ईरान युद्ध के बाद सरकार का बड़ा कदम, ONGC बढ़ाएगी स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व, मंगलुरु में बनेगा 17.5 लाख टन का भंडार
ईरान युद्ध के दौरान वैश्विक सप्लाई संकट के बाद भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. ONGC ने कर्नाटक के मंगलुरु में 17.5 लाख टन क्षमता वाले नए स्ट्रेटेजिक क्रूड ऑयल रिजर्व को मंजूरी दे दी है. इस प्रोजेक्ट से देश की रणनीतिक तेल रिजर्व क्षमता बढ़ेगी.

Strategic Oil Reserve: ईरान युद्ध के दौरान कच्चे तेल की सप्लाई पर आए संकट के बाद भारत ने एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सरकारी कंपनी ONGC ने कर्नाटक के मंगलुरु में स्ट्रेटेजिक क्रूड ऑयल रिजर्व बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. इस प्रोजेक्ट के तहत 17.5 लाख टन नई रिजर्व क्षमता विकसित की जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश में कच्चे तेल की उपलब्धता बनी रहेगी.
मंगलुरु में बनेगा नया स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व
रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के मंगलुरु में 17.5 लाख टन क्षमता वाले नए स्ट्रेटेजिक क्रूड ऑयल रिजर्व को मंजूरी दी है. इस प्रोजेक्ट के तहत अंडरग्राउंड रिजर्व सुविधा विकसित की जाएगी. हालांकि कंपनी ने अभी इसकी लागत और प्रोजेक्ट पूरी होने की समय सीमा की जानकारी नहीं दी है. यह भंडार देश की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा.
ईरान युद्ध के बाद लिया गया फैसला
हाल ही में ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था. इससे भारत सहित कई देशों के लिए कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है. इस अनुभव के बाद सरकार और ONGC ने रणनीतिक तेल रिजर्व क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया है ताकि भविष्य में ऐसे संकट का असर कम हो.
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देश की तेल रिजर्व क्षमता होगी मजबूत
फिलहाल Indian Strategic Petroleum Reserves Limited के पास देश के तीन स्थानों पर कुल 53.3 लाख टन की स्ट्रेटेजिक रिजर्व क्षमता है. इसके अलावा 65 लाख टन क्षमता वाले दो नए रिजर्व भी तैयार किए जा रहे हैं. ONGC की नई प्रोजेक्ट पूरी होने के बाद देश की कुल स्ट्रेटेजिक रिजर्व क्षमता में और इजाफा होगा.