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ट्रेन से ₹100 करोड़ अधिक का टॉवेल, बेडशीट, कंबल और तकिया कवर चुरा ले गए यात्री, इन 7 जोन में सबसे अधिक चोरी

इंडियन रेलवे नेटवर्क पर हर रात लगभग 8 लाख AC यात्री बिस्तर के सामान (लिनन बेडरोल) का इस्तेमाल करते हैं. इसमें आमतौर पर दो चादरें, एक कंबल, एक तकिया, तकिए का कवर और एक फेस टॉवल होता है. आंकड़ों से पता चलता है कि सात जोन के 10 डिवीजन में लिनन की सबसे अधिक चोरी होती है.

भारतीय रेलवे से सामानों की चोरी. Image Credit: AI

भारतीय रेल से रोजाना लाखों लोग सफर करते हैं. एक तरह से देखें, तो रेल हमारी आवागमन की लाइफ-लाइन है. लेकिन इसी लाइफ-लाइन में जमकर चोरी हो रही है. चोरी किसी चीज की? चोरी बेडशीट की, कंबल की, तकिए के कवर की और टॉवेल की भी. द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में 2022 से लेकर मई 2026 तक हुई इन सामानों की चोरी का आंकड़ा बताया है. साथ ही यह भी बताया कि इस चोरी से रेलवे को आर्थिक रूप से कितनी रकम का नुकसान उठाना पड़ा है.

बेडरोल का सामान चोरी

इंडियन रेलवे नेटवर्क पर हर रात लगभग 8 लाख AC यात्री बिस्तर के सामान (लिनन बेडरोल) का इस्तेमाल करते हैं. इसमें आमतौर पर दो चादरें, एक कंबल, एक तकिया, तकिए का कवर और एक फेस टॉवल होता है. यह सुविधा टिकट के साथ ही मिलती है. इनमें से लगभग हर 1,000 यात्रियों में से एक, बिस्तर के सामान में से कम से कम एक चीज अपने साथ ले जाते हैं.

1.27 करोड़ बेडरोल चोरी

RTI द्वारा जुटाई गई जानकारी की अनुसार, द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जनवरी 2022 (जब महामारी के बाद बेडरोल सेवा पूरी तरह से शुरू हुई थी) से लेकर मई 2026 तक, कम से कम 1.27 करोड़ बेडरोल चोरी हुए. अधिकारियों के अनुसार, ये ज्यादातर यात्रियों ने चुराए थे. जब इस डेटा को साल-दर-साल के हिसाब से देखा गया, तो पता चला कि 2022 से 2025 के बीच ऐसी चोरियों में 56 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

रेलवे हर दिन जो सामान देती है, उसके मुकाबले यह बहुत ही मामूली मात्रा है. लेकिन यही बात इन आंकड़ों को दिलचस्प बनाती है. इसे चोरी कहें या लालच, यह डेटा सिर्फ हाउसकीपिंग स्टाफ़ की गलती नहीं दिखाता, बल्कि यात्रियों के व्यवहार की भी एक झलक देता है.

100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान

RTI डेटा के मुताबिक, चार साल से अधिक के समय में इस चोरी की वजह से बेडरोल कॉन्ट्रैक्टर्स को अनुमानित 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. कॉन्ट्रैक्टर्स के यहां काम करने वाले कोच अटेंडेंट्स का कहना है कि यह पैसा ज्यादातर उनकी सैलरी से ही वसूला जाता है.

सात जोन सबसे अधिक प्रभावित

आंकड़ों से पता चलता है कि सात जोन के 10 डिवीजन में लिनन की सबसे अधिक चोरी होती है, जो कुल चोरी का 67 फीसदी है. इनमें बीकानेर, जोधपुर और जयपुर (राजस्थान), रांची, दिल्ली; मुंबई, अहमदाबाद, सोनपुर और दानापुर (बिहार) और बिलासपुर शामिल हैं.

आंकड़े कुछ खास ट्रेंड्स की ओर इशारा करते हैं

चोरी होने वाली चीजों में तौलिए टॉप पर हैं. चेहरा पोंछने वाला तौलिया (फेस टॉवल), जिसे ले जाना सबसे आसान होता है, चोरी होने वाली चीजों की लिस्ट में सबसे ऊपर है. चार साल में 46.54 लाख तौलिए चोरी हुए. इसके बाद बेडशीट (41.13 लाख), तकिए के कवर (23.59 लाख), कंबल (12.95 लाख) और तकिए (2.76 लाख) का नंबर आता है.

बीकानेर और रांची सबसे अधिक प्रभावित

RTI के जवाबों के अनुसार, कुल लिनन चोरी की संख्या के हिसाब से सबसे ज्यादा प्रभावित डिवीजन बीकानेर (25.76 लाख आइटम), रांची (9.31 लाख) और दिल्ली (8.21 लाख) हैं. इसके बाद मुंबई (8.17 लाख बेडरोल आइटम की चोरी), जोधपुर (8.09 लाख), अहमदाबाद (6.94 लाख) और दानापुर (5.72 लाख) का नंबर आता है.

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