अब होर्मुज के भरोसे नहीं भारत! सऊदी अरब और UAE ने निकाला तोड़, तेल की जंग में बदल गया खेल
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावटों ने पूरी सप्लाई चेन को हिला दिया है. ऐसे में भारत अब नए रास्ते और नए सप्लायर तलाश रहा है. अप्रैल महीने में सऊदी अरब और UAE ने भारत को कच्चे तेल की सप्लाई में बड़ा इजाफा किया. सऊदी अरब की सप्लाई करीब 23 प्रतिशत बढ़कर 7.04 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई. वहीं UAE की सप्लाई में 191 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई.
India Oil Import Data: भारत का तेल बाजार इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावटों ने पूरी सप्लाई चेन को हिला दिया है. ऐसे में भारत अब नए रास्ते और नए सप्लायर तलाश रहा है. पहले जहां इराक, कुवैत और कतर जैसे देश बड़े सप्लायर थे, वहीं अब उनकी जगह सऊदी अरब और UAE तेजी से आगे आ रहे हैं.
खास बात यह है कि इन देशों ने नए पाइपलाइन रूट्स के जरिए सप्लाई जारी रखी है. इसके साथ ही ब्राजील, नाइजीरिया और वेनेजुएला जैसे देश भी भारत के लिए अहम बनते जा रहे हैं. इस बदलते हालात में भारत अपने तेल आयात को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है.
सऊदी अरब और UAE की बढ़ी सप्लाई
अप्रैल महीने में सऊदी अरब और UAE ने भारत को कच्चे तेल की सप्लाई में बड़ा इजाफा किया. सऊदी अरब की सप्लाई करीब 23 प्रतिशत बढ़कर 7.04 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई. वहीं UAE की सप्लाई में 191 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई और यह 5.91 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई. यह बढ़ोतरी इसलिए संभव हो पाई क्योंकि दोनों देशों ने नए रास्तों का इस्तेमाल किया.
होर्मुज स्ट्रेट में दिक्कतों के कारण सऊदी अरब ने अपने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल को रेड सी के यानबू पोर्ट तक भेजा. वहीं UAE ने ADCOP पाइपलाइन के जरिए फुजैरा पोर्ट से सप्लाई जारी रखी. इन नए रास्तों ने सप्लाई को बाधित होने से बचाया.
इराक और अन्य देशों की सप्लाई शून्य
अप्रैल में इराक, कुवैत और कतर जैसे देशों से भारत को तेल की सप्लाई लगभग बंद हो गई. इराक की सप्लाई पहले ही घटकर मार्च में 2.35 लाख बैरल रह गई थी और अप्रैल में यह पूरी तरह खत्म हो गई. इससे भारत को नए विकल्प तलाशने पड़े. भारत ने ब्राजील और नाइजीरिया से तेल खरीद बढ़ा दी है.
ब्राजील से आयात बढ़कर 2.75 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया. वहीं नाइजीरिया से आयात करीब 2.21 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया. वेनेजुएला से भी करीब एक साल बाद फिर से आयात शुरू हुआ, जो 2.98 लाख बैरल प्रतिदिन रहा.
| देश / कंपनी | मार्च (बैरल प्रतिदिन) | अप्रैल (बैरल प्रतिदिन) |
|---|---|---|
| सऊदी अरब | 5,72,000 | 7,04,000 |
| यूएई | 2,03,000 | 5,91,000 |
| रूस | 19,80,000 | 15,60,000 |
| इराक | 2,35,000 | 0 |
| ब्राजील | 1,37,000 | 2,75,000 |
| नाइजीरिया | 1,25,000 | 2,21,000 |
| वेनेजुएला | 0 | 2,98,000 |
| अमेरिका | 1,64,000 | 1,04,000 |
| ईरान | 0 | 1,37,000 |
रूस से आयात में गिरावट
रूस से तेल आयात में अप्रैल में करीब 21 प्रतिशत की गिरावट आई. यह 19.8 लाख बैरल से घटकर 15.6 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. इसका कारण कुछ रिफाइनरियों में मेंटेनेंस और रूस के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को माना जा रहा है. हालांकि आगे रूस से सप्लाई फिर बढ़ने की उम्मीद है.
रिफाइनरियों में बदलाव साफ
इंडियन ऑयल सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसने अप्रैल में 6.77 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2.35 लाख बैरल प्रतिदिन आयात किया. भारत पेट्रोलियम की खरीद में 38 प्रतिशत की गिरावट आई. वहीं नायरा एनर्जी की खरीद 90 प्रतिशत से ज्यादा गिर गई.
| कंपनी | अप्रैल (बैरल प्रतिदिन) |
|---|---|
| Indian Oil Corporation | 6,77,000 |
| Reliance Industries | 2,35,000 |
| Bharat Petroleum | 1,76,000 |
| Nayara Energy | 25,000 |
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