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8th Pay Commission में पुराने पेंशनरों को मिलेगा फायदा? ToR पर क्यों मचा बवाल

8वें वेतन आयोग के तहत पुराने पेंशनरों की पेंशन संशोधन को लेकर असमंजस बना हुआ है. पेंशनर संगठनों ने सरकार से ToR में बदलाव कर 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों और फैमिली पेंशनरों को स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग की है.

8वां वेतन आयोग

Highlights

  • पुराने पेंशनरों को ToR में स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग
  • करीब 69 लाख पेंशनरों और फैमिली पेंशनरों में असमंजस
  • 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट मई 2027 तक आने की उम्मीद

8th Pay Commission को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनरों की नजर भी इसकी सिफारिशों पर है. खासतौर पर वे कर्मचारी और फैमिली पेंशनर्स चिंतित हैं, जो 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हो चुके हैं. पेंशनर संगठनों का कहना है कि आयोग के Terms of Reference यानी ToR में पुराने पेंशनरों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए. इसी मांग को लेकर Retired Employees Welfare Association (REWA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है.

ToR में क्या है और विवाद क्यों?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के ToR के एक प्रावधान में पेंशन और Death-cum-Retirement Gratuity की समीक्षा की बात कही गई है. लेकिन पेंशनर संगठनों का कहना है कि इसमें 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों और फैमिली पेंशनरों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है.

REWA के मुताबिक इससे करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स में असमंजस पैदा हो रहा है. संगठन चाहता है कि सरकार ToR में संशोधन करके साफ करे कि पुराने पेंशनरों की पेंशन और फैमिली पेंशन की भी समीक्षा होगी.

पुराने पेंशनरों को किस बात का डर?

पेंशनर संगठनों को आशंका है कि अगर पुराने पेंशनरों को आयोग के दायरे में स्पष्ट रूप से नहीं रखा गया, तो भविष्य में पेंशन संशोधन को लेकर परेशानी हो सकती है. उनका कहना है कि पिछली वेतन आयोगों के ToR में पुराने पेंशनरों का उल्लेख ज्यादा स्पष्ट तरीके से किया गया था. इसी वजह से संगठन चाहते हैं कि सरकार सिर्फ स्पष्टीकरण देने के बजाय ToR में औपचारिक बदलाव करे.

पेंशन में समानता भी बड़ी मांग

पेंशनर संगठनों की दूसरी बड़ी मांग पेंशन पैरिटी की है. यानी 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनरों और नई व्यवस्था में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के बीच पेंशन में अनुचित अंतर नहीं होना चाहिए.

इसके अलावा संगठनों ने ToR में इस्तेमाल किए गए ‘unfunded cost of non-contributory pension schemes’ जैसे शब्दों पर भी आपत्ति जताई है. उनका तर्क है कि पेंशन को केवल सरकारी खर्च या वित्तीय बोझ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

मई 2027 तक आ सकती है रिपोर्ट

8वां केंद्रीय वेतन आयोग नवंबर 2025 में गठित हुआ था. आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. इस हिसाब से रिपोर्ट मई 2027 के आसपास आ सकती है.

हालांकि, आयोग की सिफारिशें अपने आप लागू नहीं होंगी. रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार को इन्हें स्वीकार करने और लागू करने पर फैसला लेना होगा. फिलहाल सरकार ने पुराने पेंशनरों को ToR में स्पष्ट रूप से शामिल करने के लिए किसी संशोधन की घोषणा नहीं की है.

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