13 जुलाई से स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के दौरे पर रहेंगे पीयूष गोयल, ट्रेड बढ़ाने की रणनीति पर होगी चर्चा

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 13 जुलाई से स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के पांच दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इस दौरान ट्रेड और इन्वेस्टमेंट बढ़ाने, नई कारोबारी साझेदारियों को मजबूत करने और भारत-EU आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी.

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल Image Credit: Piyush Goyal youtube

Piyush Goyal: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस सप्ताह स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के पांच दिवसीय दौरे पर जाएंगे. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और इन तीनों यूरोपीय देशों के बीच ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देना, नई कारोबारी साझेदारियों की संभावनाएं तलाशना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है. वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरे में मंत्री के साथ विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख भारतीय कंपनियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा.

इन सेक्टर्स की कंपनियां होंगी शामिल

प्रतिनिधिमंडल में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजीज, जेम्स एंड ज्वेलरी, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर और डिजाइन जैसे क्षेत्रों से जुड़ी भारतीय कंपनियां शामिल हैं. सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ने से भारत में निवेश और तकनीकी साझेदारी को नई गति मिल सकती है.

स्पेन में बिजनेस अवसरों पर होगी चर्चा

पीयूष गोयल 13 जुलाई को स्पेन पहुंचेंगे, जहां वह इंडिया-स्पेन बिजनेस राउंडटेबल में हिस्सा लेंगे. इस बैठक में भारत और स्पेन के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल होंगे. बैठक के दौरान ऑटोमोटिव, रिन्यूएबल एनर्जी, रेलवेज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर्स, फूड प्रोसेसिंग और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में निवेश और कारोबारी अवसरों पर चर्चा होगी.

स्पेन की कई बड़ी कंपनियां पहले से ही भारत में सक्रिय हैं. इनमें Iberdrola, Acciona, CAF, Talgo, Gestamp और Indra जैसी कंपनियां शामिल हैं. वहीं, भारतीय कंपनियां TCS, Infosys, Wipro, Tech Mahindra और L&T भी स्पेन में अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं. ऐसे में यह बैठक दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है.

बेल्जियम में बड़े उद्योगपतियों से मुलाकात

14 और 15 जुलाई को पीयूष गोयल बेल्जियम में रहेंगे. इस दौरान वह Thales Group के एलेन क्यूवरिन और Silox Group के जीन-क्रिस्टोफ बोगार्ट के साथ सीईओ-लेवल मीटिंग्स करेंगे. थेल्स ग्रुप एयरोस्पेस, डिफेंस, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल आइडेंटिटी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर की कंपनी है और भारत में कई परियोजनाओं में भागीदारी कर रही है. वहीं, सिलॉक्स ग्रुप स्पेशलिटी केमिकल्स और रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में काम करती है.

कंपनी की गुजरात में भी महत्वपूर्ण मौजूदगी है और वह बैटरी रीसाइक्लिंग तथा सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. इसी दौरान इंडिया-EU बिजनेस राउंडटेबल और ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की बैठक भी आयोजित होगी. इसमें फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI), ट्रेड फैसिलिटेशन, सस्टेनेबल टेक्नोलॉजीज और मजबूत सप्लाई चेन्स जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.

इंडिया-EU ट्रेड मीटिंग में भी होगी भागीदारी

ब्रुसेल्स में पीयूष गोयल तीसरी इंडिया-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल मिनिस्टीरियल मीटिंग की सह-अध्यक्षता करेंगे. इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी शामिल होंगे. इंडिया-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) भारत और EU के बीच ट्रेड, ट्रस्टेड टेक्नोलॉजी और इकोनॉमिक सिक्योरिटी के क्षेत्र में सहयोग के लिए सर्वोच्च संस्थागत मंच माना जाता है. इस बैठक में दोनों पक्ष व्यापार और प्रौद्योगिकी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर आगे की रणनीति तय करेंगे.

फिनलैंड में क्लीन एनर्जी और डिजिटलाइजेशन पर फोकस

पीयूष गोयल 16 और 17 जुलाई को फिनलैंड का दौरा करेंगे. यहां वह इंडिया-फिनलैंड बिजनेस राउंडटेबल में हिस्सा लेंगे और फिनलैंड की प्रमुख कंपनियों के साथ बैठक करेंगे. इन बैठकों में डिजिटलाइजेशन, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होगी. भारत और फिनलैंड इन क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग और निवेश बढ़ाने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं.

FTA के लिहाज से अहम दौरा

पीयूष गोयल का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और 27 देशों वाले EU के बीच FTA को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. दोनों पक्ष अब समझौते के कानूनी मसौदे की लीगल समीक्षा कर रहे हैं. ऐसे में यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने तथा निवेश के नए अवसर पैदा करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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