मूडीज ने भारत की GDP ग्रोथ अनुमान को घटाया, एनर्जी की बढ़ती कीमतें और खपत में सुस्ती का दिखेगा असर
अपने ग्लोबल मैक्रो आउटलुक मई अपडेट में मूडीज ने कहा कि अगले छह महीनों में ज्यादा एनर्जी की कीमतों, ईंधन और खाद से जुड़ी कमी का असर अलग-अलग देशों में काफी अलग-अलग होगा, जो उनके जोखिम और सहनशीलता में अंतर को दिखाता है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 फीसदी हिस्सा आयात करता है.

मूडीज रेटिंग्स ने मंगलवार को 2026 के लिए भारत की GDP ग्रोथ के अनुमान को 0.8 अंक घटाकर 6 फीसदी कर दिया. इसकी वजह निजी खपत, कैपिटल फॉर्मेशन और औद्योगिक गतिविधियों में आई सुस्ती है, जो ज्यादा ऊर्जा लागत के बीच देखने को मिली है. अपने ग्लोबल मैक्रो आउटलुक मई अपडेट में मूडीज ने कहा कि अगले छह महीनों में ज्यादा एनर्जी की कीमतों, ईंधन और खाद से जुड़ी कमी का असर अलग-अलग देशों में काफी अलग-अलग होगा, जो उनके जोखिम और सहनशीलता में अंतर को दिखाता है.
भारत को नुकसान
मूडीज ने कहा, ‘अमेरिका और ईरान के बीच लगातार लंबे समय से चल रहे टकराव और नाज़ुक संघर्ष-विराम के चलते वैश्विक परिदृश्य बहुत अधिक अनिश्चित बना हुआ है. हमारा अनुमान है कि भारत को विकास में लगभग 0.8 अंक तक का नुकसान हो सकता है.’
कैलेंडर वर्ष 2027 के लिए मूडीज ने भारत के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को 0.5 अंक घटाकर 6 फीसदी कर दिया है. यह उन लगातार बनी हुई रुकावटों को दिखाता है जो धीरे-धीरे कम हो जाएंगी, जैसे-जैसे शिपिंग का आवागमन स्थिर होगा और ऊर्जा की सप्लाई बेहतर होगी, जिससे आर्थिक गतिविधियां फिर से पटरी पर आ सकेंगी.
सरकार के बजट पर पड़ेगा बोझ
मूडीज ने कहा कि भारत, आयातित कच्चे तेल और LNG पर अपनी भारी निर्भरता को देखते हुए, तेल की ऊंची कीमतों के प्रति ‘विशेष रूप से संवेदनशील’ है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 फीसदी हिस्सा आयात करता है. मूडीज ने कहा कि अनाज के नेट प्रोड्यूसर के तौर पर, कृषि निर्यात को कम समय में ज्यादा कीमतों से फायदा होगा, लेकिन ईंधन और खाद की ज्यादा लागत से सरकार के वित्त पर बोझ पड़ेगा, जिससे शायद नियोजित पूंजीगत खर्च पर रोक लग सकती है.
भारत में बिजली उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कोयले से आता है, जबकि गैर-जीवाश्म स्रोत (सौर, विंड, हाइड्रो) लगातार बढ़ रहे हैं.
एक्टिविटी में नरमी
मूडीज ने कहा, ‘2025 में 7.5 फीसदी की ग्रोथ के बाद 2026 और 2027 दोनों में 6 फीसदी की ग्रोथ का हमारा सेंट्रल सिनेरियो अनुमान, कड़ी फाइनेंशियल स्थितियों और ज्यादा एनर्जी लागत के बीच प्राइवेट खपत, कैपिटल फॉर्मेशन और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी में नरमी को दिखाता है.’
इसमें आगे कहा गया है कि लगातार ऊंची बनी रहने वाली ऊर्जा लागत महंगाई को ऊंचे स्तर पर बनाए रखेगी, मुनाफे को कम करेगी, निवेश को कमजोर करेगी और सार्वजनिक वित्त पर दबाव डालेगी. वहीं, प्रमुख केंद्रीय बैंक अभी तो यथास्थिति बनाए हुए हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वित्तीय स्थितियों को सख्त करने के लिए तैयार हैं.
होर्मुज स्ट्रेट पर सबकुछ निर्भर
अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबी खिंच रही बातचीत, जारी शिपिंग रुकावटें और सैन्य तनाव बढ़ने का खतरा, इस संघर्ष-विराम की स्थिरता के लिए खतरा हैं. इस अस्थिर माहौल के बीच, वैश्विक अर्थव्यवस्था को ऊर्जा और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में एक और संभावित झटके का सामना करना पड़ सकता है, खासकर अगर खाड़ी क्षेत्र से आने-जाने वाला आवागमन बाधित रहता है.
मूडीज ने यह बात कही और साथ ही यह भी जोड़ा कि आर्थिक विकास और महंगाई पर पड़ने वाले असर की गंभीरता इस बात पर निर्भर करेगी कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) कितने समय तक बंद रहता है.
नए सोर्स की तलाश कर रहा भारत
भारत अपनी LPG की खपत का 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है और इसमें से 90 फीसदी हिस्सा अब बंद हो चुके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है. कई एशियाई अर्थव्यवस्थाएं अपने सप्लायर मिक्स में सक्रिय रूप से विविधता ला रही हैं. इसके लिए वे अपने मौजूदा पार्टनर्स से तेल का आयात बढ़ा रही हैं और नए स्रोतों की तलाश कर रही हैं.
रूस से तेल का इंपोर्ट
मूडीज ने कहा कि भारत रूस से ज्यादा कच्चा तेल इंपोर्ट कर रहा है, जबकि जापान और कोरिया धीरे-धीरे US बैरल की ओर बढ़ रहे हैं. इसने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्थाओं को इस संकट के नतीजों से मिली-जुली और खास तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. स्ट्रेटेजिक रिजर्व सिर्फ थोड़े समय के लिए ही सुरक्षा देते हैं, क्योंकि कुछ ही महीनों में दुनिया भर में एनर्जी की असल कमी और भी अधिक गंभीर हो जाएगी. एशिया-पैसिफिक इलाका इस संकट की चपेट में सबसे ज्यादा है.
गंभीर हो जाएगी समस्या
मूडीज ने कहा कि भारत रूस से ज्यादा कच्चा तेल इंपोर्ट कर रहा है, जबकि जापान और कोरिया धीरे-धीरे US के तेल की तरफ बढ़ रहे हैं. मूडीज ने यह भी कहा कि इस संकट के नतीजों से अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मिली-जुली और अपनी-अपनी खास चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. स्ट्रेटेजिक रिजर्व से सिर्फ कुछ समय के लिए ही सुरक्षा मिल पाती है, क्योंकि कुछ ही महीनों में दुनिया भर में एनर्जी की असल कमी की समस्या और भी गंभीर हो जाएगी. एशिया-पैसिफिक इलाका इस मामले में सबसे अधिक जोखिम में है.
मूडीज़ ने कहा, ‘चीन कोयले और रिन्यूएबल एनर्जी पर अपनी निर्भरता के कारण कुछ हद तक सुरक्षित है, जबकि भारत अब भी जोखिम की स्थिति में है.’