Tata Sons की बोर्ड मीटिंग आज, IPO से लेकर चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी तक कई सवालों के मिलेंगे जवाब

Tata Sons के बोर्ड की आज होने वाली मीटिंग में IPO, लिस्टिंग और चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. RBI की ओर से Tata Sons के डीरजिस्ट्रेशन आवेदन को खारिज किए जाने के बाद लिस्टिंग का मुद्दा फिर चर्चा में है.

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Highlights

  • RBI के फैसले के बाद Tata Sons की लिस्टिंग और IPO पर बोर्ड मीटिंग में अहम चर्चा हो सकती है.
  • N Chandrasekaran के फरवरी 2027 में कार्यकाल खत्म होने के बाद नए चेयरमैन के चयन का मुद्दा भी अहम रहेगा.
  • Tata Trusts और Shapoorji Pallonji Group के अलग-अलग रुख के बीच Tata Sons की आगे की रणनीति पर नजर रहेगी.

Tata Sons के बोर्ड की आज होने वाली मीटिंग कंपनी के लिए कई अहम मुद्दों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है. एक तरफ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI की ओर से Tata Sons को अपर लेयर NBFC के तौर पर लिस्टिंग की जरूरत से राहत देने वाले आवेदन को खारिज किया जा चुका है. वहीं दूसरी तरफ चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए आगे नहीं बढ़ने की इच्छा जताई है. इसके अलावा Tata Trusts के भीतर भी Tata Sons की लिस्टिंग और लीडरशिप को लेकर मतभेद सामने आए हैं.

मीटिंग में मुख्य तौर पर दो बड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है. पहला, RBI के 11 सितंबर के फैसले के बाद Tata Sons की अगली रणनीति क्या होगी और दूसरा, चंद्रशेखरन के बाद कंपनी के अगले चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी.

RBI के फैसले के बाद लिस्टिंग का मुद्दा फिर चर्चा में

RBI ने सितंबर 2022 में Tata Sons को अपर लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत किया था. इस वर्गीकरण के तहत कंपनी पर निर्धारित समयसीमा में स्टॉक एक्सचेंज लिस्टिंग की जरूरत लागू हुई थी. इसके बाद Tata Sons ने मार्च 2024 में अपना कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी रजिस्ट्रेशन समाप्त करने के लिए RBI के पास आवेदन किया था.

कंपनी ने यह कदम अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के बाद उठाया था. Tata Sons ने 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया था. कंपनी का उद्देश्य रजिस्ट्रेशन से बाहर निकलकर उस लिस्टिंग रिक्वायरमेंट से बचना था, जो अपर लेयर NBFC पर लागू होती है.

हालांकि, RBI ने इस आवेदन को खारिज कर दिया. इसके बाद Tata Sons के सामने लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख हो गया है. अब बोर्ड के सामने यह तय करने की चुनौती है कि RBI के फैसले पर रिकंसिडरेशन का अनुरोध किया जाए, उसके फैसले की वजहों पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगा जाए या आगे लीगल एक्शन की तैयारी की जाए.

Tata Trusts और शापूरजी पालोनजी ग्रुप के अलग-अलग रुख

Tata Sons में Tata Trusts की हिस्सेदारी करीब 66% है. Trusts की ओर से कंपनी की लिस्टिंग का विरोध किया जाता रहा है. दूसरी तरफ शापूरजी पालोनजी ग्रुप की Tata Sons में करीब 18% हिस्सेदारी है और वह लिस्टिंग के पक्ष में है. उसके लिए स्टॉक मार्केट लिस्टिंग से हिस्सेदारी में लिक्विडिटी हासिल करने का रास्ता खुल सकता है.

लिस्टिंग को लेकर Tata Trusts के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आई है. Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा लिस्टिंग के विरोध में हैं, जबकि ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन इसके समर्थन में बताए जाते हैं.

चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी का सवाल

Tata Sons के बोर्ड के सामने दूसरा बड़ा सवाल चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी का है. चंद्रशेखरन ने अगस्त में डायरेक्टर्स को बताया था कि वह फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए आगे नहीं बढ़ना चाहते हैं. हालांकि, उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आसान नहीं है.

Tata Sons के आर्टिकल्स के अनुसार चेयरमैन सिलेक्शन कमेटी में पांच सदस्य होते हैं. इसमें तीन सदस्यों का संयुक्त नामांकन सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट से होना जरूरी है. इसके अलावा Tata Sons बोर्ड एक सदस्य को नॉमिनेट करता है और एक इंडिपेंडेंट आउटसाइडर का चयन किया जाता है.

फिलहाल सर रतन टाटा ट्रस्ट के सामने ट्रस्टी मीटिंग्स बुलाने से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया चल रही है. महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष चल रही कार्यवाही के कारण ट्रस्ट की मीटिंग आयोजित करने में दिक्कत है. ऐसे में चेयरमैन सिलेक्शन कमेटी के लिए जरूरी संयुक्त नामांकन में देरी हो सकती है.

चंद्रशेखरन को जारी रखने की मांग संभव

इस बीच Tata Sons की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी की ओर से चंद्रशेखरन को अपने पद पर बने रहने के लिए मनाने की सिफारिश किए जाने की संभावना जताई जा रही है. बोर्ड के कुछ सदस्य यह तर्क दे सकते हैं कि RBI के फैसले, संभावित लिस्टिंग और गवर्नेंस से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के बीच लीडरशिप में निरंतरता जरूरी है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि चंद्रशेखरन अपने निर्णय पर पुनर्विचार करेंगे या नहीं.

प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म ने लिस्टिंग प्रक्रिया शुरू करने की मांग की

प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म इनगवर्न ने बुधवार को Tata Sons बोर्ड से लिस्टिंग प्रक्रिया शुरू करने की मांग की. फर्म के मुताबिक, Tata Sons अब एक प्राइवेट और क्लोजली हेल्ड होल्डिंग कंपनी के पुराने गवर्नेंस मॉडल से आगे निकल चुकी है. इनगवर्न ने बोर्ड से RBI के फैसले पर लीगल और रेगुलेटरी एडवाइस लेने, लिस्टिंग का टाइमटेबल तैयार करने, लीगल और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग एडवाइजर्स नियुक्त करने तथा Tata Trusts के स्पेशल राइट्स पर स्पष्टता लाने की बात कही है.

इसके अलावा फर्म ने Tata Sons की कॉम्प्रिहेंसिव वैल्यूएशन, कैपिटलाइजेशन और रिस्ट्रक्चरिंग प्लान तैयार करने तथा RBI, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI और स्टॉक एक्सचेंजेज के साथ बातचीत करने की सिफारिश की है.

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