8वां वेतन आयोग
भारत में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन ढांचे में बदलाव के लिए केंद्र सरकार समय-समय पर वेतन आयोग का गठन करती है. अब करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर 8वें वेतन आयोग पर टिकी है.माना जा रहा है कि इसकी सिफारिशों से बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैक्टर, डीए और पेंशन में बड़ा बदलाव हो सकता है. 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये की गई थी. वहीं फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था.अब कर्मचारी संगठनों की मांग है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.0 से 3.68 तक किया जाए, ताकि महंगाई के असर को संतुलित किया जा सके। यदि ऐसा होता है तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के बीच नए वेतन ढांचे को लेकर उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं.
सरकार ने 3 नवंबर 2025 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर इस आयोग का गठन कर दिया था. इसके बाद अब आयोग कर्मचारियों, यूनियनों, पेंशनर्स और अलग-अलग मंत्रालयों से सुझाव लेने की प्रक्रिया में जुटा है. आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इन्हीं चर्चाओं के आधार पर कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बदलाव की तस्वीर तय होगी.
आयोग ने कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है. माना जा रहा है कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है.
हर किसी की नजर इस बात पर है कि नई वेतन आयोग की सिफारिशों में सैलरी कितनी बढ़ेगी. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सरकारी कर्मचारियों की सैलरी सिर्फ महंगाई भत्ता या फिटमेंट फैक्टर से तय नहीं होती. इसके पीछे एक और बड़ा फॉर्मूला काम करता है, जिसे “फैमिली यूनिट” कहा जाता है.