IND-UK Trade Deal: पहले 15 साल में भारत रियायती ड्यूटी पर UK की 3.78 लाख कारों के इंपोर्ट की देगा अनुमति, कोटा भी होगा लागू
इससे टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी भारतीय कंपनियों को फायदा होगा. दोनों देशों ने 15 जुलाई से CETA लागू करने की घोषणा की. कुल कोटा 15वें साल में 88,000 यूनिट के पीक पर पहुंच जाएगा और उसके बाद के साल में भी जारी रहेगा.

15 जुलाई से लागू होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत, भारत पहले 15 वर्षों में ब्रिटेन (UK) से पारंपरिक इंजन वाली पैसेंजर कारों (जिनमें आम लोगों के लिए बनी कारें भी शामिल हैं) की 3.78 लाख यूनिट तक का आयात रियायती आयात शुल्क पर करने की अनुमति देगा. व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) के तहत, ऑटोमोटिव प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट शुल्क लगभग 110 फीसदी से घटकर 10 फीसदी हो जाएगा, और दोनों तरफ कोटा भी लागू होगा.
कब शुरू होगा बिना ड्यूटी के एक्सपोर्ट?
बुधवार को जारी भारत-UK CETA दस्तावेज के अनुसार, भारत को UK के इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड/हाइड्रोजन पैसेंजर कार सेगमेंट में एंट्री मिलेगी. इसके तहत, 20,000 GBP से 80,000 GBP की कीमत वाली कारों का UK में बिना ड्यूटी के एक्सपोर्ट छठे साल से शुरू होगा. कुल कोटा 15वें साल में 88,000 यूनिट के पीक पर पहुंच जाएगा और उसके बाद के साल में भी जारी रहेगा.
इन कंपनियों को होगा फायदा
इससे टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी भारतीय कंपनियों को फायदा होगा. दोनों देशों ने 15 जुलाई से CETA लागू करने की घोषणा की.
कितना कम होगा कस्टम ड्यूटी?
UK से भारत में इंपोर्ट के लिए, तय कैटेगरी की गाड़ियों में पारंपरिक इंजन वाली पैसेंजर कारों का कोटा पांचवें साल में 37,000 यूनिट तक पहुंच जाएगा और कस्टम ड्यूटी में कटौती आखिर में 10 फीसदी तक होगी. इसके बाद ड्यूटी में और कटौती नहीं की जाएगी.
पहले साल में 3,000 cc से ज्यादा इंजन साइज वाली पैसेंजर कारों (पेट्रोल) और 2,500 cc से ज्यादा इंजन साइज वाली कारों (डीजल) के लिए कोटा 10,000 यूनिट का है, और इन पर कस्टम ड्यूटी 110 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी कर दी गई है.
कितना कोटा तय?
1,500 cc (पेट्रोल), 2,500 cc (डीजल) और 3,000 cc (पेट्रोल) इंजन साइज वाली कारों के लिए कोटा 5,000 यूनिट है, और इन पर ड्यूटी 66 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी कर दी गई है. डॉक्यूमेंट के अनुसार, 1,500 cc तक के इंजन साइज वाले मास मार्केट सेगमेंट में, समझौते के पहले साल में इंपोर्ट का कोटा 5,000 यूनिट है और कस्टम ड्यूटी 66% से घटाकर 50% कर दी गई है.
समझौते के तहत पहले साल में तीनों कैटेगरी की कुल 20,000 पैसेंजर कारों के इंपोर्ट की इजाजत होगी.
रियायती ड्यूटी
पांचवें साल में 3,000 cc (पेट्रोल) से ज्यादा और 2,500 cc (डीजल) से ज्यादा इंजन साइज वाली पैसेंजर कारों के लिए इंपोर्ट कोटा 19,000 यूनिट है, जबकि 1,500 cc (पेट्रोल), 2,500 cc (डीजल) और 3,000 cc (पेट्रोल) इंजन साइज वाली कारों के लिए इंपोर्ट कोटा 9,000 यूनिट तय किया गया है, और 1,500 cc तक के इंजन साइज वाली कारों के लिए भी 10% रियायती ड्यूटी पर ऐसा ही कोटा तय किया गया है. 15वें साल से कुल कोटा सालाना 15,000 यूनिट पर स्थिर रहेगा और तीनों कैटेगरी में ड्यूटी 10 फीसदी तय रहेगी.
सुरक्षित है EV सेगमेंट
भारत ने 40,000 GBP (CIF) से कम कीमत वाली गाड़ियों के लिए अपना बाजार नहीं खोला है. इससे मास-मार्केट EV सेगमेंट को पूरी सुरक्षा मिलेगी, जिसमें भारत मारुति सुज़ुकी के अलावा टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी अपनी कंपनियों के जरिए ग्लोबल लीडरशिप हासिल करना चाहता है.
शुरुआती पांच साल में भारत ने इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड/हाइड्रोजन-पैसेंजर कारों के लिए कोई छूट नहीं दी है, लेकिन छठे साल से, 40,000 GBP CIF से 80,000 GBP CIF (दोनों शामिल) कीमत वाली ऐसी गाड़ियों पर ड्यूटी घटाकर 50% कर दी जाएगी, जिसकी कोटा सीमा 400 यूनिट होगी. वहीं, 80,000 GBP CIF से ज्यादा कीमत वाली गाड़ियों पर ड्यूटी घटाकर 40% कर दी जाएगी, जिसकी इंपोर्ट लिमिट 4,000 यूनिट होगी.
दसवें साल में इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड/हाइड्रोजन-पैसेंजर कारों के दोनों प्राइस सेगमेंट के लिए कस्टम ड्यूटी 10% पर स्थिर हो जाएगी.
प्रेफरेंशियल कस्टम ड्यूटी
इसमें यह भी कहा गया है कि इस समझौते में दी गई किसी भी बात के बावजूद, जीरो एमिशन वाली गाड़ियां (इलेक्ट्रिक या हाइड्रोजन फ्यूल वाली गाड़ियां) – जैसे दो-पहिया वाहन, बसें या ट्रक – कस्टम ड्यूटी कम करने या खत्म करने की किसी भी प्रतिबद्धता या दायित्व से बाहर रखी गई हैं. इस समझौते के तहत भारत ऐसी किसी भी गाड़ी पर कोई प्रेफरेंशियल कस्टम ड्यूटी छूट लागू नहीं करेगा.