अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हम प्रतिबद्ध, अमेरिकी 100% टैरिफ बिल पर भारत ने साफ किया रुख

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार 1.4 अरब लोगों के लिए एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. यह कानून उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की इजाजत देता है जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप. Image Credit: X

भारत ने गुरुवार को कहा कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. यह बयान US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास किए जाने के बाद आया है. इस बिल के तहत भारत और चीन जैसे देशों पर रूसी तेल और गैस खरीदने के लिए 100 फीसदी तक का टैरिफ लगाया जाएगा.

भारत का रुख स्पष्ट

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार 1.4 अरब लोगों के लिए एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. इसलिए अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा हासिल करके तथा बाजार की बदलती स्थितियों के आधार पर इसे हासिल करने की कोशिश जारी रखेगी.

अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा भारत

मंत्रालय ने कहा कि हाल के महीनों में अमेरिका के अलग-अलग अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर ऊंचे स्तर पर बातचीत हुई है. भारत ने साफ तौर पर बताया है कि इस कानून का दोनों देशों के रिश्तों और अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्केट पर क्या असर पड़ सकता है.

मंत्रालय ने कहा, ‘भारत ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.’ साथ ही, मंत्रालय ने कहा कि वह अमेरिका के इस कदम के असर से निपटने के लिए व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा.

अमेरिकी हाउस में पास हुआ बिल

बुधवार को अमेरिकी हाउस ने 262-159 वोटों से यह कानून पास कर दिया. इस कानून का आधिकारिक नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है.

यह कानून उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की इजाजत देता है जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं. हाउस में हुई बहस के दौरान भारत और चीन को खास तौर पर बड़े खरीदारों के तौर पर पहचाना गया, जिन पर इसका असर पड़ सकता है.

यह बिल पिछले महीने ही अमेरिकी सीनेट से 86-11 वोटों से पास हो चुका है और अब यह व्हाइट हाउस जाएगा, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस पर साइन करके इसे कानून बनाने की उम्मीद है.

कानून का क्या है मकसद?

इस कानून का मकसद यूक्रेन में युद्ध को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है. इसके लिए रूस के एनर्जी और डिफेंस सेक्टर के साथ-साथ उसके तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ (टैंकरों का गुप्त बेड़ा) को निशाना बनाया जाएगा, जिन पर मॉस्को को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है. इसमें ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी है.

इस बिल का भारत पर क्या असर हो सकता है?

इस कानून में भारत का नाम शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि भारतीय सामान पर 100% टैरिफ लगा दिया गया है. इसके बजाय, अगर संबंधित प्रावधान लागू होते हैं, तो यह बिल ट्रंप को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देगा जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं.

यह प्रावधान भारत के लिए इसलिए भी अहम है, क्योंकि वह रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार बना हुआ है. यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की पाबंदियों ने जब ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के तरीकों को बदला, तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल और भी जरूरी हो गया.

अमेरिका ने रूसी एनर्जी खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश की है. उसका तर्क है कि तेल और गैस से होने वाली कमाई मॉस्को को युद्ध के लिए फंड का एक अहम जरिया देती है.

अगर वॉशिंगटन इस कानून के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करता है, तो इसका असर मुख्य रूप से अमेरिका को होने वाले भारतीय एक्सपोर्ट पर पड़ेगा.

100% तक का टैरिफ अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की लागत को तेजी से बढ़ा सकता है, जिससे उनकी कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धा क्षमता) पर असर पड़ सकता है.

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