अब प्राइवेट कंपनियां भी बनाएंगी मिसाइल! Astra Mark 2 से होगी नई शुरुआत; सरकार लेने जा रही बड़ा फैसला
केंद्र सरकार डिफेंस सेक्टर में बड़ा सुधार करने जा रही है. सरकार जल्द ही प्राइवेट कंपनियों को मिसाइल मैन्युफैक्चिरिंग की अनुमति दे सकती है. सबसे पहले DRDO की Astra Mark 2 मिसाइल के प्रोडक्शन के लिए प्राइवेट कंपनियों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे. इसका उद्देश्य भारतीय सेना की बढ़ती जरूरतों और डिफेंस एक्सपोर्ट की मांग को पूरा करना है.

Defence Sector: सरकार डिफेंस प्रोडक्शन सेक्टर में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. केंद्र सरकार जल्द ही प्राइवेट कंपनियों को मिसाइल मैन्युफैक्चिरिंग की अनुमति दे सकती है. इसके तहत सबसे पहले DRDO की Astra Mark 2 मिसाइल के प्रोडक्शन के लिए प्राइवेट कंपनियों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे. सरकार का उद्देश्य घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ- साथ डिफेंस एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा देना है. इस कदम से भारत के डिफेंस विमैन्युफैक्चिरिंग सेक्टर को नई तेजी मिलने की उम्मीद है.
Astra Mark 2 के लिए जारी होगा प्रस्ताव
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, डिफेंस मिनिस्ट्री जल्द ही Astra Mark 2 मिसाइल के मैन्युफैक्चिरिंग के लिए प्राइवेट भारतीय कंपनियों से प्रस्ताव मांगेगा. इस प्रक्रिया में ICOMM, Adani Group, Bharat Forge, Tata Group और Mahindra Group जैसी कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं. अब तक मिसाइल मैन्युफैक्चिरिंग का काम मुख्य रूप से सरकारी डिफेंस कंपनियों के पास था.
क्यों लिया जा रहा है यह फैसला
सरकार ने यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों और मित्र देशों की बढ़ती मांग को देखते हुए उठा सकती है. सरकारी कंपनी Bharat Dynamics Limited अकेले सभी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है. इंडोनेशिया ने भी Astra मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है. ऐसे में सरकार प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है.
Astra Mark 2 की क्या है खासियत
DRDO द्वारा डेवलप Astra Mark 2 एक बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 180 से 200 किलोमीटर तक है. इसे चीन की PL 15E लंबी दूरी की मिसाइल का मुकाबला करने के लिए तैयार किया गया है. इस मिसाइल को Tejas Mark 1A, MiG 29, Su 30 MKI और Rafale Marine जैसे लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा.
यह भी पढ़ें- भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए 10 बड़े समझौते, जानें किस सेक्टर में क्या हुई डील
Pralay मिसाइल भी हो सकती है शामिल
रिपोर्ट के अनुसार Astra Mark 2 के बाद Pralay टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल के विकास और प्रोडक्शन में भी प्राइवेट कंपनियों को शामिल किया जा सकता है. करीब 500 किलोमीटर रेंज वाली यह मिसाइल ध्वनि की स्पीड से छह गुना तेज उड़ान भर सकती है. यह भारत की आधुनिक रॉकेट फोर्स का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है.
एयर डिफेंस को भी मिलेगी मजबूती
सरकार मिसाइल प्रोडक्शन के साथ- साथ देश की एयर डिफेंस क्षमता भी बढ़ा रही है. भारत और इजरायल मिलकर लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल विकसित कर रहे हैं. वहीं रूस से पांचवां S 400 एयर डिफेंस सिस्टम नवंबर तक मिलने की उम्मीद है.