कारोबार में चमके कोलकाता, सूरत और ग्रेटर हैदराबाद, महिला उद्यमियों ने भी बढ़ाई हिस्सेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में कोलकाता, सूरत और ग्रेटर हैदराबाद ने उद्यमिता के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. इन तीनों शहरों में देश के 46 बड़े शहरों के कुल अनुमानित गैर-कॉरपोरेट कारोबार में 22 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी दर्ज की गई.

Unincorporated Enterprises Report: देश के बड़े शहर सिर्फ आबादी के मामले में ही नहीं, बल्कि कारोबार और रोजगार के लिहाज से भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में कोलकाता, सूरत और ग्रेटर हैदराबाद देश के सबसे बड़े गैर-कॉरपोरेट कारोबारी केंद्र बनकर उभरे हैं. इन तीनों शहरों की हिस्सेदारी देश के 46 मिलियन से अधिक आबादी वाले शहरों में मौजूद ऐसे कारोबारों का 22 फीसदी से ज्यादा है.
कोलकाता, सूरत और ग्रेटर हैदराबाद सबसे आगे
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में कोलकाता, सूरत और ग्रेटर हैदराबाद ने उद्यमिता के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. इन तीनों शहरों में देश के 46 बड़े शहरों के कुल अनुमानित गैर-कॉरपोरेट कारोबार में 22 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी दर्ज की गई.
रोजगार देने में भी आगे हैं ये शहर
रोजगार के मामले में भी ग्रेटर हैदराबाद, दिल्ली और कोलकाता सबसे आगे रहे. इन तीनों शहरों में 46 बड़े शहरों के गैर-कॉरपोरेट कारोबारों में काम करने वाले कुल कर्मचारियों का लगभग 22 फीसदी रोजगार करता है. इससे साफ है कि ये शहर देश के रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.
देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी
रिपोर्ट में 46 ऐसे शहरों को शामिल किया गया है, जिनकी आबादी 10 लाख से अधिक है. ये शहर देश के गैर-कृषि गैर-कॉरपोरेट क्षेत्र के कुल कारोबार का करीब 13 फीसदी, कुल रोजगार का 16 फीसदी और सकल मूल्य वर्धन (GVA) का 21 फीसदी योगदान देते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में इन बड़े शहरी केंद्रों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है.
महिला उद्यमियों की बढ़ी भागीदारी
रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है. 46 में से 32 बड़े शहरों में 20 फीसदी से अधिक प्रतिष्ठान महिलाओं के स्वामित्व में हैं. कुल मिलाकर इन शहरों में महिला स्वामित्व वाले प्रोपराइटरशिप कारोबार की हिस्सेदारी 27.7 फीसदी रही, जबकि दूसरे शहरी क्षेत्रों में यह 25.3 फीसदी है. महिला उद्यमिता के मामले में सूरत, वडोदरा और पुणे सबसे आगे रहे, जहां 40 फीसदी से अधिक कारोबार का स्वामित्व महिलाओं के पास है.
महिलाओं की रोजगार में भी अच्छी हिस्सेदारी
रिपोर्ट बताती है कि 46 बड़े शहरों में से 19 शहर ऐसे हैं, जहां गैर-कॉरपोरेट क्षेत्र के कुल कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 30 फीसदी से अधिक है. इससे यह संकेत मिलता है कि महिलाओं की भागीदारी सिर्फ कारोबार शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार में भी उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े शहरों में कारोबार की उत्पादकता भी ज्यादा है. 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में प्रति कर्मचारी औसत GVA 2.1 लाख रुपये रहा, जबकि दूसरे शहरी क्षेत्रों में यह 1.8 लाख रुपये है. वहीं प्रति कारोबार औसत GVA 4.2 लाख रुपये रहा, जबकि दूसरे शहरी क्षेत्रों में यह 3.2 लाख रुपये है.
कारोबार तेजी से हो रहा औपचारिक
बड़े शहरों में कारोबार के औपचारिक होने की रफ्तार भी ज्यादा है. यहां 24.3 फीसदी कारोबार में कम से कम एक वेतनभोगी कर्मचारी कार्यरत है, जबकि दूसरे शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 19 फीसदी है. इसके अलावा, बड़े शहरों में वेतनभोगी कर्मचारियों का औसत वार्षिक पारिश्रमिक 1.7 लाख रुपये रहा, जबकि दूसरे शहरी भारत में यह 1.5 लाख रुपये है.
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