भारत इस वैश्विक अस्थिरता को एक अवसर में बदल सकता है.
- मजबूत बैंकिंग सेक्टर: कमर्शियल बैंकों (SCBs) और NBFCs का कैपिटल पर्याप्तता और एसेट क्वालिटी मजबूत है, जिससे वित्तीय स्थिरता को खतरा नहीं है.
- रणनीतिक स्वायत्तता: एक बहुध्रुवीय (Multipolar) दुनिया में भारत अपनी कूटनीतिक साख का इस्तेमाल नए व्यापार समझौतों और सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिए कर सकता है.
- आत्मनिर्भरता: रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ बढ़ता झुकाव और घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) क्षमता का विस्तार भारत को भविष्य के झटकों के लिए और अधिक लचीला बना रहा है.
हालांकि कच्चे तेल की कीमतें और कमजोर मानसून चिंता का विषय हैं, लेकिन भारत के पास पर्याप्त ‘पॉलिसी बफर’ और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है, जो वैश्विक आंधी में भी इसे स्थिर रखने में सक्षम हैं.
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