भारत-रूस का 100 अरब डॉलर का खेल! इन 7 सेक्टर्स में आएगा बड़ा उछाल
भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इससे फार्मा, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग, केमिकल, टेक्सटाइल, कृषि और ऊर्जा जैसे भारतीय सेक्टर्स को नए निर्यात और निवेश अवसर मिल सकते हैं.

भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. मौजूदा व्यापार को देखते हुए यह लक्ष्य बड़ा है, लेकिन दोनों देश अब सिर्फ कच्चे तेल और ऊर्जा पर निर्भर रहने के बजाय व्यापार को दूसरे क्षेत्रों में भी फैलाने की तैयारी कर रहे हैं. भारत के लिए सबसे बड़ा फोकस रूस को अपने निर्यात को बढ़ाना और मौजूदा व्यापार घाटे को कम करना है.
अभी भारत-रूस व्यापार की स्थिति क्या है?
वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 68.7 अरब डॉलर रहा. इसमें भारत का रूस को निर्यात सिर्फ 4.9 अरब डॉलर था, जबकि रूस से भारत ने करीब 63.8 अरब डॉलर का सामान आयात किया. भारत के आयात में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, कोकिंग कोल, सूरजमुखी तेल और कीमती धातुएं प्रमुख हैं. यानी 100 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सिर्फ रूस से आयात बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा. भारत को अपने निर्यात में भी बड़ा इजाफा करना होगा.
फार्मा कंपनियों के लिए बड़ा बाजार
फार्मास्यूटिकल सेक्टर भारत के लिए सबसे अहम अवसरों में शामिल है. भारत पहले से रूस को दवाओं का निर्यात करता है. सरकार का मानना है कि रूस में भारतीय दवाओं की मांग बढ़ाई जा सकती है. इससे भारतीय फार्मा कंपनियों को नए बाजार और लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट मिल सकते हैं.
ऑटो और ऑटो पार्ट्स में बढ़ सकती है डिमांड
ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर और ट्रैक्टर पार्ट्स भी संभावित बड़े सेक्टर हैं. रूस में भारतीय कंपनियां सिर्फ तैयार वाहन ही नहीं, बल्कि कंपोनेंट्स और इंजीनियरिंग उत्पादों की सप्लाई बढ़ा सकती हैं. इससे ऑटो पार्ट्स बनाने वाली भारतीय कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट का नया अवसर बन सकता है.
इंजीनियरिंग, केमिकल और टेक्सटाइल सेक्टर को फायदा
भारत सरकार ने इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल और औद्योगिक कंपोनेंट्स को भी रूस के बाजार में विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया है. भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और रूस की आयात जरूरतों के बीच तालमेल बढ़ने से इन सेक्टरों का निर्यात बढ़ सकता है.
कृषि और फूड सेक्टर में भी बड़ा अवसर
रूस में भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है. हाल में भारत से रूस को मांस और खाद्य उत्पादों के निर्यात में तेजी देखने को मिली है. मछली और समुद्री उत्पाद, सब्जियां, चाय, कॉफी, मसाले और मिलिंग इंडस्ट्री के उत्पाद भी संभावित निर्यात क्षेत्र हैं.
एनर्जी के साथ न्यूक्लियर और निवेश पर जोर
ऊर्जा क्षेत्र भारत-रूस संबंधों का मजबूत आधार बना रहेगा. इसके अलावा दोनों देश न्यूक्लियर एनर्जी, माइनिंग, रेलवे, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और नई तकनीकों में निवेश बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं. भारत में रूसी कंपनियों के लिए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में निवेश के अवसर भी बढ़ रहे हैं.
क्रिटिकल मिनरल्स और नई टेक्नोलॉजी पर नजर
आने वाले वर्षों में व्यापार सिर्फ पारंपरिक वस्तुओं तक सीमित नहीं रहेगा. क्रिटिकल मिनरल्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है. दोनों देशों के बीच निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी काम हो रहा है.
भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा क्या?
100 अरब डॉलर का लक्ष्य पूरा होने पर सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत-रूस व्यापार अधिक संतुलित और विविध हो सकेगा. अभी भारत रूस से जितना आयात करता है, उसके मुकाबले निर्यात काफी कम है. फार्मा, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग, केमिकल, टेक्सटाइल, कृषि और समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ाना इस अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार के साथ 50 अरब डॉलर के दोतरफा निवेश को भी बढ़ावा देना है.
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