भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.82 अरब डॉलर घटकर 698.49 अरब डॉलर पर आया, गोल्ड रिजर्व में भी गिरावट
भारत का रिजर्व फरवरी के आखिर में 728.49 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन हाल के हफ्तों में वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते इस पर दबाव पड़ा है. पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से ही रुपये पर दबाव बढ़ा है.

भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट दर्ज की गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 24 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.82 अरब डॉलर घटकर 698.49 अरब डॉलर रह गया. रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा, विदेशी मुद्रा संपत्तियां (FCA), इस हफ्ते 2.84 अरब डॉलर घटकर 554.62 अरब डॉलर रह गईं. वहीं, सोने के भंडार में भी गिरावट आई है.
सोने का भंडार
सोने का भंडार 1.90 अरब डॉलर घटकर 120.24 अरब डॉलर हो गया, जबकि स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) 67 मिलियन डॉलर घटकर 18.77 अरब डॉलर पर आ गए.
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के साथ भारत की रिजर्व पोजीशन भी 15 मिलियन डॉलर घटकर 4.85 अरब डॉलर हो गई. 17 अप्रैल को खत्म हुए पिछले हफ्ते में देश का फॉरेक्स रिजर्व 2.3 अरब डॉलर बढ़कर 703.30 अरब डॉलर हो गया था.
फरवरी में पीक पर था रिजर्व
भारत का रिजर्व फरवरी के आखिर में 728.49 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन हाल के हफ्तों में वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते इस पर दबाव पड़ा है. इसके बाद, रुपये में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए सेंट्रल बैंक को दखल देना पड़ा. भारतीय रिजर्व बैंक फॉरेक्स बाजार पर बारीकी से नजर रखता है और किसी विशिष्ट विनिमय दर स्तर को लक्षित किए बिना, सुव्यवस्थित स्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार हस्तक्षेप करता है.
रुपये में गिरावट
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर, लगभग 95.35 रुपये पर पहुंच गया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार यह कमजोरी महज बाजार की कोई एक बार की प्रतिक्रिया नहीं है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही निकासी और मजबूत अमेरिकी डॉलर, इन सभी फैक्टर्स के मिले-जुले असर से यह मुद्रा लगातार नीचे की ओर जा रही है.
पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से ही रुपये पर दबाव बढ़ा है, और RBI डॉलर बेचकर विदेशी मुद्रा बाजार में दखल भी दिया. साथ ही, रुपये की गिरावट को रोकने के लिए उसने कुछ चौंकाने वाले नीतिगत कदम भी उठाए थे.