8th Pay Commission: OPS की वापसी से बढ़ी उम्मीद, 8वें वेतन आयोग में पेंशनर्स ने रखी बड़ी मांगें
8वें वेतन आयोग की चर्चाएं निर्णायक दौर में पहुंच रही हैं. NC-JCM ने ग्रेच्युटी बढ़ाने, पेंशन में सुधार, OROP लागू करने, छुट्टी नकदीकरण बढ़ाने और OPS बहाल करने समेत कई मांगें रखी हैं. आने वाले महीनों में इन पर चर्चा अहम होगी.
Highlights
- 8वें वेतन आयोग में पेंशन पर बढ़ी उम्मीद
- NC-JCM ने ₹75 लाख ग्रेच्युटी की मांग रखी
- OPS बहाली समेत कई मांगें आयोग तक पहुंचीं
8वां वेतन आयोग अब अपने 18 महीने के कार्यकाल के आधे से ज्यादा हिस्से को पूरा कर चुका है. नौ महीने से ज्यादा समय से कर्मचारियों और दूसरे पक्षों के साथ बातचीत और सुझाव लेने का काम चल रहा है. अब आयोग के अगले चरण में रिटायरमेंट लाभ, पेंशन में बदलाव और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सुविधाएं बड़े मुद्दे बन सकती हैं.
केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया था. इसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. आयोग के दूसरे सदस्यों में प्रोफेसर पुलक घोष और सदस्य-सचिव पंकज जैन शामिल हैं. पिछले कुछ महीनों में आयोग ने देशभर में कर्मचारी यूनियनों और संगठनों के साथ बैठकें की हैं. इन बैठकों में वेतन, भत्ते, पेंशन और नौकरी से जुड़े दूसरे मुद्दों पर सुझाव लिए गए हैं.
आयोग की अगली दौर की बैठकें गुरुवार से दिल्ली में शुरू हो रही हैं. दिल्ली में बैठकें 10 अगस्त को खत्म होने के बाद आयोग चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर में भी कर्मचारियों और दूसरे पक्षों से चर्चा करेगा. जयपुर में बैठकें 31 अगस्त और 1 सितंबर को होने वाली हैं.
इन बैठकों के दौरान नेशनल काउंसिल-JCM (NC-JCM) की ओर से दिए गए मांग-पत्र पर भी खास नजर रहेगी. इसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा, पेंशन में समानता और दूसरी सुविधाओं को बेहतर करने की कई मांगें रखी गई हैं.
NC-JCM की पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़ी प्रमुख मांगें
ग्रेच्युटी: NC-JCM चाहता है कि ग्रेच्युटी की गणना 30 दिन के बजाय 25 कार्य दिवस के आधार पर हो. 16.5 गुना की सीमा हटाई जाए और अधिकतम ग्रेच्युटी को ₹25 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख किया जाए. इसका फायदा OPS, NPS और UPS कर्मचारियों को भी मिले.
सिविल पेंशनर्स के लिए OROP: सेना की तरह सिविल पेंशनर्स के लिए भी One Rank One Pension लागू करने की मांग की गई है. साथ ही, पेंशन में बदलाव के लिए वही फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग है, जो मौजूदा कर्मचारियों के लिए तय हो.
छुट्टी का पैसा: रिटायरमेंट के समय Earned Leave के बदले मिलने वाली रकम की सीमा 600 दिन करने और Half Pay Leave के पूरे बकाया का भुगतान करने की मांग है.
पेंशन कम्यूटेशन: पेंशन के कम्यूट किए गए हिस्से को 15 साल के बजाय 11 साल बाद या 71 साल की उम्र में, जो पहले हो, बहाल करने की मांग की गई है.
पेंशन और फैमिली पेंशन: पूरी पेंशन को आखिरी वेतन का 67% करने और फैमिली पेंशन को 50% करने का प्रस्ताव है. बढ़ी हुई फैमिली पेंशन 70 साल की उम्र तक देने और 65 साल के बाद उम्र के हिसाब से ज्यादा पेंशन देने की मांग भी है.
पुराने पेंशनर्स के लिए समान लाभ: 8वें वेतन आयोग की पेंशन से जुड़ी सभी सिफारिशों का फायदा मौजूदा पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स को भी मिले. इसके लिए रिटायरमेंट की तारीख के आधार पर अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए.
अन्य सुविधाएं: पेंशनर्स के लिए HRA, LTC, केयरटेकर अलाउंस और पेंशन पर इनकम टैक्स में छूट की मांग की गई है. रेलवे में मिलने वाली रियायतें दोबारा शुरू करने और वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांग पेंशनर्स के लिए अतिरिक्त सहायता देने का भी प्रस्ताव है.
OPS, NPS और UPS: NC-JCM ने NPS और UPS को खत्म कर सभी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग की है.
अगले कुछ महीने क्यों हैं महत्वपूर्ण?
पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े NC-JCM के प्रस्तावों के अलावा अन्य कर्मचारी संगठनों की मांगों पर भी आयोग विचार करेगा. फिटमेंट फैक्टर और भत्तों के साथ पेंशन में बदलाव भी 8वें वेतन आयोग की सबसे ज्यादा चर्चा वाले मुद्दों में शामिल रह सकते हैं.
आयोग का 18 महीने का कार्यकाल पूरा होने में अब कम समय बचा है. सभी पक्षों से सुझाव लेने और उनकी समीक्षा के बाद आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करेगा. फिलहाल उम्मीद है कि आयोग मई या जून 2027 के आसपास अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप सकता है.
रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार फिटमेंट फैक्टर, भत्तों, पेंशन और रिटायरमेंट लाभ से जुड़ी सिफारिशों की समीक्षा करेगी. इसके बाद इन्हें लागू करने पर फैसला लिया जाएगा. इसलिए आने वाले कुछ महीने लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
हर 10 साल में बनता है वेतन आयोग
आमतौर पर वेतन आयोग का गठन हर 10 साल में किया जाता है. इसकी सिफारिशों से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में अगले करीब एक दशक के लिए बदलाव का रास्ता तय होता है. यही वजह है कि कर्मचारी यूनियन और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग की हर बैठक और चर्चा पर नजर बनाए हुए हैं.
इससे पहले 6वें वेतन आयोग का गठन जुलाई 2006 में जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में हुआ था. आयोग ने 1.86 के फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की थी. वहीं, फरवरी 2014 में जस्टिस अशोक कुमार माथुर की अध्यक्षता में गठित 7वें वेतन आयोग ने 2.57 के फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की थी.
अब सभी की नजर जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले 8वें वेतन आयोग पर है कि वह वेतन, पेंशन और रिटायरमेंट लाभ को लेकर क्या सिफारिशें करता है.
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