सऊदी अरामको ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए रोकी तेल की सप्लाई, बढ़ती कीमतें और ढुलाई का खर्च बढ़ाएगा परेशानी

रामको ने रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, दोनों रास्तों से देश को होने वाली सभी सप्लाई रोक दी है. पाइपलाइन पर हमले से पहले ही होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई बहुत कम हो गई थी. सऊदी अरब लंबे समय से दुनिया के सबसे प्रभावशाली तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक रहा है.

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Highlights

  • ढुलाई का ज्यादा खर्च भारतीय रिफाइनरियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है.
  • अरामको ने रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से देश को होने वाली सप्लाई रोक दी.
  • टैंकर रेट पहले से ही रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब हैं, जिससे खरीद की लागत बढ़ी.

सऊदी अरामको ने भारतीय रिफाइनरियों को सूचित किया है कि अपनी अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमलों के बाद, अगले आदेश तक वह उन्हें कच्चे तेल की सप्लाई नहीं करेगा. ईटी के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि हालांकि तेल के दूसरे स्रोत (रिप्लेसमेंट बैरल) ढूंढना मुश्किल नहीं होगा, लेकिन बढ़ती कीमतें और ढुलाई का ज्यादा खर्च भारतीय रिफाइनरियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है.

मुख्य वैकल्पिक रास्ता थी पाइपलाइन

यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के समुद्री रास्ते में रुकावट आने के बाद से सऊदी अरब के लिए कच्चे तेल की सप्लाई का मुख्य वैकल्पिक रास्ता थी. इसे पिछले हफ्ते के आखिर में इराकी मिलिशिया के ड्रोन हमलों के बाद बंद कर दिया गया था. तब से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. बुधवार को ब्रेंट फ्यूचर्स की ट्रेडिंग लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल पर हो रही थी.

ट्रेडर्स को स्पॉट कार्गो बेचे गए

जानकारों के मुताबिक, अरामको ने रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, दोनों रास्तों से देश को होने वाली सभी सप्लाई रोक दी है. पाइपलाइन पर हमले से पहले ही होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई बहुत कम हो गई थी. अरामको ने युद्ध शुरू होने के बाद से भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 9% हिस्सा सप्लाई किया है.

भारत तक कैसे पहुंचेगा तेल?

हालांकि, जानकारों का कहना है कि सऊदी अरब ने ट्रेडर्स को कुछ स्पॉट कार्गो बेचे हैं, जिनसे उम्मीद है कि वे होर्मुज के रास्ते भारतीय रिफाइनर्स को कम मात्रा में तेल पहुंचाएंगे. जोखिम लेने वाले ट्रेडर्स शायद उसी तरीके का इस्तेमाल करेंगे जो उन्होंने हाल के हफ्तों में किया है.

ट्रेडर्स भारी छूट पर इराकी कच्चा तेल खरीदते हैं और उसे स्ट्रेट से गल्फ ऑफ ओमान तक ले जाते हैं, जहां वे कार्गो को एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर करते हैं ताकि उसे भारतीय और अन्य ग्राहकों तक पहुंचाया जा सके.

चुकानी होगी अधिक कीमत

आमतौर पर अरामको स्पॉट मार्केट में कच्चा तेल नहीं बेचती है. यह भारत और अन्य ग्राहकों को सालाना टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत आधिकारिक बिक्री कीमतों पर सप्लाई करती है. भारत को अभी सऊदी अरब से अपने तय टर्म कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार सप्लाई नहीं मिल रही है.

जानकारों का कहना है कि भारतीय रिफाइनर्स को वैकल्पिक तेल मिलने का भरोसा है, लेकिन उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी होगी क्योंकि तेल के बेंचमार्क बढ़ गए हैं और रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट खत्म हो गई है. सप्लाई में रुकावट के दौरान स्पॉट-मार्केट की कीमतें फ्यूचर्स की कीमतों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ सकती हैं.

तेल की कीमतों पर दबाव

जानकारों ने चेतावनी दी है कि सऊदी सप्लाई की जगह दूसरी सप्लाई लेने पर रिफाइनर्स को कच्चे तेल की अधिक लागत और फ्रेट रेट का सामना करना पड़ सकता है. टैंकर रेट पहले से ही रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब हैं, जिससे खरीद की लागत बढ़ रही है, जबकि दुनिया भर में तेल का स्टॉक कम होने से तेल की कीमतों पर और ऊपर जाने का दबाव बन रहा है.

इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोखिम

भारतीय रिफाइनरी अधिकारियों को यह भी चिंता है कि सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूतियों के बीच संघर्ष बढ़ सकता है, जिससे एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जोखिम बढ़ सकता है और सप्लाई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है.

तेल बाजार में बढ़ सकती है अनिश्चितता

सऊदी अरब लंबे समय से दुनिया के सबसे प्रभावशाली तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक रहा है, जिसकी वैश्विक उत्पादन क्षमता का लगभग दसवां हिस्सा है और जिसमें बाजार की स्थितियों के अनुसार उत्पादन को एडजस्ट करने की क्षमता है. सऊदी कच्चे तेल को लंबे समय तक वैश्विक बाजार से दूर रखने से तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है. खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्टॉक पहले से ही कम है.

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