जून में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हुआ, 40.41 अरब डॉलर पर आया एक्सपोर्ट
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में सामान का एक्सपोर्ट पिछले महीने के 45.2 अरब डॉलर से घटकर 40.41 अरब डॉलर हो गया, जबकि इंपोर्ट 73.41 अरब डॉलर के मुकाबले घटकर 70.84 अरब डॉलर रह गया.

जून में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो मई में 28.21 अरब डॉलर था. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस महीने में एक्सपोर्ट के मुकाबले इंपोर्ट अधिक रहा. रॉयटर्स के एक पोल के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि जून में ट्रेड डेफिसिट 26.63 अरब डॉलर रहेगा, जबकि पिछले महीने यह 28.21 अरब डॉलर था.
एक्सपोर्ट कितना घटा?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में सामान का एक्सपोर्ट पिछले महीने के 45.2 अरब डॉलर से घटकर 40.41 अरब डॉलर हो गया, जबकि इंपोर्ट 73.41 अरब डॉलर के मुकाबले घटकर 70.84 अरब डॉलर रह गया.
यह डेटा दिखाता है कि भारत पर एक्सपोर्ट बनाए रखने और इंपोर्ट की लागत को कंट्रोल करने का दबाव है, क्योंकि वह अमेरिका के साथ बेहतर डील का इंतजार कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नए ट्रेडिंग पार्टनर और देश में हालिया चुनावी जीत से भरोसा मिल रहा है.
भारत की मजबूत स्थिति
अधिकारियों और एनालिस्ट्स ने बताया कि इस बीच, भारत ने हाल की बातचीत में अमेरिका के साथ जल्दबाजी में ट्रेड एग्रीमेंट करने से इनकार कर दिया और बेहतर डील का इंतजार कर रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नए ट्रेडिंग पार्टनर, कम आर्थिक जोखिम और देश में राजनीतिक फायदों से भरोसा मिल रहा है.
ट्रेड एनालिस्ट्स ने रॉयटर्स को बताया कि बढ़ते एक्सपोर्ट, दूसरे देशों और ग्रुप्स के साथ नए ट्रेड एग्रीमेंट और कम आर्थिक जोखिमों ने भारत की स्थिति को मजबूत किया है.
सालाना आधार पर इजाफा
अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल-जून में, ईरान युद्ध की वजह से आई रुकावटों के बावजूद, महंगे पेट्रोलियम शिपमेंट की वजह से भारत का कुल सामान का एक्सपोर्ट एक साल पहले की तुलना में लगभग 15 फीसदी बढ़ गया.
खाड़ी देशों को एक्सपोर्ट युद्ध से पहले के स्तर पर वापस आ गया है. मार्च में यह 2.62 अरब डॉलर था जो मई में बढ़कर 5.3 अरब डॉलर हो गया, क्योंकि ट्रेडर्स ने वैकल्पिक शिपिंग रूट अपना लिए थे. वहीं, अप्रैल और मई के दौरान अमेरिका को एक्सपोर्ट बढ़कर 17.29 अरब डॉलर हो गया.
भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
भारत दूसरे विकसित बाजारों तक अपनी पहुंच भी बढ़ा रहा है. इस महीने यूके के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने वाला है और अगले साल की शुरुआत तक यूरोपीय संघ (EU) के साथ एग्रीमेंट की उम्मीद है.