माधुरी हाथिनी की दर्दभरी कहानी, वंतारा में इलाज के बाद अब कोल्हापुर वापसी

माधुरी हाथिनी ने वंतारा में एक साल से अधिक समय तक इलाज और पुनर्वास पूरा किया. गंभीर गठिया, फुट रॉट और चलने-फिरने की परेशानी से उबरने के बाद अब वह विशेष एंबुलेंस से कोल्हापुर स्थित नंदानी मठ लौट रही है.

वंतारा Image Credit:

महाराष्ट्र की हाथिनी माधुरी एक साल से ज्यादा समय तक इलाज और पुनर्वास के बाद अब कोल्हापुर लौटने के लिए तैयार है. उसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते गुजरात के जामनगर स्थित वन्यजीव पुनर्वास एवं संरक्षण केंद्र वंतारा लाया गया था. यहां विशेषज्ञों की टीम ने लंबे समय तक उसका इलाज और देखभाल की.

गंभीर बीमारियों से जूझ रही थी माधुरी

जब माधुरी वंतारा पहुंची थी, तब वह गंभीर गठिया, लंबे समय से चले आ रहे फुट रॉट और चलने-फिरने में परेशानी से जूझ रही थी. कई वर्षों तक सीमित गतिविधियों और कठोर कंक्रीट की सतह पर रहने के कारण उसके पैरों और जोड़ों पर बुरा असर पड़ा था.

इसके अलावा लंबे समय तक जंजीरों में बंधे रहने से उसकी प्राकृतिक गतिविधियां भी काफी सीमित हो गई थीं. इसके बावजूद उससे त्योहारों और सार्वजनिक जुलूसों में हिस्सा लेने के लिए लंबी दूरी तक चलवाया जाता था. कई बार उसे रस्सियों से बांधकर गर्म डामर वाली सड़कों पर भी चलाया गया.

वंतारा में मिला खास इलाज

माधुरी की देखभाल वंतारा में विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने की. इस टीम में पशु चिकित्सक, देखभाल करने वाले कर्मचारी, पोषण विशेषज्ञ और व्यवहार विशेषज्ञ शामिल थे.

एक साल से ज्यादा चले इस इलाज के दौरान माधुरी को हाइड्रोथेरेपी, लेजर थेरेपी, विशेष फुट केयर और संतुलित पोषण दिया गया. उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी गई. इलाज का मुख्य मकसद उसके दर्द और पुरानी समस्याओं को नियंत्रित करने के साथ उसकी चलने-फिरने की क्षमता में सुधार करना था.

इलाज के साथ भावनात्मक देखभाल भी

माधुरी की सेहत सुधारने के साथ उसके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया गया. वंतारा में उसे दूसरे हाथियों के साथ रहने और उनके साथ घुलने-मिलने का मौका मिला.

विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक सीमित गतिविधियों और कैद जैसी परिस्थितियों में रहने के बाद दूसरे हाथियों की संगति ने उसे सुरक्षित महसूस करने और भावनात्मक रूप से स्थिर होने में मदद की.

हाई पावर्ड कमेटी के आकलन के बाद वापसी

माधुरी की महाराष्ट्र वापसी सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई पावर्ड कमेटी (HPC) के आकलन के बाद हो रही है. कमेटी ने उसके स्वास्थ्य में हुए सुधार की समीक्षा की. इसके बाद गुजरात से महाराष्ट्र तक उसके स्थानांतरण के लिए जरूरी मंजूरियां और ट्रांजिट परमिट जारी किए गए.

खास एंबुलेंस से कोल्हापुर जाएगी माधुरी

माधुरी की वापसी के लिए एक विशेष रूप से तैयार हाथी एंबुलेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है. यात्रा के दौरान वंतारा की पशु चिकित्सा और देखभाल टीम भी उसके साथ रहेगी. इससे रास्ते में उसकी सेहत, सुरक्षा और आराम पर लगातार नजर रखी जा सकेगी.

माधुरी पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से कोल्हापुर के नंदानी मठ में रह रही है. एक साल से अधिक समय तक चले इलाज के बाद उसकी वापसी उसके स्वास्थ्य सुधार की अहम उपलब्धि मानी जा रही है. वंतारा की टीम ने उसके बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित वापसी के लिए व्यापक चिकित्सा और पुनर्वास कार्यक्रम चलाया.

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